किडनी कांड अपडेट: शहर में अब तक 40-50 ट्रांसप्लांट, डॉ. रोहित के इशारे पर चलता था खेल, शिवम ने पुलिस को घुमाया
Kanpur News: आरोपी शिवम अग्रवाल ने खुलासा किया है कि कानपुर में अब तक 40 से 50 किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं, जिसमें मास्टरमाइंड डॉ. रोहित की मुख्य भूमिका थी। ऑपरेशन के दौरान अस्पताल के मालिकों तक को ओटी में जाने की अनुमति नहीं थी और एक केस के लिए संचालकों को 2.75 लाख रुपये मिलते थे।
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कानपुर में अब तक 40 से 50 किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं। वह डॉ. रोहित से जब से जुड़ा है तब से आठ से नौ ऑपरेशन किए गए हैं। डॉ. रोहित ही किडनी रोगियों को कानपुर भेजता है। उसके साथ शहर के कुछ अन्य लोग जुड़े हुए हैं। यह जानकारी जेल गए शिवम अग्रवाल ने मंगलवार को पुलिस को अपने बयान में दी। उसने कहा कि उसके पास डॉ. रोहित की कॉल आया करती थी। वह नर्सिंगहोम की जिम्मेदारी देखता था।
पुलिस ने उससे 15 तरह के सवाल किए। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी ने बताया कि आहूजा हॉस्पिटल के स्टाफ कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल को बयान हुआ। जांच अधिकारी ने उससे 15 सवाल किए लेकिन उसने किसी का भी सही जवाब नहीं दिया। उसके मोबाइल के डीजी लॉकर का पासवर्ड पूछा गया, जिसकी जानकारी से उसने इन्कार किया। कहा कि वह मोबाइल का पैटर्न भूल गया है।
मुदस्सर अली सिद्दीकी और अन्य किसी के बारे में जानकारी नहीं
बाहर आने पर ही बता सकेगा। प्रयागराज के नवीन पांडेय के संबंध में जानकारी की गई, तो उसका कहना था कि वह भी उसकी तरह डॉ. रोहित के लिए कार्य कर रहा है। कानपुर के कई नर्सिंगहोम के लोग उससे जुड़े हुए हैं। ऑपरेशन के लिए आए मुदस्सर अली सिद्दीकी और अन्य किसी के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। किडनी ट्रांसप्लांट के डोनर और रिसीवर को कुछ दिनों तक शहर में रखा जाता था।
वह ओटी मैनेजर है, इसका पता नहीं है
वहां से लखनऊ या दिल्ली के बड़े अस्पताल में भेज दिया जाता था। साउथ अफ्रीका की अरेबिका दिल्ली से डॉ. रोहित के माध्यम से शहर आई थी। वह कब और किस तरह से भारत आई इसकी जानकारी नहीं है। मुदस्सर अली को सर्जन बताकर लाया गया था। वह ओटी मैनेजर है, इसका पता नहीं है। डीसीपी पश्चिम के मुताबिक शिवम अग्रवाल का पुलिस कस्टडी रिमांड लिया जाएगा। उससे फिर पूछताछ होगी।
किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान डॉ. दंपती को मना था ओटी में जाना
आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान डॉ. आहूजा दंपती को भी ऑपरेशन थियेटर में जाने की इजाजत नहीं थी। डॉ. रोहित हॉस्पिटल के सारे गेट बंद करा देता था। हॉस्पिटल के स्टाफ और यहां तक की डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और डॉ. प्रीति आहूजा को घर जाने के लिए कह दिया जाता था। यह जानकारी पुलिस को मो. फैज से पूछताछ में हुई है।
डॉ. रोहित और शिवम अग्रवाल का नाम सामने आ रहा
मो. फैज को शिवम अग्रवाल ने मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर की देखरेख के लिए रखा था। उसको पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी के मुताबिक किडनी ट्रांसप्लांट के मास्टरमाइंड के रूप में डॉ. रोहित और शिवम अग्रवाल का नाम सामने आ रहा है। पुलिस को गिरोह में कई लोगों के शामिल होने की संभावना है।
एक केस करने के बदले दिए जाते थे 2.75 लाख रुपये
आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 2.75 लाख रुपये संचालकों को दिए गए हैं। डॉ. रोहित सभी स्टाफ की छुट्टी करा देता था। देर रात किडनी ट्रांसप्लांट कराने के बाद डोनर और रिसीवर को अलग अलग नर्सिंगहोम में शिफ्ट कर दिया जाता था। डोनर और रिसीवर की देखभाल के लिए पांच से छह हजार रुपये के पैरामेडिकल स्टाफ नियुक्त कर रखे थे।
सादे कागज पर परामर्श लिखकर दिया गया था
इनके ऊपर ही दवा देने, इंजेक्शन लगाने और ग्लूकोज चढ़ाने की जिम्मेदारी थी। पारुल तोमर की देखरेख कर रहे मो. फैज ने पूछताछ में बताया कि उसे बताया गया था कि महिला का गाल ब्लाडर का ऑपरेशन हुआ है। उसको सादे कागज पर एंटीबायोटिक, पेन किलर देने का परामर्श लिखकर दिया गया था।