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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे दो और जगह धंसा: लोकार्पण के 21 दिन में चार जगह धंसी सड़क, तीन जगह बन गईं नालियां
Tue, 04 Aug 2026 01:51 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, उन्नाव
अमर उजाला नेटवर्क, उन्नाव
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 04 Aug 2026 01:51 PM IST
सार
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे दो और जगह धंस गया है। लोकार्पण के 21 दिन में चार जगह सड़क धंस चुकी है। तीन जगह नालियां बन गईं हैं। लाइव बेहटा गांव के पास 200 मीटर सड़क धंस गई है। कांथा गांव के पास 10 मीटर तक।
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Kanpur-Lucknow Expressway
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क रविवार की रात दो और जगह धंस गई। अब तक एक्सप्रेसवे चार जगह धंस चुका और तीन जगह सड़क दबने से नाली बन गई हैं, जो वाहन चालकों के लिए मुश्किल बन रही हैं। अब अचलगंज के बेहटा गांव के पास किलोमीटर संख्या 65 से 65.2 तक 200 मीटर सड़क धंस गई है।
निर्माण एजेंसी छह किलोमीटर में ट्रैफिक डायवर्जन कर मरम्मत करा रही है। किलोमीटर संख्या 37.7 पर असोहा के कांथा गांव के पास भी कानपुर से लखनऊ की लेन में सड़क 10 मीटर तक धंस गई है। मरम्मत का काम यहां भी चल रहा है।
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर अत्याधुनिक तकनीक, 120 किलोमीटर की हाईस्पीड और मुसाफिरों की सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे लोकार्पण के 22 और यातायात शुरू होने के 21 दिन में सड़क की तरह खोखले साबित हो गए। सुखद सफर के दावों को पूरे 43 किलोमीटर में 26 जगह ऊंची-नीची सड़क वाहन सवारों को झटके दे रही है।
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निर्माण एजेंसी छह किलोमीटर में ट्रैफिक डायवर्जन कर मरम्मत करा रही है। किलोमीटर संख्या 37.7 पर असोहा के कांथा गांव के पास भी कानपुर से लखनऊ की लेन में सड़क 10 मीटर तक धंस गई है। मरम्मत का काम यहां भी चल रहा है।
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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को लेकर अत्याधुनिक तकनीक, 120 किलोमीटर की हाईस्पीड और मुसाफिरों की सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे लोकार्पण के 22 और यातायात शुरू होने के 21 दिन में सड़क की तरह खोखले साबित हो गए। सुखद सफर के दावों को पूरे 43 किलोमीटर में 26 जगह ऊंची-नीची सड़क वाहन सवारों को झटके दे रही है।
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13 जुलाई को जोर-शोर से कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया गया था। 4200 करोड़ से बने इस एक्सप्रेसवे को 14 जुलाई से आम जनता के लिए खोला गया था लेकिन यातायात शुरू होते ही दावों की पोल खुलने लगी है। रविवार की रात दो और स्थानों पर सड़क धंस गई। बेहटा गांव के पास स्थित पुल से पहले 200 मीटर में सड़क तीनों लेन में बैठ गई।
सोमवार को इसकी मरम्मत शुरू कराई गई। पूरी सड़क को बंद करके छह किलोमीटर में दोनों तरफ का यातायात एक ही लेन पर चलाया जा रहा है। पूरी सड़क को तीन फीट गहराई से खोदकर कंक्रीट और सीमेंट का मिक्सर भर कर पुख्ता किया जा रहा है। इसके बाद सड़क पर 30 सेंटीमीटर डामर और कंक्रीट की ओवरले बिछाई जाएगी।
निर्माण एजेंसी के अधिकारियों का दावा है कि मौसम ने साथ दिया और तेज बारिश न हुई तो बुधवार को मरम्मत का काम पूरा हो जाएगा और शाम तक डायवर्जन खत्म करके सड़क खोल दी जाएगी। उधर कानपुर से लखनऊ लेन पर कांथा गांव के पास किलोमीटर संख्या 37.7 पर 10 मीटर लंबाई में सड़क धंस गई।
इसे भी खोदकर नए सिरे से बनाया जा रहा है। हालत यह है कि बिना झटके 120 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन चलने के दावे, सड़क के झटकों पर भारी पड़ रहे हैं। आजाद मार्ग टोल से बनी टोल तक 26 जगह सड़क ऊंची-नीची होने व नालियां बनने से वाहनों चालकों को परेशान कर रहे हैं।
यहां धंस और दब चुकी सड़क
- 01 अगस्त तूरी गांव के सामने किलोमीटर संख्या 46.5 से 46.6 के बीच भी सड़क दबने से नाली बन गई। मरम्मत नहीं हुई है।
- 02 अगस्त को सदर तहसील के जगेथा गांव के पास 400 मीटर सड़क कई जगह दबी। इसकी मरम्मत अभी नहीं हुई है।
- 29 जुलाई को असोहा ब्लॉक के बेगमखेड़ा गांव के सामने करीब दस मीटर सड़क धंसी थी। इसकी मरम्मत में दो दिन लगे।
- 25 जुलाई को कोरारी गांव के सामने 10 मीटर सड़क धंस गई थी, मरम्मत करने में तीन दिन का समय लगा।
48 जगह हो चुका पैचवर्क
उन्नाव से बनी वाली टोल तक लखनऊ जाने वाली लेन पर अब तक 48 जगह पैचवर्क हो चुका है। हालांकि पैच वाले स्थानों पर सड़क पूरी तरह समतल नहीं है। वाहन का पहिया इस पर जाते ही उछाल होता है। वहीं लगभग हर पुल, पुलिया और अंडरपास के एक्सपेंशन ज्वाइंट भी समतल नहीं हैं।
उन्नाव से बनी वाली टोल तक लखनऊ जाने वाली लेन पर अब तक 48 जगह पैचवर्क हो चुका है। हालांकि पैच वाले स्थानों पर सड़क पूरी तरह समतल नहीं है। वाहन का पहिया इस पर जाते ही उछाल होता है। वहीं लगभग हर पुल, पुलिया और अंडरपास के एक्सपेंशन ज्वाइंट भी समतल नहीं हैं।
यहां पर सबसे ज्यादा झटके
| किलोमीटर संख्या | स्थान |
|---|---|
| 36.8 | कांथा नहर पुल |
| 39.8 | सरैंया गांव के सामने |
| 40.6 | बछौरा गांव के सामने |
| 42.6 | मेदपुर गांव के सामने |
| 44.6 | कुदिकापुर गांव के पास |
एनएचएआई के तकनीकी अधिकारियों के मुताबिक उन्नाव से लखनऊ सीमा तक का ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे (पैकेज दो) का काम करीब 10 महीने पहले पूरा हो गया था, लेकिन लखनऊ में एलिवेटेड (पैकेज एक) का काम पूरा न होने से इस हिस्से को भी यातायात के लिए खोला नहीं जा सका। ताजी बनी सड़क पर यातायात न चलने से कई दिन पहले ठंड फिर गर्मी में सड़क की ऊपरी परत (ओवरले) का कई जगह लचीलापन खत्म हो गया। इससे हल्की दरारें आ गई थीं। ज्यादा मिट्टी भरान वाले हिस्सों में यह समस्या ज्यादा हुई।
जिस दिन लोकार्पण हुआ उसी दिन से बारिश शुरू हो गई। पानी जाने से मिट्टी नम होने से इस तरह की समस्या आ रही है। उन्नाव और लखनऊ के बीच करीब 15-16 स्थान ही ऐसे हैं जहां हल्की मरम्मत की आवश्यकता है। इन दोनों स्थानों का काम पूरा करने के बाद मरम्मत कराई जाएगी। अगले 15 साल तक इस एक्सप्रेसवे के रखरखाव की जिम्मेदारी पीएनसी की सहयोगी एजेंसी अवध एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड की ही है। इसी एजेंसी ने ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण भी कराया है।
-सत्य नारायण, मैनेजर पीएनसी
-सत्य नारायण, मैनेजर पीएनसी