खास खबर: सलाद का 'टेढ़ा खीरा' पहुंचा सकता है नुकसान, मीठी मूली से भी रहें सतर्क; CSA के अध्ययन में बड़ा खुलासा
Kanpur News: सीएसए के शोध के अनुसार टेढ़ा खीरा फल मक्खी के संक्रमण के कारण होता है। वहीं, मूली का तीखापन ही उसके असली औषधीय गुण (भूख बढ़ाना) की पहचान है।
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खाने के साथ सलाद तैयार करते समय खीरे और मूली की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। कभी भी सलाद में टेढ़े खीरे को न शामिल करें। अगर इसमें मूली मिला रहे हैं तो पहले तीखेपन को जांच लें। टेढ़ा खीरा और मीठी मूली स्वास्थ्यवर्धक के लिए फायदेमंद नहीं हैं। सीएसए के अध्ययन में पाया गया कि टेढ़ा खीरा संक्रमित होता है। वहीं मीठी मूली में उसका मुख्य औषधीय गुण जो भूख बढ़ाने के लिए काम करता है वह नहीं होता।
अध्ययन में पाया गया कि खीरे में टेढ़ापन मुख्य रूप से फल मक्खी के कारण होता है, जो खीरे का रस चूसकर वहां संक्रमण फैलाती है। इससे खीरे की कोशिकाओं में खराबी आ जाती है और फल सिकुड़कर विकृत हो जाता है। इसके साथ ही पौष्टिकता और कड़वाहट भी प्रभावित होती है। सीएसए के पादप रोग एवं कीट विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मुकेश श्रीवास्तव के अनुसार खीरे में कड़वाहट एल्कोलाइड के कारण होती है जो पाचन में मदद करते हैं।
मूली की पौष्टिकता हो जाती है प्रभावित
वहीं मूली का तीखापन का कारण इसके उलट है। यह मुख्य रूप से एफिड्स कीट की गतिविधि से बनता है। जब ये कीट मूली के पत्ते खाते हैं तो लार छोड़ते हैं जो मूली के आइसोथायोसाइनेट एल्कोलाइड को सक्रिय कर देती है। यह एल्कोलाइड भूख बढ़ाने में मदद करता है। यदि कीट मूली को नहीं खाते, तो उसका तीखापन कम रहता है। हालांकि पत्ती पर कीटों के निशान होने से इसकी बिक्री में दिक्कत आती है। इस लिए किसान कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं। इससे मूली की पौष्टिकता प्रभावित हो जाती है।
यह ध्यान रखें
- सीधे आकार का ही खीरा लें।
- टेढ़ा खीरा ले लिया है तो उतना हिस्सा काटकर निकाल दें।
- मूली के पत्तों में कीट के खाने की वजह से छेद हैं तो बेहतर।
- आलू, टमाटर, परवल आदि सब्जियां इतने आकार की लें कि मुट्ठी में आएं।
- कीड़े लगी सब्जियों का मतलब कि इस पर कीटनाशक नहीं डाला गया।
