{"_id":"699ded6e822469ce86009c2e","slug":"youth-become-self-reliant-by-installing-a-mill-powered-by-solar-energy-kannauj-news-c-214-1-knj1008-145190-2026-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kannauj News: सोलर ऊर्जा से संचालित चक्की लगाकर युवा बने स्वावलंबी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kannauj News: सोलर ऊर्जा से संचालित चक्की लगाकर युवा बने स्वावलंबी
विज्ञापन
विज्ञापन
कन्नौज। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की मदद से एक युवा उद्यमी ने सौर ऊर्जा से चलने वाली चक्की का व्यवसाय शुरू किया है। इस पहल से ग्रामीण विकास की नई दिशा मिली है और अन्य ग्रामीणों को भी प्रेरणा मिल रही है। इस परियोजना पर आठ लाख रुपये का खर्च आया जिसमें पांच लाख रुपये का ऋण लिया गया।
सदर तहसील क्षेत्र के हैबतपुर कटरा गांव के अभिषेक दुबे ने यह व्यवसाय स्थापित किया है। उन्होंने बिजली पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। आर्थिक कमजोरी के बावजूद, उन्होंने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत ऋण प्राप्त किया। गांव में पहली सौर संचालित चक्की लगाकर उन्होंने एक नई गाथा लिखी है।
सदर विधायक और समाज कल्याण विभाग के मंत्री असीम अरुण ने इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने मंगलवार को कारखाना का दौरा कर युवा उद्यमी का हौसला बढ़ाया। कहा कि सौर ऊर्जा सस्ती, सुंदर और टिकाऊ व्यवस्था है। उन्होंने आम लोगों को भी बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग पर जोर देने को कहा। इससे कम खर्च में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सौर चक्की के लाभ
सौर पट्टिका की आयु 25 वर्ष तक मानी जाती है। यह पूर्णतया सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण बिजली बिल का कोई झंझट नहीं रहता। इससे पिसाई की लागत कम होती है और व्यवसाय में मुनाफा बढ़ता है। चक्की कम गति पर चलने से गर्म नहीं होती, जिससे आटे की गुणवत्ता और प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। रोटी भी नरम व स्वादिष्ट बनती है।
पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ तकनीक
यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है और पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली की कटौती अधिक होती है, वहां यह चक्की किसी वरदान से कम नहीं है। यह तकनीक कम खर्च में अधिक लाभ कमाने का अवसर प्रदान करती है।
-- -- -- --
Trending Videos
सदर तहसील क्षेत्र के हैबतपुर कटरा गांव के अभिषेक दुबे ने यह व्यवसाय स्थापित किया है। उन्होंने बिजली पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। आर्थिक कमजोरी के बावजूद, उन्होंने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत ऋण प्राप्त किया। गांव में पहली सौर संचालित चक्की लगाकर उन्होंने एक नई गाथा लिखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सदर विधायक और समाज कल्याण विभाग के मंत्री असीम अरुण ने इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने मंगलवार को कारखाना का दौरा कर युवा उद्यमी का हौसला बढ़ाया। कहा कि सौर ऊर्जा सस्ती, सुंदर और टिकाऊ व्यवस्था है। उन्होंने आम लोगों को भी बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग पर जोर देने को कहा। इससे कम खर्च में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सौर चक्की के लाभ
सौर पट्टिका की आयु 25 वर्ष तक मानी जाती है। यह पूर्णतया सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण बिजली बिल का कोई झंझट नहीं रहता। इससे पिसाई की लागत कम होती है और व्यवसाय में मुनाफा बढ़ता है। चक्की कम गति पर चलने से गर्म नहीं होती, जिससे आटे की गुणवत्ता और प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। रोटी भी नरम व स्वादिष्ट बनती है।
पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ तकनीक
यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है और पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली की कटौती अधिक होती है, वहां यह चक्की किसी वरदान से कम नहीं है। यह तकनीक कम खर्च में अधिक लाभ कमाने का अवसर प्रदान करती है।
