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Farrukhabad: सलमान खुर्शीद बोले- इस्राइल–ईरान युद्ध पर भारत की चुप्पी ठीक नहीं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: Shikha Pandey Updated Sat, 07 Mar 2026 05:48 PM IST
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सार

पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। दबाव में काम करने का आरोप लगाया। 

Farrukhabad: Salman Khurshid says India's silence on the Israel-Iran war is not right
पत्रकारों से वार्ता करते पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने शनिवार को अपने गांव पितौरा में इस्राइल और ईरान के बीच हो रहे युद्ध पर भारत सरकार के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय विषय पर भारत की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं दे रही है, जबकि देश को शांति और बातचीत के पक्ष में खुलकर बोलना चाहिए।
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गांव पितौरा स्थित शीतगृह में पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत के संबंध लंबे समय से इस्राइल और ईरान के साथ रहे हैं। ऐसे में मौजूदा हालात में भारत को संतुलित और स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। भारत की विदेश नीति हमेशा शांति, संतुलन और संवाद पर आधारित रही है, इसलिए इस समय भारत की सक्रिय भूमिका जरूरी है। कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की खामोशी ठीक नहीं है। भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश की चुप्पी अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई सवाल खड़े कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत को दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को ध्यान में रखते हुए शांति और कूटनीतिक समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए।
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पूर्व विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत अब कई मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की स्थिति में नहीं दिख रहा है और अन्य देशों के दबाव में काम करता नजर आता है। रूस से तेल खरीद के मुद्दे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से 30 दिन की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई थी, जो इस स्थिति की ओर संकेत करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपनी शर्तों पर काम करने के दावे पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने इसे समर्पण बताया। इस्राइल–गाजा मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमास के हमले का समर्थन नहीं करती लेकिन मासूम बच्चों की मौत का विरोध करने का साहस भारत को दिखाना चाहिए। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट होना चाहिए। इस दौरान पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद, उमर खुर्शीद, युवक कांग्रेस के प्रदेश सचिव जुनैद खान, जिलाध्यक्ष शकुंतला देवी, उजैर खान, अनिल मिश्रा और सावेज उर्फ मंत्री समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

गठबंधन की राजनीति में कुछ पाना और खोना पड़ता है
पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने गठबंधन की राजनीति को आज की वास्तविकता बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी पार्टियां भी इसके बिना प्रभाव नहीं बना पातीं। खुर्शीद ने स्पष्ट किया कि गठबंधन में कुछ लाभ और कुछ हानि होती है, पर कोई दल खुद को समाप्त नहीं करता। उन्होंने करीब दस वर्ष तक चली यूपीए सरकार को गठबंधन की सफलता का उदाहरण बताया। विभिन्न दलों के साथ मिलकर सरकार चलाना भारतीय लोकतंत्र की स्थापित परंपरा है। खुर्शीद ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण दिया, जिन्होंने चीन-वियतनाम युद्ध पर चीन यात्रा बीच में छोड़ी थी। आगामी चुनाव पर उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करता है। फर्रुखाबाद से पत्नी लुईस खुर्शीद के संभावित टिकट का फैसला भी पार्टी नेतृत्व और संगठन स्तर पर होगा।
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