Kanpur Cyber Crime: कर्नाटक के एक ट्रस्ट के खाते से 30 करोड़ मिला ट्रांजेक्शन, चीन-कंबोडिया से भी जुड़ा कनेक्श
Kanpur News: कानपुर में साइबर ठगों ने ट्रस्ट के खातों और साधारण लोगों के म्यूल अकाउंट्स के जरिए 125 करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन किया है। चीन और कंबोडिया के शातिर अपराधी भारतीय बैंक खातों का इस्तेमाल कर रुपयों को क्रिप्टो करेंसी में बदल रहे हैं।
विस्तार
कानपुर में साइबर अपराधी हवाला कारोबार, सट्टेबाजी, ठगी के रुपयों को कई खातों में ट्रांसफर कराते हैं। इसके लिए बाकायदा कमीशन दिया जाता है। बर्रा पुलिस की जांच में बैंक अधिकारियों, स्टाफ और अन्य के अलावा कई ट्रस्टों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके बैंक खातों में करोड़ों के ट्रांजेक्शन मिले हैं। इन ट्रस्टों को 30 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। कर्नाटक के एक ट्रस्ट के बैंक खाते से 30 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मिला है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी फर्म बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के लिए सेकेंड लेयर के खातों का इस्तेमाल करते हैं। यह सेकेंड लेयर म्यूल अकाउंट या किसी अन्य का खाता होता है। वहां से रुपयों को तीसरी, चौथी और पांचवीं लेयर तक ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस कार्य के लिए शातिर कई लोगों को कमीशन और नौकरी पर रखते हैं। रकम को एक लेयर से दूसरे लेयर तक ले जाने से पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच मुख्य आरोपी तक जल्दी नहीं पहुंच पाती है।
ट्रस्ट के बैंक खातों में रुपये भेजने से नहीं होता है शक
इस दौरान बीच में ही चेन तोड़ दी जाती है, जिससे मास्टरमाइंड बच निकलते हैं। कई बार खाता धारक को ही इसकी जानकारी नहीं होती है कि उसके खाते में लाखों या करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है। बर्रा पुलिस की जांच में कर्नाटक की जामिया इस्लामुल बन्नत ईसी ट्रस्ट का नाम आया है। इस ट्रस्ट के बैंक खाते में नवी मुंबई में कारोबारी को डिजिटल अरेस्ट कर हुई ठगी के 30 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसी तरह महाराष्ट्र, चेन्नई, लखनऊ, गुजरात के कुछ ट्रस्टों का नाम भी सामने आया है। ट्रस्ट के बैंक खातों में रुपये भेजने से शक की सुई उन पर नहीं घूमती है।
जेल गए साइबर अपराधियों से मिला कनेक्शन
बर्रा थाना प्रभारी रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ दिन पहले ही दक्षिण क्षेत्र से जेल भेजे गए साइबर ठगी के आरोपियों में से एक का संपर्क आगरा के अंचित गोयल से था। दोनों के बीच बातचीत का रिकॉर्ड मिला है। यह कमीशन लेकर बैंक खाते मुहैया कराने का काम कर रहा था। बर्रा पुलिस ने 12 अप्रैल को आठ आरोपियों को जेल भेजा था।
चीन, इंडोनेशिया, कंबोडिया के शातिरों पर शक
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक साउथ जोन की साइबर सेल जांच कर रही है। जेल गए आरोपियों के बैंक खातों, उनके मोबाइल की लोकेशन, आईपी एड्रेस आदि चेक किए गए हैं। यह चीन और कंबोडिया के लग रहे हैं। उनका वीपीएन नंबर इन्हीं देशों का आ रहा है। यह साइबर ठगी या फर्म फर्म बना उसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के लिए कई बार ट्रांजेक्शन करते हैं। यह लेनदेन के लिए भारतीय बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। रुपये निकालकर उनको क्रिप्टो करेंसी में परिवर्तित किया जाता है। यह कार्य चीन, इंडोनेशिया और कंबोडिया के साइबर अपराधी कर रहे हैं।
बैंकों को दिया जाएगा नोटिस
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ठगी की रकम ठिकाने लगाने के आरोपियों की सीधी सेटिंग कुछ बैंक अधिकारियों से मिली है। यह पुलिस के खाते फ्रीज करने के निर्देशों को दरकिनार कर आरोपियों को जानकारी दे देते हैं। इस बीच रुपये आसानी से निकल जाते हैं। मुंबई के कारोबारी से हुए डिजिटल अरेस्ट के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। पुलिस के पास चार-चार लाख रुपये निकलने का रिकाॅर्ड सामने आया है। बैंकों को नोटिस दिया जाएगा।
डिलीवरी बॉय के खाते में 67 करोड़ का लेनदेन
डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि वरुण विहार बर्रा का सोनू शर्मा ऑनलाइन कंपनी में डिलीवरी का कार्य करता है। उसके खाते में 67 करोड़ का लेनदेन हुआ था। इसी तरह वरुण विहार के सतीश पांडेय के खाते में 53 करोड़ और गोविंदनगर 5 ब्लॉक के साहिल विश्वकर्मा के खाते में एक करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ। सतीश पांडेय, अंचित गोयल का कार चालक रहा है। साहिल विश्वकर्मा टैटू बनाने का काम करता है। पुलिस की जांच में गिराेह का संपर्क साइबर अपराधियों, हवाला कारोबारियों, डिजिटल अरेस्ट करने वालों से मिला है।
