Kanpur: रुमा में चीखें, महाराजपुर में मातम; बेगुनाह मौतों का जिम्मेदार कौन? हाईवे पर बिछा है 'मौत का जाल'
Kanpur News: हाईवे के किनारे नियमों को ताक पर रखकर बेतरतीब खड़े भारी ट्रक, कंटेनर और डीसीएम हर दिन बेगुनाह जिंदगियों के लिए काल बन रहे हैं। महाराजपुर के रूमा के पास हुआ ताजा हादसा इसका सबसे दर्दनाक उदाहरण है, जहां एक कार हाईवे किनारे खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भयानक थी कि मौके पर ही भाई-बहन समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
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विस्तार
महाराजपुर के रूमा में हाईवे किनारे खड़े ट्रक से स्कॉर्पियो की भिड़ंत में भाई-बहन समेत तीन लोगों की मौत और नौ लोगों के घायल होने की घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। हाईवे किनारे बेतरतीब खड़े ट्रक, कंटेनर और डीसीएम लगातार लोगों की जान ले रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई कुछ दिनों तक सीमित रह जाती है।
रफ्तार का कहर और चंद सेकंड में उजड़ गया परिवार
कानपुर से गुजरने वाले तमाम प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग— चाहे वह सागर हाईवे हो, अलीगढ़ हाईवे, प्रयागराज हाईवे, लखनऊ हाईवे या फिर इटावा हाईवे आज 'किलर पार्किंग' में तब्दील हो चुके हैं। इन हाईवे पर स्थित होटलों और ढाबों के बाहर सड़क की मुख्य लेन तक भारी वाहनों की अवैध पार्किंग चौबीसों घंटे देखी जा सकती है।
दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण यह है कि 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर रहे वाहन चालकों के पास अचानक सामने आ जाने वाले इन खड़े ट्रकों से बचने का कोई मौका या वक्त नहीं होता।
रात के अंधेरे या तड़के कोहरे के समय यह स्थिति और भी खौफनाक हो जाती है। जब तक चालक को आगे वाहन खड़े होने का अहसास होता है, तब तक गाड़ी ट्रक के नीचे समा चुकी होती है। महज कुछ ही सेकंड के भीतर हंसते-खेलते पूरे के पूरे परिवार तबाह हो जाते हैं।
पुलिस, एनएचएआई और परिवहन विभाग की नाकामी
बड़ा सवाल यह है कि जब यह अवैध पार्किंग खुलेआम और रोजाना हो रही है, तो स्थानीय थाना पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग वैन, एनएचएआई और परिवहन विभाग का दस्ता आखिर किसकी निगरानी कर रहा है? नियमों के मुताबिक हाईवे पर किसी भी व्यावसायिक वाहन को इस तरह असुरक्षित खड़ा करने की अनुमति नहीं है। लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि यह जिम्मेदार विभाग सिर्फ तमाशा देखते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बड़े हादसे के बाद प्रशासन जागता है, कुछ दिनों के लिए चेकिंग और जुर्माने का दिखावा कर खानापूर्ति की जाती है, और जैसे ही मामला शांत होता है, स्थितियां फिर पहले जैसी हो जाती हैं। ढाबा और होटल संचालक अपने निजी मुनाफे के लिए ट्रकों को मुख्य सड़क पर पार्क करवाते हैं, और प्रशासनिक अधिकारी इस पर आंखें मूंदे रहते हैं।
एक जैसी लापरवाही, एक जैसे खूनी हादसे
कानपुर के विभिन्न हाईवे पर पिछले दो वर्षों में खड़े वाहनों से टकराकर हुए ये बड़े हादसे साबित करते हैं कि यह समस्या कितनी गहरी हो चुकी है:
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20 मई 2024: महाराजपुर में हाईवे किनारे खड़े डीसीएम से कार की भिड़ंत, 3 लोगों की मौत।
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14 अक्तूबर 2024: पनकी क्षेत्र में खड़े ट्रक से तेज रफ्तार कार टकराई, 5 लोगों ने मौके पर दम तोड़ा।
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16 अक्तूबर 2024: महाराजपुर में दोबारा खड़े डीसीएम से कार टकराई, एक दरोगा और युवती की दर्दनाक मौत।
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01 दिसंबर 2024: सेनपश्चिम पारा में सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराकर बाइक सवार युवक की मौत।
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17 मई 2025: बिल्हौर क्षेत्र में हाईवे पर खड़े ट्रक से ट्रैक्टर-ट्रॉली भिड़ी, 1 की मौत।
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30 अगस्त 2025: शिवराजपुर में खड़े ट्रक से पीछे से आ रहे कंटेनर की भिड़ंत, क्लीनर की मौत।
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18 अक्तूबर 2025: सचेंडी में खड़े ट्रक से अनियंत्रित कार टकराई, मामा-भांजे की मौके पर मौत।
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19 अक्तूबर 2025: महाराजपुर में एक बार फिर खड़े ट्रक से वैन जा टकराई, वैन चालक की मौत।
कब तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही?
हाईवे किनारे बिछे इस 'मौत के जाल' को हटाने के लिए अब तक कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई है। अधिकांश स्थानों पर भारी वाहनों के ठहराव के लिए कोई वैध पार्किंग या ले-बाय (Lay-by) की व्यवस्था नहीं है।
जनता की मांग है कि जब तक इन हादसों के लिए जिम्मेदार ढाबा संचालकों पर मुकदमे दर्ज नहीं होंगे और गश्त में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर सख्त कानूनी गाज नहीं गिरेगी, तब तक नेशनल हाईवे पर बेगुनाहों के खून से लिखी जाने वाली यह खूनी दास्तान बंद होने वाली नहीं है। अब देखना यह है कि रूमा के इस ताजा मर्मांतक हादसे के बाद जागा सिस्टम क्या कोई ठोस कदम उठाता है या फिर एक बार फिर कागजी दावों के पीछे सच को दबा दिया जाएगा।