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UP: मरते दम तक फंदे पर लटकाओ, 56 दिन में आया 46 पन्नों का फैसला; जज ने दुष्कर्म के दोषी को सुनाई मौत की सजा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 07 Jan 2026 06:38 AM IST
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सार

Banda News: 12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद मुकदमा शुरू हुआ। बचाव पक्ष ने सबूतों की कमी का हवाला दिया लेकिन, अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया। कुल 56 दिनों तक चली सुनवाई के दौरान 10 गवाह पेश किए गए।

Banda Hang him till death the 46 page verdict came in 56 days judge sentences rape convict to death
मृत्युदंड की सजा सुनाने के बाद दोषी को न्यायालय से जेल ले जाती पुलिस - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बांदा जिला सत्र विशेष न्यायालय (पाॅक्सो) ने एक जघन्य अपराध के मामले में 24 वर्षीय अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाई है। उस पर छह साल की बच्ची दुष्कर्म और हैवानियत का आरोप सिद्ध हुआ। मंगलवार सुबह न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने 46 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कहा, दोषी को मरते दम तक फंदे से लटका कर रखा जाए। इसके बाद उन्होंने कलम की निब तोड़ दी।

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न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे जघन्य अपराध करने वालों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है। यह सनसनीखेज घटना 25 जुलाई 2025 को कालिंजर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। दोषी अमित रैकवार स्कूल से लौट रही छह साल की बच्ची को फुसलाकर अपने घर ले गया था। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने बच्ची को गुटखा मंगाने के बहाने रोका और फिर घर ले जाकर दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं।

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अमित रैकवार को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया
दुष्कर्म के दौरान बच्ची के शरीर पर दांतों से काटने के कई निशान पाए गए और मेडिकल जांच में पता चला कि पीड़िता के शरीर में कई जगहों पर गंभीर चोटें थीं। पुलिस ने वारदात के बाद ही देर रात अमित रैकवार को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। तीन दिन बाद पुलिस ने उसे जेल भेजा था। सात अक्टूबर 2025 को कालिंजर पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें पॉक्सो एक्ट की धारा छह और भारतीय नवीन दंड संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।

56 दिन में आया फैसला
12 नवंबर को आरोप तय होने के बाद मुकदमा शुरू हुआ। बचाव पक्ष ने सबूतों की कमी का हवाला दिया लेकिन, अदालत ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया। कुल 56 दिनों तक चली सुनवाई के दौरान 10 गवाह पेश किए गए। इनमें पीड़िता का इलाज करने वाले तीन डॉक्टरों का पैनल, फॉरेंसिक, डीएनए, मेडिकल रिपोर्ट और बीएनएसएस की धारा 180 व 183 के तहत दर्ज बयान शामिल थे।

मौत की सजा को ही न्यायोचित बताया
इन सभी सबूतों ने आरोपी को पुख्ता तौर पर दोषी साबित किया। सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि आरोपी ने मासूम को पहले बहलाया, फिर घर में ले जाकर दुष्कर्म किया। अधिवक्ता ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में बताते हुए मौत की सजा को ही न्यायोचित बताया। छह साल की मासूम से दुष्कर्म के दोषी अमित रैकवार को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार के चेहरों पर सुकून और चिंता के मिले-जुले भाव नजर आए।



धमकी से दहशत में परिवार
इस फैसले के बाद भी परिवार की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। पीड़िता की मां ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि पूरी तरह सुकून तब मिलेगा, जब वह फंदे पर लटक जाएगा। अभी तो डर लगा रहता है। वहीं आरोपी के पिता ने कथित तौर पर धमकी देते हुए कहा कि तीन बेटे अभी भी जिंदा हैं, जिससे परिवार में दहशत का माहौल है।

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