फर्रुखाबाद ट्रेन बवाल: 500 ग्रामीणों से बचाकर बोगी में बंद किए गए आरोपी किन्नर; दो घंटे चला था खूनी ड्रामा
Farrukhabad News: कासगंज-फर्रुखाबाद पैसेंजर ट्रेन में हुए विवाद के बाद आरोपी किन्नर और उसके सहयोगी को सुरक्षित निकालने के लिए जीआरपी और आरपीएफ ने विशेष रणनीति अपनाई। स्थानीय रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी के बीच दोनों को इंजन के पीछे दूसरी बोगी में ले जाकर गोपनीय तरीके से स्टेशन लाया गया।
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कासगंज से फर्रुखाबाद आ रही पैसेंजर ट्रेन में किन्नर द्वारा आढ़त कर्मी सुनील कुमार पर चाकू से हमला किए जाने के बाद हरसिंहपुर गोवा हाल्ट स्टेशन पर स्थिति बेहद भयावह हो गई। बुधवार रात घटी इस सनसनीखेज घटना के बाद करीब 02 घंटे तक स्टेशन पर भारी बवाल और पथराव चलता रहा। लगभग 500 से अधिक आक्रोशित ग्रामीणों ने पूरी ट्रेन को चारों तरफ से घेर लिया था।
ग्रामीणों का मुख्य निशाना आरोपी किन्नर और उसका साथी थे। स्थिति बिगड़ते देख जीआरपी और आरपीएफ की टीमों ने त्वरित सूझबूझ का परिचय देते हुए इंजन से ठीक दूसरे नंबर की बोगी को खाली कराया और बेहद गोपनीय तरीके से आरोपियों को उसमें बंद करके सुरक्षित फर्रुखाबाद स्टेशन तक पहुंचाया।
बोगी में चले अग्निशामक सिलेंडर, सीटों पर बिखरी मिली सफेद गैस
ट्रेन के फर्रुखाबाद स्टेशन पहुंचने पर जीआरपी द्वारा खाली कराई गई बोगी का नजारा खौफनाक दास्तान बयां कर रहा था। ट्रेन के इंजन से दूसरी बोगी में आग बुझाने वाले अग्निशामक सिलेंडरऔर अन्य आपातकालीन सामान जगह-जगह बिखरा पड़ा था।
बोगी की सीटों और फर्श पर सफेद गैस का पाउडर स्पष्ट रूप से फैला हुआ दिखाई दे रहा था। आशंका जताई जा रही है कि चलती ट्रेन में जब किन्नर और आढ़त कर्मी सुनील के बीच विवाद बढ़ा और चाकूबाजी हुई, तो दहशत में आए यात्रियों या आरोपियों ने खुद को बचाने अथवा अफरा-तफरी मचाने के लिए बोगी में रखे अग्निशामक यंत्रों को चला दिया था।
दहशत में रहे यात्री, तीन से चार बोगियों को घेरे रहे आक्रोशित ग्रामीण
हरसिंहपुर गोवा हाल्ट पर ट्रेन रुकते ही 500 से अधिक ग्रामीणों की भारी भीड़ ने ट्रेन पर धावा बोल दिया था। घबराए यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए अंदर से डिब्बे लॉक कर लिए थे। हालांकि, कुछ उपद्रवी युवकों ने जबरन दरवाजे खुलवा लिए। ग्रामीणों की तलाश मुख्य रूप से उसी डिब्बे पर केंद्रित थी जिसमें आरोपी किन्नर और उसका साथी छिपे हुए थे, जिसके चलते भीड़ ने 03 से 04 बोगियों को पूरी तरह घेर रखा था।
यदि आरोपी पुलिस के हाथ लगने से पहले ग्रामीणों के हत्थे चढ़ जाते, तो वहां बड़ी लिंचिंग या अनहोनी घटना घट सकती थी। आरपीएफ और जीआरपी ने कड़ी सुरक्षा घेराबंदी बनाकर आरोपियों को निकाला और सीधे जीआरपी थाने की सलाखों के पीछे पहुंचाया।
लिखापढ़ी में उलझी रही जीआरपी
इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे और पुलिसिया कार्रवाई के बीच जीआरपी की घोर संवेदनहीनता भी उजागर हुई। हमले में घायल आढ़त कर्मी सुनील कुमार के हाथ की नस कट जाने से गहरा जख्म हुआ था और उसका खून लगातार बह रहा था।
प्राथमिक इलाज न मिलने के कारण पीड़ित युवक लगभग 03 घंटे तक अपने हाथ के घाव को पॉलिथीन से दबाए रखने को मजबूर रहा। रात लगभग 10:45 बजे जब जीआरपी टीम घायल को थाने लेकर पहुंची, तो वहां भी उसे तुरंत अस्पताल या फर्स्ट एड दिलाने के बजाय पुलिस कर्मी कागजी लिखापढ़ी में ही उलझे रहे।
घटना में पीड़ित सुनील कुमार, उसका साथी सौरभ, भाई अनिल कुमार और एक अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए हैं। देर रात तक पीड़ित परिवार के दर्जनों लोग जीआरपी थाने में डटे रहे और आरोपियों पर सख्त से सख्त धाराओं में कार्रवाई की मांग करते रहे।