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जेके कैंसर इंस्टीट्यूट: न सर्जन…न रेडियोलॉजिस्ट और न आधुनिक मशीनें, बदहाली की मार झेल रहे हैं मरीज, पढ़ें डिटेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 16 Jan 2026 10:44 AM IST
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सार

Kanpur News: जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में मूलभूत सुविधाओं और डॉक्टरों के अभाव ने नए विभागों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। करोड़ों का बजट खर्च होने के बावजूद मरीजों को मुफ्त सर्जरी का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जो सरकारी स्वास्थ्य दावों की पोल खोलता है।

Kanpur JK Cancer Institute No surgeons no radiologists and no modern machines patients are suffering
जेके कैंसर इंस्टीट्यूट - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में आंको सर्जरी विभाग बने 10 महीने हो गए, लेकिन कैंसर रोगियों की सर्जरी नहीं हो पा रही। रोगियों को सर्जरी के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। सेंकाई के लिए लीनियर एक्सलरेटर न होने के कारण आयुष्मान और दूसरी योजनाएं के लाभार्थी नर्सिंगहोम चले जाते हैं। विभाग में एक रेडियोलॉजिस्ट तक नहीं है जो सीटी, एमआरआई की जांच कर सके। इंस्टीट्यूट में शासन ने सर्जिकल आंकोलॉजी, एनेस्थीसिया, पैथोलॉजी नए विभाग बनाए और रेडिएशन आंकोलॉजी को अपडेट किया था।

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रेडिएशन आंकोलॉजी, तो पहले से चल रहा था। एनेस्थीसिया और पैथोलॉजी में फैकल्टी आ गई लेकिन कैंसर रोगियों के लिए जो सबसे जरूरी विभाग है वही नहीं चल पाया। इससे नए विभाग बनने से रोगियों को कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। यहां सर्जरी नहीं हो रही है। रोगियों के ऑपरेशन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी आंको सर्जन के साथ रेजीडेंट डॉक्टर हैं। यहां सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के छह पद हैं। महानिदेशालय चिकित्सा शिक्षा ने अभी तक एक भी सीनियर रेजीडेंट की नियुक्ति नहीं की है।

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नहीं मिल रहे हैं आंको सर्जन
विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए 10 महीने से वॉक इन इंटरव्यू चल रहा है लेकिन कोई आया ही नहीं। यहां एक सर्जन को संविदा पर रखा जरूर गया है, लेकिन सर्जरी नहीं हो पाती। सर्जन का अपना निजी कैंसर अस्पताल भी है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित विशेषज्ञ की नियुक्ति न होने पर यहां सर्जरी की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. एसएन प्रसाद का कहना है कि आंको सर्जन मिल नहीं रहे हैं। वॉक इन इंटरव्यू में कोई नहीं आता।

आयुष्मान और दूसरी कैशलेस योजनाओं के लाभार्थी भी नहीं आते
इसके अलावा सीनियर रेजीडेंट के लिए महानिदेशालय को पत्र भेजा है। उन्होंने बताया कि लीनियर एक्सलरेटर न होने की वजह से आयुष्मान और दूसरी कैशलेस योजनाओं के लाभार्थी भी नहीं आते। वे निजी अस्पतालों में चले जाते हैं। सेंकाई के लिए यह उपकरण मिल जाए, तो योजनाओं के रोगी आने लगेंगे। अभी कोबाल्ट मशीन से सेंकाई होती है। इसके अलावा पैरा मेडिकल और दूसरे स्टाफ की भी कमी है। 34 स्टाफ के लिए शासन ने एजेंसी फाइनल कर दी है। जल्दी ही तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी मिल जाएंगे।

सर्जिकल आंकोलॉजी का स्वीकृत विभाग

  • एक प्रोफेसर, एक एडिशनल प्रोफेसर, एक एसोसिएट और एक असिस्टेंट प्रोफेसर तथा छह सीनियर रेजीडेंट।
  • पैरा मेडिकल में एक सिस्टर, 21 स्टाफ नर्स तथा फार्मासिस्ट मिलाकर कुल 36 पद।
  • इसके साथ ही 28 पद आउटसोर्सिंग के हैं।

रोगियों का आंकड़ा

  • ओपीडी- सालाना 42 हजार रोगी।
  • 6000 रोगी हर साल नए बढ़ जाते हैं।
  • 150 रोगियों की प्रतिदिन सेंकाई।
  • 14 जिलों के कैंसर रोगी इलाज के लिए इंस्टीट्यूट पर निर्भर।

याचिका समिति, विधानसभा में भी मुद्दा उठा
ऐसा नहीं है कि जेके कैंसर की बदहाली किसी को पता नहीं है। 20 नवंबर 2023 में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हुई याचिका समिति की बैठक में इंस्टीट्यूट का मुद्दा जोरशोर से उठा। इसके अलावा विधानसभा में नियम-51 के तहत कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार ने इंस्टीट्यूट की बदहाली बताई। इसके अलावा हर साल प्रस्तावों को रिपीट किया गया। इसके बाद रिमाइंडर भेजे गए।

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