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UP: नौ माह से बंद पड़े KFCL को अब संचालित करेगा अदाणी समूह, 20 दिसंबर को समूह के अधिकारी करने आए थे निरीक्षण

अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 15 Jan 2026 11:30 AM IST
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सार

Kanpur News: पनकी स्थित केएफसीएल प्लांट अब अदाणी समूह के पास चला गया है। एनसीएलटी की मंजूरी के बाद समूह ने प्लांट का निरीक्षण कर लिया है। भारी कर्ज और सब्सिडी मानकों की समस्या के कारण पिछले साल बंद हुए इस प्लांट के फिर से चालू होने से कानपुर के औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

Kanpur KFCL which has been shut down for nine months will now be operated by the Adani Group
पनकी स्थित केएफसीएल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर फर्टिलाइजर एंड केमिकल्स लिमिटेड (केएफसीएल) को अदाणी समूह चलाएगा। पनकी स्थित इस प्लांट को पिछले साल एक अप्रैल से बंद कर दिया गया था। 20 दिसंबर 2025 को समूह के अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया था। इस दौरान प्लांट की क्षमता, संपत्तियों, कर्मचारियों आदि का ब्योरा जुटाया था। पूर्व में जेपी एसोसिएट ग्रुप की ओर इसका संचालन किया जा रहा था। केएफसीएल में चांद छाप यूरिया खाद का उत्पादन किया जाता था। बाद में भारत छाप यूरिया नाम से उत्पादन किया जाने लगा था।

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प्रतिदिन 2100 मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होता था। पिछले साल गेल ने बकाया राशि के चलते केएफसीएल की गैस की सप्लाई बंद कर दी थी। केएफसीएल के प्रबंधन ने गेल अधिकारियों से कहा था कि बाजार में जो यूरिया उपलब्ध है और सरकार से आने वाली सब्सिडी से उनके बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। इसके तहत दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में गेल को 538 करोड़ का भुगतान भी किया गया था। इसी बीच केस्को ने बकाया राशि के भुगतान के लिए बिजली काट दी थी।

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प्लांट में उत्पादन बंद कर दिया गया था
इसके बाद में केंद्र सरकार की ओर से जो सब्सिडी के भुगतान के लिए एनर्जी का मानक तय किया गया था, वह 31 मार्च 2025 तक ही मान्य था। इसका नवीनीकरण भी सरकार ने नहीं किया था। इसके बाद एक अप्रैल 2025 से पर्याप्त सब्सिडी के एनर्जी मानक के आदेश की अनुपस्थिति में प्लांट में उत्पादन बंद कर दिया गया था। साथ ही कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। तमाम कर्मचारियों का जेपी एसोसिएट की अन्य कंपनियों में तबादला भी किया गया था।

अदाणी समूह के अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया था
अब प्लांट में 100 के करीब ही स्थायी, अस्थायी कर्मचारी बचे हैं, जिनके वेतन भुगतान का विवाद भी श्रम न्यायालय में विचाराधीन है। भारतीय उर्वरक श्रमिक संघ के अध्यक्ष सुखदेव मिश्रा ने बताया कि एनसीएलटी ने 14 नवंबर 2025 को अदाणी समूह की बिड को मंजूरी दी थी। इस दौड़ में डालमिया, वेदांता, जेपी समूह, पीएनसीएल भी था। 20 दिसंबर 2025 को अदाणी समूह के अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया था। संपत्तियों का मूल्यांकन, प्लांट की स्थिति आदि का ब्योरा जुटाया था। उम्मीद है कि जल्द ही यहां पर उत्पादन शुरू हो सकेगा।

1500 करोड़ से पुनर्जीवित हुआ था प्लांट
1967 में कमीशन हुआ पनकी स्थित फर्टिलाइजर प्लांट आईईएल और डंकन के समय की बंदी झेल चुका है। जेपी ग्रुप ने इस प्लांट को (जो लगभग दस वर्षों तक बंद था) 2012 से 2015 के बीच 1500 करोड़ लगाकर पुनर्जीवित किया था। उस समय जेपी प्रबंधन ने श्रमिकों और कर्मचारियों का लगभग 90 करोड़ का बकाया भी भुगतान किया था और फीड स्टाक को नाप्था से नैचुरल गैस में परिवर्तित किया। पिछलेे दस वर्षों से यह प्लांट अपनी क्षमता के 90 फीसदी से ज्यादा उत्पादन कर रहा था।

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