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Kanpur News: होजरी उद्योग के लिए बने क्लस्टर या अपैरल पार्क, खुले डिजाइन स्टूडियो
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कानपुर। शहर में आजादी के पहले से स्थापित और एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल टेक्सटाइल, होजरी, रेडीमेड कपड़ा उद्योग को बजट से खासी उम्मीदें हैं। सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाले होजरी उद्यमियों की मांग भी है कि शहर में होजरी क्लस्टर स्थापित किया जाए या फिर इंटीग्रेटेड अपैरल पार्क दिया जाए। नए-नए डिजाइन के लिए डिजाइन स्टूडियो, प्रयोगशाला, प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना हो और मशीनरी के आधुनिकीकरण के लिए पैकेज दिया जाए।
शहर में पांच हजार करोड़ से ज्यादा के होजरी उत्पादों का सालाना कारोबार है। एक समय शहर के शिल्पा, विनाका, गेलार्ड ब्रांड के उत्पादों का बाजार में दबदबा था। अब तिरूपुर, कोलकाता में बनने वाले उत्पादों का बाजार पर 90 प्रतिशत से ज्यादा का कब्जा है। शहर के दर्शनपुरवा, पनकी, दादानगर, चकेरी में होजरी उद्योग फैला हुआ है। 2020 में एक जिला एक उत्पाद योजना में होजरी को शामिल किया गया था लेकिन उसका कोई खास लाभ अब तक मिलता नहीं दिख रहा है। शहर का होजरी उद्योग कोलकाता और तिरुपुर के अनुपात में कहीं नहीं ठहरता है। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उप्र में 80-90 प्रतिशत होजरी उत्पादों की जरूरत बाहरी राज्यों के ब्रांड से ही पूरी होती है।
उद्यमियों का कहना है कि कोलकाता और तिरुपुर में बनने वाले उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए जरूरी है कि उद्योग को तकनीक रूप से अपग्रेड किया जाए। होजरी क्लस्टर समय की जरूरत है। 2004 में केंद्र सरकार ने मंजूरी भी दी लेकिन राज्य के अफसरों ने मामला आगे नहीं बढ़ने दिया। 22 साल पहले जब क्लस्टर की जरूरत समझी गई थी। इसके बाद भी यह स्थिति है कि आज तक कोई होजरी क्लस्टर नहीं बन सका। जानकारों का कहना है कि उद्योग समय के अनुसार खुद को अपग्रेड नहीं कर पाया। शहर में इकाइयां पुरानी हैं और तकनीक रूप से बेहद पीछे हैं।
बातचीत
बजट में सरकार होजरी उद्योग के लिए क्लस्टर की घोषणा करे। बंद पड़ी कपड़ा मिलाें की किसी भी एक मिल में इसे बनाया जा सकता है। जॉब वर्करों के लिए फ्लैटेड फैक्टरी बनाई जाए। होजरी उद्योग सबसे ज्यादा रोजगार देता है लेकिन अन्य शहरों की तुलना में यह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। -बलराम नरूला, एमडी, जेट निटवियर
होजरी, टेक्सटाइल उद्योग के कारण ही शहर का नाम मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट था। इसे फिर से पुनर्जीवित करने के प्रयास होने चाहिए। इंटीग्रेटेड अपैरल पार्क की घोषणा बजट में की जाए। डिजाइन स्टूडियो, प्रिशक्षण प्रयोगशाला की व्यवस्था की जाए। रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार एक पैकेज उद्योग के लिए दे।
-मनोज बंका, अध्यक्ष, नार्दर्न इंडिया होजरी मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन
शहर में थोक कपड़ों का बड़ा बाजार है। बीआईसी, एनटीसी की बंद मिलों की जमीनों का इस्तेमाल कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया जाए। लाल इमली मिल को चलाने की घोषणा पूर्व में की गई थी। बजट में इसके लिए धन का आवंटन किया जाए। -रूमित सिंह सागरी, निदेशक, कानपुर कपड़ा कमेटी
आयकर की टीडीएस और कैपिटल गेन की व्यवस्था में बदलाव किया जाए। 50 लाख के कारोबार पर टीडीएस काटने का प्रावधान खत्म किया जाए। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर लगने वाला 20 प्रतिशत टैक्स खत्म हो। -विक्की गुलाटी, अध्यक्ष, कानपुर कपड़ा कमेटी
12 लाख की छूट के बाद 75000 तक मानक कटौती की छूट मिलती है। उसी प्रकार मेडिकल पॉलिसी में 50 हजार की छूट मिलनी चाहिए। इनकम टैक्स में छह वर्ष तक रिवीजन का प्रावधान है। 12 लाख की आयकर लिमिट बढ़ाकर 15 लाख और सीनियर सिटीजन की लिमिट 20 लाख हो। -सत्यनारायण सिंहानिया, पूर्व अध्यक्ष, कानपुर कपड़ा कमेटी
शहर में होजरी उद्योग पर एक नजर
- सालाना टर्नओवर : एक हजार करोड़
- निटिंग, प्रोसेसिंग की 100-100 इकाई
- सिलाई की एक हजार इकाई
- अलग-अलग ब्रांड की 300-350 अन्य इकाइयां संचालित
उद्योग की जरूरतें
उच्च तकनीक वाली निटिंग, प्रोसेसिंग यूनिटें, ऑटोमेटिक कटिंग मशीन उद्योगों को सरकार उपलब्ध कराए। कर्मचारियों को कुशल बनाया जाए। नई तकनीक वाली सिलाई मशीनें, प्रिंटिंग और एब्रायडरी वाली तकनीक और मशीनें मिलें। उत्पादन करने वाली इकाइयों के उद्यमियों को प्रशिक्षण मिले।
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शहर में पांच हजार करोड़ से ज्यादा के होजरी उत्पादों का सालाना कारोबार है। एक समय शहर के शिल्पा, विनाका, गेलार्ड ब्रांड के उत्पादों का बाजार में दबदबा था। अब तिरूपुर, कोलकाता में बनने वाले उत्पादों का बाजार पर 90 प्रतिशत से ज्यादा का कब्जा है। शहर के दर्शनपुरवा, पनकी, दादानगर, चकेरी में होजरी उद्योग फैला हुआ है। 2020 में एक जिला एक उत्पाद योजना में होजरी को शामिल किया गया था लेकिन उसका कोई खास लाभ अब तक मिलता नहीं दिख रहा है। शहर का होजरी उद्योग कोलकाता और तिरुपुर के अनुपात में कहीं नहीं ठहरता है। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उप्र में 80-90 प्रतिशत होजरी उत्पादों की जरूरत बाहरी राज्यों के ब्रांड से ही पूरी होती है।
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उद्यमियों का कहना है कि कोलकाता और तिरुपुर में बनने वाले उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए जरूरी है कि उद्योग को तकनीक रूप से अपग्रेड किया जाए। होजरी क्लस्टर समय की जरूरत है। 2004 में केंद्र सरकार ने मंजूरी भी दी लेकिन राज्य के अफसरों ने मामला आगे नहीं बढ़ने दिया। 22 साल पहले जब क्लस्टर की जरूरत समझी गई थी। इसके बाद भी यह स्थिति है कि आज तक कोई होजरी क्लस्टर नहीं बन सका। जानकारों का कहना है कि उद्योग समय के अनुसार खुद को अपग्रेड नहीं कर पाया। शहर में इकाइयां पुरानी हैं और तकनीक रूप से बेहद पीछे हैं।
बातचीत
बजट में सरकार होजरी उद्योग के लिए क्लस्टर की घोषणा करे। बंद पड़ी कपड़ा मिलाें की किसी भी एक मिल में इसे बनाया जा सकता है। जॉब वर्करों के लिए फ्लैटेड फैक्टरी बनाई जाए। होजरी उद्योग सबसे ज्यादा रोजगार देता है लेकिन अन्य शहरों की तुलना में यह आगे नहीं बढ़ पा रहा है। -बलराम नरूला, एमडी, जेट निटवियर
होजरी, टेक्सटाइल उद्योग के कारण ही शहर का नाम मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट था। इसे फिर से पुनर्जीवित करने के प्रयास होने चाहिए। इंटीग्रेटेड अपैरल पार्क की घोषणा बजट में की जाए। डिजाइन स्टूडियो, प्रिशक्षण प्रयोगशाला की व्यवस्था की जाए। रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार एक पैकेज उद्योग के लिए दे।
-मनोज बंका, अध्यक्ष, नार्दर्न इंडिया होजरी मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन
शहर में थोक कपड़ों का बड़ा बाजार है। बीआईसी, एनटीसी की बंद मिलों की जमीनों का इस्तेमाल कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया जाए। लाल इमली मिल को चलाने की घोषणा पूर्व में की गई थी। बजट में इसके लिए धन का आवंटन किया जाए। -रूमित सिंह सागरी, निदेशक, कानपुर कपड़ा कमेटी
आयकर की टीडीएस और कैपिटल गेन की व्यवस्था में बदलाव किया जाए। 50 लाख के कारोबार पर टीडीएस काटने का प्रावधान खत्म किया जाए। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर लगने वाला 20 प्रतिशत टैक्स खत्म हो। -विक्की गुलाटी, अध्यक्ष, कानपुर कपड़ा कमेटी
12 लाख की छूट के बाद 75000 तक मानक कटौती की छूट मिलती है। उसी प्रकार मेडिकल पॉलिसी में 50 हजार की छूट मिलनी चाहिए। इनकम टैक्स में छह वर्ष तक रिवीजन का प्रावधान है। 12 लाख की आयकर लिमिट बढ़ाकर 15 लाख और सीनियर सिटीजन की लिमिट 20 लाख हो। -सत्यनारायण सिंहानिया, पूर्व अध्यक्ष, कानपुर कपड़ा कमेटी
शहर में होजरी उद्योग पर एक नजर
- सालाना टर्नओवर : एक हजार करोड़
- निटिंग, प्रोसेसिंग की 100-100 इकाई
- सिलाई की एक हजार इकाई
- अलग-अलग ब्रांड की 300-350 अन्य इकाइयां संचालित
उद्योग की जरूरतें
उच्च तकनीक वाली निटिंग, प्रोसेसिंग यूनिटें, ऑटोमेटिक कटिंग मशीन उद्योगों को सरकार उपलब्ध कराए। कर्मचारियों को कुशल बनाया जाए। नई तकनीक वाली सिलाई मशीनें, प्रिंटिंग और एब्रायडरी वाली तकनीक और मशीनें मिलें। उत्पादन करने वाली इकाइयों के उद्यमियों को प्रशिक्षण मिले।
