Kanpur: मुक्त व्यापार समझौते से ईयू के साथ 22% निर्यात बढ़ने की संभावना, अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव भी होगा कम
Kanpur News: फियो का कहना है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता कानपुर समेत भारत के वैश्विक व्यापार जुड़ाव में एक रणनीतिक पहल साबित होगी। यूरोपीय संघ भारत का 22वां एफटीए भागीदार बना है।
विस्तार
यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मंगलवार को हस्ताक्षर किए गए। इससे शहर के निर्यात में 20-22 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी होने की संभावना जताई गई है। चमड़ा और इससे बने उत्पादों के अलावा टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, हैंडीक्राफ्ट कारोबार में नया बूम देखने को मिलेगा। चमड़ा और इससे बने उत्पादों पर टैरिफ शून्य किया गया है। अभी तक अलग-अलग उत्पादों पर 4.5 से लेकर 17 प्रतिशत तक टैरिफ लगता था। शहर से यूरोपीय यूनियन को सालाना 3600 करोड़ का निर्यात किया जा रहा है।
शहर के निर्यात में यूरोपीय यूनियन की सबसे बड़ी और अहम भागीदारी है। निर्यातकों और निर्यातक संगठन का कहना है कि ऐतिहासिक एफटीए से अमेरिकी के भारी-भरकम टैरिफ का दबाव कम होगा। अमेरिका के बाद यूरोपीय यूनियन समूह में सबसे बड़ा बाजार है। 27 देशों के साथ कारोबारी गतिविधियां बढ़ेंगी। अभी 12-13 देशों के साथ ही ज्यादा कारोबार होता था। इसके अलावा जर्मनी, इटली से नई-नई तकनीक आ सकेंगी। ये हर उद्योग जगत के लिए संजीवनी से कम नहीं होगा। इस साल की शुरूआत में शहर ने निर्यात के मोर्चे पर नया मुकाम हासिल किया था।
4287.25 करोड़ का निर्यात किया गया था
चमड़ा और चमड़ा उत्पादों के दम पर कानपुर ने बीते साल की तुलना में निर्यात में लंबी छलांग लगाई। पूरे प्रदेश में कानपुर निर्यात के मामले में चौथे से तीसरे स्थान पर पहुंच गया था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में शहर से 10,401 करोड़ का निर्यात किया गया था। वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरूआती छह महीनों में शहर से 4287.25 करोड़ का निर्यात किया गया था, लेकिन अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर शहर के चमड़ा, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, सब्जी मसाला कारोबार पर गहरा असर पड़ा।
भारत का 22वां एफटीए भागीदार बना
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (फियो) का कहना है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता कानपुर समेत भारत के वैश्विक व्यापार जुड़ाव में एक रणनीतिक पहल साबित होगी। यूरोपीय संघ भारत का 22वां एफटीए भागीदार बना है। सरकार ने पिछले साल ओमान और यूके के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते की भी घोषणा की। यूरोपीय यूनियन में 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय निर्यातों को यूरोपीय संघ में तरजीही प्रवेश मिलता है।
लेदर फुटवियर की मांग मजबूत
इससे बड़े पैमाने पर विकास की संभावना खुलती हैं। शहर से कपड़ा, चमड़ा और चमड़ा के उत्पादों का व्यापक स्तर पर निर्यात किया जाता है। तैयार चमड़ा और संबंधित उत्पाद के निर्यात में 27% हिस्सेदारी बढ़ सकती है। (जर्मनी, इटली, फ्रांस) जैसे देशों में लेदर फुटवियर की मांग मजबूत है। भारत-यूरोपीय संघ एफटीए भारत और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ ब्लॉक के बीच द्विपक्षीय आर्थिक जुड़ाव, व्यापार को मजबूत करने और रणनीतिक सहयोग में एक नया अध्याय बनेगा।
- यूरोपीय यूनियन केंद्रित क्षेत्र: ऑस्ट्रिया, अजरबैजान, बेल्जियम, बुल्गारिया, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, कज़ाकिस्तान, लिकटेंस्टीन, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्पेन, स्वीडन, स्विटज़रलैंड, तुर्किए, यूनाइटेड किंगडम (यूके)
- अभी इन देशों के साथ है ज्यादा कारोबार: इटली, ग्रीस, ऑट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी, पाेलैंड, स्पेन, स्वीडन, पुर्तगाल, बेल्जियम, बुल्गारिया, नीदरलैंड, नार्वे।
यूराेपीय यूनियन कानपुर समेत देश के सबड़े बड़े बाजारों में शुमार है। इसकी ट्रेड हिस्सेदारी 44 प्रतिशत है। ये समझौता चमड़ा उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि ये समझौता जल्द से जल्द लागू होना चाहिए। एफटीए होने से नई-नई तकनीक कानपुर में आ सकेगी। नई तकनीक के लिए खुद को तैयार भी करना होगा। ये उद्योगों के लिए बहुत बड़ा अवसर है। उद्योग को बढ़ाने के लिए सरकार कई हजार करोड़ का पैकेज भी लाने वाली है। -राजेंद्र कुमार जालान, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
एफटीए बड़ा परिवर्तन लेकर आएगा। इससे श्रम आधारित और प्रोसेस आधारित उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। इटली, जर्मनी, फ्रांस से नए-नए उत्पादों के फैशन की जानकारी मिल सकेगी। नई-नई तकनीक और समझौते होंगे। इससे शहर का निर्यात बढ़ेगा। अमेरिका एक देश के नजरिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। समूह के रूप में यूरोपीय यूनियन इससे बड़ा बाजार है। सभी प्रकार के चमड़ा उत्पादों की मांग यूराेपीय यूनियन के देशों में है। इससे अमेरिकी टैरिफ दबाव कम हो सकेगा। -यादवेंद्र सचान, चमड़ा उत्पाद निर्यातक
भारत-यूरोपीय संघ एफटीए एक गेम-चेंजिंग अवसर होगा। शून्य शुल्क पहुंच निर्यात विकास को बढ़ाएगा। इस समझौते से आने वाले समय में निर्यात में 20-22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की संभावना होगी। चमड़ा उत्पादों, केमिकल पर दर शून्य प्रस्तावित है। इससे चमड़ा उद्योग नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकेगा। इससे एमएसएमई को बढ़ावा मिलेगा खासकर श्रम आधारित उद्योगों में नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे। अभी यूरोप के 12-13 देशाें में कारोबारी गतिवधियां होती थी। अब सभी 27 देशों में गतिविधियां बढ़ सकेंगी। -आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फियो
