Kanpur: 30 करोड़ से बना था अमृत भारत ब्रिज, दो साल में धंसीं दीवारें, गिर रहा RCC का मलबा, जांच-मरम्मत की मांग
Kanpur News: सरसौल में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 30 करोड़ की लागत से बने रेलवे ओवरब्रिज की दीवारें महज दो साल के भीतर धंसने लगी हैं। जुलाई 2024 में जनता को समर्पित इस ब्रिज के जोड़ों और दीवारों से आरसीसी के टुकड़े टूटकर नीचे गिर रहे हैं, जिससे बरसात के मौसम में राहगीरों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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कानपुर में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बना सरसौल रेलवे ओवरब्रिज महज दो साल में ही जर्जर होने लगा है। जुलाई 2024 में जनता को समर्पित इस 30 करोड़ के ब्रिज की दीवारें जगह-जगह धंस गई हैं और टूटकर मलबा नीचे गिर रहा है। बरसात में हादसे का अंदेशा बढ़ गया है। इस परियोजना की आधारशिला एक जनवरी 2022 को नए साल के मौके पर रखी गई थी।
करीब दो साल के निर्माण के बाद जुलाई 2024 में ब्रिज का लोकार्पण कर आम जनता के लिए खोला गया था। लेकिन उद्घाटन के दो साल के अंदर ही इसकी पोल खुलने लगी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक नरवल मोड़ से टौंस की तरफ जाने वाले मार्ग पर जहां गाटर खत्म होकर सड़क शुरू होती है, वहीं ब्रिज की दोनों तरफ की दीवारें धंस गई हैं।
नीचे की स्थिति जस की तस है
करीब 15 दिन पहले ऊपर धंसी सड़क पर डामरीकरण कर गड्ढों को बंद कर दिया गया, लेकिन नीचे की स्थिति जस की तस है। दीवारों से आरसीसी के टुकड़े टूट-टूटकर राहगीरों के ऊपर गिर रहे हैं। आसपास दुकान चलाने वाले लोगों का कहना है कि ब्रिज को सड़क से जोड़ने वाली जगह पर अब भी लकड़ी की प्लाई लगी हुई है।
कमजोर जोड़ के कारण दीवारें धंसीं
उसे नहीं हटाया गया, जिस कारण जोड़ सही से नहीं बन पाया। इसी कमजोर जोड़ के कारण दीवारें धंस रही हैं और ऊपर की आरसी भी टूटकर नीचे आ रही है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों की लागत से बना यह ब्रिज तकनीकी खामियों और लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। स्थानीय निवासी ने कहा कि "दो साल में अगर हाल यह है तो आगे क्या होगा।
बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग
रोज सैकड़ों छात्र, बुजुर्ग और दो पहिया वाहन चालक इसी रास्ते से गुजरते हैं। कभी कोई बड़ा हादसा हो गया तो जिम्मेदार कौन होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे से मांग की है कि ब्रिज की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और धंसी हुई दीवारों की स्थायी मरम्मत कराई जाए। बरसात के मौसम में मलबा गिरने से किसी की जान न जाए, इसके लिए बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड भी लगाने की मांग की गई है।