Banda: शादी के दिन युवती की संदिग्ध हालात में मौत, बारात से पहले छाया मातम; पोस्टमार्टम से खुलेगा राज
Banda News: जिले के फतेहगंज थाना क्षेत्र के डढ़वा-मानपुर गांव में मंगलवार को उस समय खुशियां मातम में बदल गईं, जब शादी के दिन ही युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जिस घर में बारात के स्वागत की तैयारियां चल रही थीं, वहीं अचानक चीख-पुकार मच गई।
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रामऔतार की 18 वर्षीय पुत्री श्वेता की मंगलवार को बारात आनी थी। सुबह भोर में उसने पेट दर्द की शिकायत की। परिजनों ने पहले झाड़फूंक कराई, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
खुशियों की तैयारी बनी आंसुओं की याद
घर के बाहर सजे टेंट और हलवाई द्वारा बनाए गए पकवान अब परिजनों को कचोट रहे हैं। पिता रामऔतार ने रुंधे गले से बताया कि बेटी की शादी के लिए उन्होंने अपनी क्षमता से बढ़कर तैयारियां की थीं। झांसी से आने वाली बारात के स्वागत के लिए पूरा गांव उत्साहित था। "कल तक वह ठीक थी, शादी के कपड़ों को देख मुस्कुरा रही थी, पता नहीं अचानक क्या हो गया," पिता के ये शब्द वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर रहे थे। घर में रखा शादी का सामान, दुल्हन का जोड़ा और गहने अब केवल एक दर्दनाक याद बनकर रह गए हैं। शादी वाले घर में जहाँ मंगल गीत गाए जाने थे, वहां अब केवल सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी मौत की गुत्थी
श्वेता की मौत का कारण अब भी रहस्य बना हुआ है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद ने बताया कि युवती को जब अस्पताल लाया गया, वह मृत अवस्था में थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला नहीं लग रहा है क्योंकि शरीर पर किसी भी तरह के बाहरी चोट के निशान या संदिग्ध लक्षण नहीं मिले हैं। पेट में अचानक उठा दर्द किसी आंतरिक समस्या या किसी जहरीले जीव के काटने का परिणाम भी हो सकता है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। अब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे मौत की सटीक वजह साफ हो सके।
छह बहनों में सबसे बड़ी थी श्वेता, सिर से उठा साया
रामऔतार की छह पुत्रियां हैं, जिनमें श्वेता सबसे बड़ी थी। बड़ी बहन होने के नाते घर की जिम्मेदारियों और छोटी बहनों की देखभाल में वह हमेशा आगे रहती थी। पिता को उम्मीद थी कि श्वेता का हाथ पीला करने के बाद वह अन्य बेटियों के भविष्य की योजना बनाएंगे। श्वेता की मौत ने न केवल एक पिता का सपना तोड़ा है, बल्कि पांच छोटी बहनों के सिर से उनकी बड़ी बहन और मार्गदर्शक का साया भी छीन लिया है। पूरे गांव के लोग इस विपदा की घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, लेकिन मां की रुलाई और बहनों की सूनी आंखों का जवाब किसी के पास नहीं है।

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