Farrukhabad: रिकॉर्ड पैदावार बनी किसानों का 'काल'; लागत न निकलने पर खेतों में चलवा रहे ट्रैक्टर, पढ़ें रिपोर्ट
Farrukhabad News: फर्रुखाबाद में रिकॉर्ड पैदावार और बाजार में कम दाम के कारण आलू किसान बर्बादी की कगार पर हैं। लागत न निकलने और कोल्ड स्टोरेज में जगह न होने के कारण किसान अपनी तैयार फसल को खेतों में ही नष्ट करने को मजबूर हैं।
विस्तार
आमतौर पर फसल की बंपर पैदावार किसानों को मालामाल कर देती है लेकिन इस बार आलू की रिकॉर्ड पैदावार ने ही किसानों को बेहाल कर दिया। इसका प्रमुख कारण यह है कि इस जिले की पूरी अर्थव्यवस्था आलू पर ही निर्भर है। अब हालत यह है कि जिस आलू फसल के लिए किसानों ने खेत में दिन-रात मेहनत कर खून पसीना एक किया। उसी तैयार फसल को मिट्टी में मिलाते हुए उनके आंसू निकल रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जिस आलू की फसल में एक बीघे पर लागत 12-13 हजार रुपये आ रही है।
उसे बाजार में बेचने पर मात्र 8500 रुपये मिल रहे हैं। फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद, नवाबगंज और कमालगंज ब्लॉकों में अभी भी खेतों में आलू के ढेर लगे हैं। किसी ने इसे पराली से ढक दिया है, तो किसी ने पेड़ की छाया में इसका पहाड़ खड़ा कर रखा है। कोल्डस्टोरेज मालिक और आलू के बड़े किसान हरीश दुबे का कहना है कि मंडी में ले जाने पर दो सौ से तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इसे भविष्य के लिए भी सुरक्षित नहीं किया जा सकता क्योंकि सभी कोल्डस्टोरेज 90 फीसदी तक फुल हो चुके हैं।
कोल्डस्टोरेज के आलू के लिए बाजार ढूंढे नहीं मिलेगा
जो 10 फीसदी जगह बची है वह भी किसी न किसी ने रिजर्व करा रखी है। अभी करीब 30 फीसदी आलू खेतों में ही पड़ा है। जितना आलू कोल्डस्टोरेज जा चुका है उसमें भी आधा ही आलू इस साल निकल पाएगा। 10-12 फीसदी बीज में काम आएगा। बाकी का आलू फेंकना ही पड़ेगा। अभी जो आलू खेतों में पड़ा है उसे मई-जून तक बेचने का प्रयास किया जाएगा। कोल्डस्टोरेज के आलू के लिए बाजार ढूंढे नहीं मिलेगा। मैंने खुद तीन हजार पैकेट आलू कोल्डस्टोरेज में रखवाया है।
किसानों की बात- कर्जदार बनाने लगा तो मिट्टी में मिला दिया
कमालगंज विकासखंड के नहरैया गांव के प्रधान सुनील कुमार बताते हैं कि उनके चाचा रमेश सिंह ने 20 बीघे में आलू बोया था। इनमें से सिर्फ पांच बीघा आलू उन्होंने बाजार 35 हजार रुपये में बेचा। जबकि इस आलू पर कुल मिलाकर लागत ही 40 हजार रुपये आई थी। अब बाकी 15 बीघा आलू अगर खोदवाते हैं, तो उस पर सिर्फ खुदाई की लागत ही 35-37 हजार रुपये आ रही थी इसलिए बुधवार को 15 बीघा आलू पर ट्रैक्टर चलवा कर मिट्टी में मिलवा दिया।
करथिया गांव के बृजेश का कहना है कि 10 बीघा खेत 95 हजार रुपये में उगाही पर लिया था। इसमें आलू लगवाने और खाद-पानी में करीब एक लाख रुपये का खर्चा आया। आलू की बंपर पैदावार तो हुई लेकिन इसका दाम कोई बाजार में दो सौ रुपये क्विंटल भी देने को तैयार नहीं है। नतीजा यह है कि करीब छह सौ पैकेट आलू पेड़ के नीचे पड़े-पड़े सड़ गया। इस आलू ने पैसा तो एक नहीं दिलवाया कर्जदार अलग बनवा दिया।
कुछ ऐसा ही दर्द लखौरवा के रहने वाले धर्मवीर का भी है उनका कहना है कि उन्होंने 14 बीघे में आलू की खेती की थी। इसमें चार बीघा आलू के दो सौ पैकेट लेकर फर्रुखाबाद सातनपुर मंडी गए थे। आलू नहीं बिका तो वापस ले आए। इससे निराश होकर मंगलवार को उन्होंने अपना दस बीघा आलू मिट्टी में मिलवा दिया।
मोहम्मदाबाद विकास खंड के नगला दरियाय के संजय 20 बीघा में आलू बोया था। अभी उनका पूरा आलू खेत में ही पड़ा है। उनका कहना है कि एक बीघे में 50-55 पैकेट आलू निकल रहा है। बेचने पर मंडी में लागत भी नहीं निकल रही है। एक क्विंटल का भाव सिर्फ चार से साढ़े चार सौ रुपये ही मिल रहा है। हम कोशिश में हैं पूरा आलू कोल्ड स्टोरेज में रखवा दें। हालांकि बाद में भी इसका अच्छा भाव मिलेगा इसकी उम्मीद कम ही है।
बंगाल के आलू ने बिगाड़ा बाजार, निर्यात भी बंद
बड़े आलू किसान और व्यापारी बृजेश दुबे का कहना है कि हमारा आलू बड़े पैमाने पर बंगाल, बिहार और झारखंड जाता था, लेकिन इस बार बंगाल में 15 करोड़ पैकेट आलू की पैदावार हुई है। जो अनुमान से दो करोड़ पैकेट ज्यादा है। बंगाल का आलू गोरखपुर क्या कानपुर तक आ रहा है। जबकि हमारे लिए वहां आलू भेजने पर भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो जा रहा है। गुजरात में भी इस बार आलू की 15 फीसदी ज्यादा पैदावार हुई है। हरीश दुबे का कहना है कि सरकार भी वादा नहीं निभा रही। ढुलाई में छूट न मिलने के कारण हमारा आलू दुबई, श्रीलंका और नेपाल भी नहीं जा पा रहा है।
बेटी की शादी टाली, फीस के भी पैसे नहीं
किसी ने अपनी बेटी की शादी टाल दी है, तो किसी ने घर में एक कमरा बनाने का प्लान। कई किसान बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहे हैं। जैदपुर के किसान भूरे सिंह का कहना है आलू ने उन्हें ऐसी चोट दी कि उन्हें अपनी बेटी की शादी ही टालनी पड़ गई। मोहम्दाबाद के ही एक बड़े रेस्टोरेंट और स्कूल के संचालक ने बताया कि इस आलू से उन्हें करीब दो करोड़ की चोट लगने का अनुमान है। न रेस्टोरेंट का कारोबार चल रहा है न स्कूल में प्रवेश के लिए मारामारी की ही उम्मीद है। सब आलू ही कराता है।
फर्रुखाबाद में आलू की खेती
- कुल रकबा- 42 हजार 950 हेक्टेयर।
- कुल उपज- 15.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक।
- कोल्ड स्टोरेज- 113।
- भंडारण क्षमता- 10.57 लाख मीट्रिक टन।
- अब तक भंडारण- 90 फीसदी (9.52 लाख मीट्रिक टन) ।
पिछले वर्ष
- कोल्ड स्टोरेज- 109
- भंडारण क्षमता- 10.39 लाख मीट्रिक टन
- भंडारण- 7.79 लाख मीट्रिक टन
- इस साल कितना अधिक भंडारण- एक लाख 71 हजार 978 मीट्रिक टन किया जा चुका।
आलू का गणित
- एक पर बीघा लागत: 12-13 हजार (बीज समेत)
- एक बीघा में उपज: 27-28 क्विंटल
- बाजार में दाम: 300 रुपये प्रति क्विंटल
- हर बीघे पर घाटा: करीब पांच हजार रुपये