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हृदयविदारक: बारिश में तिरपाल तानकर हुआ अंतिम संस्कार, दो मासूमों के सिर से उठा पिता का साया
Wed, 05 Aug 2026 05:55 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: Shikha Pandey
Updated Wed, 05 Aug 2026 05:55 PM IST
सार
Jalaun News: श्मशान घाट पर टीनशेड न होने से परिजनों को परेशानी हुई। ग्रामीणों ने सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
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तिरपाल तानकर हुआ अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विकासखंड कुठौंद के ग्राम नौरेजपुर में बुधवार को एक मार्मिक घटना ने सभी को भावुक कर दिया। गुजरात में इलाज के दौरान युवक की मौत के बाद जब उसका शव गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। लगातार हो रही बारिश के बीच श्मशान घाट पर टीनशेड या पक्की छत न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करना पड़ा।
ग्राम नौरेजपुर निवासी देवेंद्र पाल (36) कई वर्षों से गुजरात के पालनपुर में रंगाई का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे देवेंद्र का मंगलवार को पालनपुर के सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। बुधवार सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंच गए। अंतिम संस्कार के समय तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट पर बारिश से बचाव के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में ग्रामीणों ने तिरपाल लगाकर किसी तरह चिता को बारिश से बचाया और अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कराईं।
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ग्राम नौरेजपुर निवासी देवेंद्र पाल (36) कई वर्षों से गुजरात के पालनपुर में रंगाई का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे देवेंद्र का मंगलवार को पालनपुर के सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। बुधवार सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंच गए। अंतिम संस्कार के समय तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट पर बारिश से बचाव के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में ग्रामीणों ने तिरपाल लगाकर किसी तरह चिता को बारिश से बचाया और अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कराईं।
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ग्रामीणों ने श्मशान घाट पर टीनशेड, पक्की छत और अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से जल्द व्यवस्था कराने की मांग की है। देवेंद्र अपने पीछे छह वर्षीय पुत्र और चार वर्षीय पुत्री को छोड़ गए हैं। पिता की असमय मौत से दोनों मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया। अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों का विलाप देखकर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
इस दौरान गुलजारी पाल, सियाराम पाल, बालकिशुन, अभिलाख, गोविंद, पूर्व प्रधान कृष्ण कुमार, सोबरन पाल, प्रमोद कोटेदार, नरपाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। खंड विकास अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला।