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Bdy Spcl: जानिए क्या है शहीद चंद्रशेखर आजाद के बारे में 'सबसे कड़वा सच'

Mon, 23 Jul 2018 06:22 PM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 23 Jul 2018 06:22 PM IST
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Bharat Mata's heroic son Chandrashekhar Azad
चंद्रशेखर आजाद जन्मदिवस विशेष
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा वीर सपूत जिसके सामने अंग्रेज थर-थर कांपते थे। वह इतना फुर्तीला और बुद्धिमान था कि उसे जिंदा पकड़ना ब्रिटिश हुकूमत के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। हम बात कर रहे हैं पंडित चंद्रशेखर तिवारी उर्फ चंद्रशेखर आजाद की। 

आजाद के जन्मदिन पर जानिए उनके शहीद होने के बाद क्या हुआ परिवार का हाल....
 
चंद्रशेखर आजाद का नाम असल में चंद्रशेखर तिवारी ही था लेकिन बाद में इन्होंने खुद को आजाद घोषित कर दिया था और कभी अंग्रेजों के हाथो ना मरने की कसम खाई थी। पंडित सीताराम तिवारी उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के बदर गांव के रहने वाले थे। लेकिन भीषण अकाल के चलते वे मध्यप्रदेश के ग्राम भाबरा में जा बसे थे। जी हां 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के भाबरा गांव में ही सीताराम तिवारी और जगरानी देवी के घर एक बच्चा पैदा हुआ था। नाम रखा गया चंद्रशेखर तिवारी। 

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- वह अकेले ही मुकाबला करते रहे...

 
Bharat Mata's heroic son Chandrashekhar Azad
चंद्रशेखर आजाद और उनकी मां की पुरानी फोटो
चंद्रशेखर तिवारी का जन्मदिन आज पूरा भारत चंद्रशेखर आजाद के जन्मदिवस के नाम से मना रहा है। जैसा कि इन्होंने कभी भी अग्रेंजों के हाथों न मरने की कसम खाई थी वैसा ही इन्होंने किया भी। 27 फरवरी, 1931 को जब इलाहाबाद के एलफ्रेड पार्क में आजाद को अग्रेजों ने घेर लिया था तो काफी देर तक वह अकेले उनका मुकाबला करते रहे लेकिन जब अंत में उनके पास केवल एक गोली बची थी तो उन्होंने खुद को गोली मार ली थी।

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- आजाद के शहीद होने के बाद मां ने कैसे काटी जिदंगी
 
Bharat Mata's heroic son Chandrashekhar Azad
शहीद भगत सिंह की मां के देहांत के बाद झांसी में बनवाया गया स्मारक
क्या आप जानते हैं आजाद के शहीद होने के खबर उनकी मां को कई महीने बाद मिली थी। वो पहले ही ऐसी दुख की घड़ी से गुजर रही थी उस पर से जब उन्हें यह पता चला कि उनका बेटा नहीं रहा तो वह पूरी तरह टूट गई। आपको बताने जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद के शहीद होने के बाद उनकी मां ने कैसे जिदंगी काटी।
बतातें हैं कि चंद्रशेखर ने अपनी फरारी के करीब 5 साल बुंदेलखंड में गुजारे थे। इस दौरान वे ओरछा और झांसी में रहे। ओरछा में सातार नदी के किनारे गुफा के समीप कुटिया बना कर वे डेढ़ साल रहे थे।

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- आजाद की मां का हाल देख दोस्त की भर आई थी आंखें...
 
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Bharat Mata's heroic son Chandrashekhar Azad
चंद्रशेखर आजाद जन्मदिवस विशेष
फरारी के समय सदाशिव उनके सबसे विश्वसनीय लोगों में से एक थे। आजाद इन्हें अपने साथ मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा गांव ले गए थे और अपने पिता सीताराम तिवारी और माता जगरानी देवी से मुलाकात करवाई थी। सदाशिव आजाद के शहीद होने के बाद भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते रहे और कई बार जेल गए। देश को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद वह चंद्रशेखर के माता-पिता का हालचाल पूछने उनके गांव पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि चंद्रशेखर की शहादत के कुछ साल बाद उनके पिता का भी देहांत हो गया था।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- गरीबी में जीवन जी रही मां ने किसी के सामने हाथ न फैलाए...
 
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Bharat Mata's heroic son Chandrashekhar Azad
चंद्रशेखर आजाद जन्मदिवस विशेष
आजाद के भाई की मृत्यु भी उनसे पहले ही हो चुकी थी। पिता के देहांत के बाद चंद्रशेखर की मां बेहद गरीबी में जीवन जी रहीं थी। गरीबी के बावजूद उन्होंने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। वो जंगल से लकड़ियां काटकर लाती थीं और उनको बेचकर ज्वार-बाजरा खरीदती थी। भूख लगने पर ज्वार-बाजरा का घोल बनाकर पीती थीं। उनकी यह स्थिति देश को आजादी मिलने के 2 साल बाद (1949) तक जारी रही।

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः-जब झांसी में हुआ आजाद की मां का निधन...
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