UP: बुजुर्ग व मरीजों के लिए मदद की आवाज बनेगी स्मार्ट घड़ी, स्विच दबाते ही पहुंच जाएगी सूचना, ये होंगे फायदे
Kanpur News: पीएसआईटी के छात्रों द्वारा विकसित यह मेड इन इंडिया स्मार्ट घड़ी स्वास्थ्य और उद्योग जगत में संचार की खाई को पाटने का काम करेगी। यह सस्ता, टिकाऊ और प्रभावी समाधान जल्द ही कानपुर समेत देशभर के संस्थानों में नजर आ सकता है।
विस्तार
कानपुर के अस्पतालों में कई बार ऐसा होता है कि मरीज मदद के लिए आवाज लगाता रहता है पर वार्ड बॉय या नर्स तक आवाज नहीं पहुंच पाती। कमोवेश यही स्थिति फैक्टरी में काम कर रहे कर्मचारियों के सामने भी आती है। मशीन में कोई दिक्कत होने पर कर्मी तकनीकी स्टाफ को बुलाता है या सायरन बजाता है पर सूचना समय पर नहीं पहुंच पाती। ऐसी ही समस्याओं को दूर करेगी पीएसआईटी के छात्रों की ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्ट घड़ी। मरीज बेड में लगे स्विच को जैसे ही दबाएगा, घड़ी पहने स्टाफ के पास इसकी सूचना पहुंच जाएगी।
पीएसआईटी स्टार्टअप इन्क्यूबेशन फाउंडेशन में इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप रमन रिसर्च एंड इनोवेशन द्वारा विकसित यह स्मार्ट घड़ी साउंड बेल का शांत और भरोसेमंद विकल्प है। इस घड़ी का विचार अपर निदेशक रघुराज सिंह को अस्पतालों और दफ्तरों में स्टाफ कॉलिंग की दिक्कतों को देखकर आया। इसके बाद पीएसआईटी के छात्र राहुल कुमार, आर्य मिश्रा, रितिश कटियार और अनमोल दीप ने कंपनी के सीटीओ लवित्रा साहू और डायरेक्टर संदीप खरे के मार्गदर्शन में मात्र दो महीनों में इस विचार को मूर्त रूप दिया गया।
आरएफ कम्युनिकेशन के माध्यम से भी हो सकेगा इस्तेमाल
यह स्मार्ट घड़ी वाइब्रेशन और स्क्रीन नोटिफिकेशन के जरिये सूचना देती है। यह वाईफाई आधारित है और एक साथ कई इनपुट डिवाइस से कनेक्ट हो सकती है जिससे बड़े अस्पतालों, दफ्तरों और औद्योगिक इकाइयों में भी इसका प्रभावी उपयोग संभव है। जहां इंटरनेट उपलब्ध नहीं है, वहां इसे आरएफ कम्युनिकेशन के माध्यम से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। घड़ी की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का स्थान और जरूरत जैसे मशीन फॉल्ट, मेंटीनेंस, सेफ्टी अलर्ट, दवा या पानी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
गैजेट मार्केट की दिशा बदलने की रखता है क्षमता
एक बार फुल चार्ज होने पर यह पूरे दिन काम करने में सक्षम है। पीएसआईटी के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि यह स्मार्ट घड़ी तकनीक के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे विशेष रूप से सक्षम लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ग्रुप डायरेक्टर डॉ. मनमोहन शुक्ला ने कहा कि यह नवाचार भारत में गैजेट मार्केट की दिशा बदलने की क्षमता रखता है और देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस तरह होंगे फायदे
- फैक्टरियों में यह शोरगुल के बीच सेफ्टी और मशीन फॉल्ट की जानकारी समय पर पहुंचाकर दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित हो सकती है।
- स्कूल और कॉलेज परिसरों में कक्षाओं की शांति बनाए रखते हुए लैब अटेंडेंट और सपोर्ट स्टाफ को बुलाना आसान होगा। वृद्धाश्रम और केयर होम में बुजुर्ग केवल एक बटन दबाकर इमरजेंसी या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
- यह नवाचार मूक-बधिर और विशेष रूप से सक्षम लोगों के लिए भी नई राह खोलता है। स्क्रीन पर दिखने वाले संकेतों के आधार पर वे बिना मौखिक निर्देश के काम कर सकते हैं।
