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Bdy Spcl: जानिए क्या है शहीद चंद्रशेखर आजाद के बारे में 'सबसे कड़वा सच'
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 23 Jul 2018 06:22 PM IST
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चंद्रशेखर आजाद जन्मदिवस विशेष
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा वीर सपूत जिसके सामने अंग्रेज थर-थर कांपते थे। वह इतना फुर्तीला और बुद्धिमान था कि उसे जिंदा पकड़ना ब्रिटिश हुकूमत के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। हम बात कर रहे हैं पंडित चंद्रशेखर तिवारी उर्फ चंद्रशेखर आजाद की।
चंद्रशेखर आजाद और उनकी मां की पुरानी फोटो
चंद्रशेखर तिवारी का जन्मदिन आज पूरा भारत चंद्रशेखर आजाद के जन्मदिवस के नाम से मना रहा है। जैसा कि इन्होंने कभी भी अग्रेंजों के हाथों न मरने की कसम खाई थी वैसा ही इन्होंने किया भी। 27 फरवरी, 1931 को जब इलाहाबाद के एलफ्रेड पार्क में आजाद को अग्रेजों ने घेर लिया था तो काफी देर तक वह अकेले उनका मुकाबला करते रहे लेकिन जब अंत में उनके पास केवल एक गोली बची थी तो उन्होंने खुद को गोली मार ली थी।
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शहीद भगत सिंह की मां के देहांत के बाद झांसी में बनवाया गया स्मारक
क्या आप जानते हैं आजाद के शहीद होने के खबर उनकी मां को कई महीने बाद मिली थी। वो पहले ही ऐसी दुख की घड़ी से गुजर रही थी उस पर से जब उन्हें यह पता चला कि उनका बेटा नहीं रहा तो वह पूरी तरह टूट गई। आपको बताने जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद के शहीद होने के बाद उनकी मां ने कैसे जिदंगी काटी।
बतातें हैं कि चंद्रशेखर ने अपनी फरारी के करीब 5 साल बुंदेलखंड में गुजारे थे। इस दौरान वे ओरछा और झांसी में रहे। ओरछा में सातार नदी के किनारे गुफा के समीप कुटिया बना कर वे डेढ़ साल रहे थे।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- आजाद की मां का हाल देख दोस्त की भर आई थी आंखें...
बतातें हैं कि चंद्रशेखर ने अपनी फरारी के करीब 5 साल बुंदेलखंड में गुजारे थे। इस दौरान वे ओरछा और झांसी में रहे। ओरछा में सातार नदी के किनारे गुफा के समीप कुटिया बना कर वे डेढ़ साल रहे थे।
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चंद्रशेखर आजाद जन्मदिवस विशेष
फरारी के समय सदाशिव उनके सबसे विश्वसनीय लोगों में से एक थे। आजाद इन्हें अपने साथ मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा गांव ले गए थे और अपने पिता सीताराम तिवारी और माता जगरानी देवी से मुलाकात करवाई थी। सदाशिव आजाद के शहीद होने के बाद भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करते रहे और कई बार जेल गए। देश को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद वह चंद्रशेखर के माता-पिता का हालचाल पूछने उनके गांव पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि चंद्रशेखर की शहादत के कुछ साल बाद उनके पिता का भी देहांत हो गया था।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- गरीबी में जीवन जी रही मां ने किसी के सामने हाथ न फैलाए...
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चंद्रशेखर आजाद जन्मदिवस विशेष
आजाद के भाई की मृत्यु भी उनसे पहले ही हो चुकी थी। पिता के देहांत के बाद चंद्रशेखर की मां बेहद गरीबी में जीवन जी रहीं थी। गरीबी के बावजूद उन्होंने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया। वो जंगल से लकड़ियां काटकर लाती थीं और उनको बेचकर ज्वार-बाजरा खरीदती थी। भूख लगने पर ज्वार-बाजरा का घोल बनाकर पीती थीं। उनकी यह स्थिति देश को आजादी मिलने के 2 साल बाद (1949) तक जारी रही।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः-जब झांसी में हुआ आजाद की मां का निधन...
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