आढ़ती की मौत: कदम-कदम पर लापरवाह रही पुलिस, दरोगा चेत जाते तो जिंदा मिलते कारोबारी, लावारिस में अंतिम संस्कार
Kanpur News: कानपुर के लापता आढ़ती देवेश कुमार की मौत के मामले में पुलिस की भारी लापरवाही सामने आई है। एम्बुलेंस चालक द्वारा सूचना देने के बावजूद पनकी दरोगा मौके पर नहीं पहुंचे और मोर्चरी में भी पुलिस ने अज्ञात शव की सही से शिनाख्त नहीं की, जिसके चलते उनका लावारिस में अंतिम संस्कार करना पड़ा।
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कानपुर के सचेंडी से लापता आढ़ती देवेश कुमार पुलिसिया लापरवाही की भेंट चढ़ गए। दो से 10 जुलाई के बीच पुलिस यदि सजग होती तो आज शायद देवेश जिंदा होते। पुलिस की पहली लापरवाही तब हुई जब आढ़ती जीवित थे। एंबुलेंस चालक ने पनकी इंडस्ट्रियल एरिया के चौकी प्रभारी विकास वर्मा को सूचना दी थी कि उनके क्षेत्र से सड़क पर पड़े एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अस्पताल लेकर जाना है।
वह आकर देख लें और लिखित अनुमति दे दें। इस पर दरोगा ने अपने मोबाइल से ही व्हाट्सएप कर अनुमति दे दी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि दरोगा मौके पर पहुंच जाते हैं तो शायद देवेंद्र आज जिंदा होते। पुलिस की दूसरी गलती आठ जुलाई की रही। जब सचेंडी इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्रा के साथ देवेश के परिजन मोर्चरी में सजेती में मिले अज्ञात शव की शिनाख्त करने पहुंचे थे।
उसी समय मौत का पता चल जाता
सजेती के शव के ठीक बगल में पनकी थाना क्षेत्र में मिले अज्ञात बीमार के शव को पुलिस ने देखना मुनासिब नहीं समझा। सिर्फ सजेती का शव देखकर लौट गई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यदि उस वक्त भी पनकी के अज्ञात शव को देख लेती तो कम से कम उसी समय आढ़ती की मौत का पता चल जाता।
पुलिस बताए- अब बच्चों की देखभाल कैसे होगी
घर पर मौजूद देवेश की पत्नी अराधना की आंखों के आंसू तो मानो सूख गए हैं। उनका दिल और दिमाग दोनों ही मानने को तैयार नहीं है कि देवेश अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी हालत देख परिजन जब उन्हें देवेश के इस दुनिया में न होने का अहसास दिलाते हैं तो फफक पड़ती हैं। चिल्लाती हैं कि पुलिस ही बताए इन तीन बच्चों की परवरिश कैसे होगी।
भाई की चिता को अग्नि तक नहीं दे सके
देवेश के भाई मुकेश का कहना है कि पनकी पुलिस यदि घायल को एक बार देख लेती तो वह अपने भाई का महंगे से महंगा इलाज कराकर उन्हें किसी न किसी तरह बचा लेते। बताया कि तीन जुलाई को वे लोग जिस वक्त सचेंडी चौकी में बैठे थे उसी वक्त देवेश पनकी में कहीं घायल अवस्था में मिले थे। फिर भी उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। इसी तरह मोर्चरी में भी यदि शव की शिनाख्त हो जाती तो कम से कम भाई की चिता को अग्नि तो दे देते। यूं लावारिस में अंतिम संस्कार न होता।
मामला हादसा है या हत्या इसकी जांच तो कराई ही जा रही है। इसके अलावा पुलिस की ओर से कितनी लापरवाही हुई है। इसकी जांच भी डीसीपी को सौंपी गई हैं। मामले में दो पर कार्रवाई हो चुकी है। प्रकरण में कुछ अन्य विभागीय लोगों की भी लापरवाही सामने आई है, उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा। -रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर