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Kannauj News: न्यूनतम तापमान आठ से गिरकर शाम तक चार डिग्री सेल्सियस

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:08 AM IST
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The minimum temperature dropped from eight to four degrees Celsius by evening.
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कन्नौज। उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बर्फबारी और सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ ने मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है। इत्र नगरी में गुरुवार को मौसम के बदले तेवरों ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। बारिश के बाद चली सर्द हवाओं के कारण पारे में अचानक सात डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। जिले का अधिकतम तापमान महज 16 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जबकि न्यूनतम तापमान आठ डिग्री से गिरकर शाम तक चार डिग्री सेल्सियस पर आ गया। इससे लोग कांपते नजर आए।
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मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान हुए वायुमंडलीय बदलावों का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ है। इस मौसमी सिस्टम के प्रभाव से न केवल आसमान में बादल छाए रहे, बल्कि हल्की से मध्यम बारिश ने वातावरण में नमी बढ़ा दी। बारिश के थमते ही पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने मैदानी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। अचानक बढ़ी इस ठंड ने लोगों की दैनिक दिनचर्या पर गहरा प्रहार किया है। सुबह से ही कोहरे और धुंध के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी रही। ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर रही, जहां पशुपालकों को अपने मवेशियों को बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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फिर बनेगी शीतलहर की स्थिति
इस अप्रत्याशित बदलाव पर कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव फिलहाल बना रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दो-तीन दिनों में तापमान में और भी गिरावट आ सकती है। हवाओं की दिशा उत्तर-पश्चिमी होने के कारण गलन और बढ़ेगी। ऐसे में शीत लहर की स्थिति बनी रह सकती है।

अस्पताल में बढ़े सांस के मरीज
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु का कहना है कि तापमान में अचानक गिरावट से सांस और हृदय रोगियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने और रैन बसेरों की व्यवस्था को और पुख्ता करने की मांग की है।
आलू के खेतों से नहीं निकल रहा पानी
बारिश और गिरते पारे ने किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं। जहां हल्की बारिश गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, वहीं आलू के खेतों से पानी नहीं निकल पा रहा है, जिससे वह खेत में सड़ जाएगा। पाला गिरने की संभावना ने आलू और दलहन की फसलों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। आसमान में बादलों की आवाजाही और बर्फीली हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।
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