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MGNREGA: अब अफसरों की मनमर्जी से 'जीरो' नहीं होगा मस्टररोल, NMMS और जियो-टैगिंग से होगी निगरानी, पढ़ें डिटेल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 23 Apr 2026 04:10 PM IST
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सार

Kanpur News: मनरेगा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शासन ने मस्टररोल शून्य करने पर पाबंदी लगा दी है। अब इसके लिए उच्चाधिकारियों की मंजूरी अनिवार्य होगी। कानपुर सहित पूरे प्रदेश में एनएमएमएस और बायोमेट्रिक्स के जरिए हाजिरी लगाकर योजना में पारदर्शिता लाई जाएगी।

Kanpur MGNREGA Muster Rolls Will No Longer Marked Zero at Whim of Officials Monitoring via NMMS and Geotagging
टॉप 15 जिलों के आंकड़ें और मस्टर रोल - फोटो : amar ujala
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विस्तार

कानपुर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मस्टररोल को मनमाने तरीके से शून्य (जीरो) करने के खेल पर आखिरकार शासन ने सख्त कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी नई गाइडलाइन के अनुसार अब कोई भी अधिकारी बिना ठोस कारण और उच्चाधिकारियों की अनुमति के मस्टररोल को जीरो नहीं कर सकेगा। कानपुर नगर में 4832 मास्टर रोल शून्य किए गए हैं।

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अब नई व्यवस्था के तहत मस्टररोल शून्य करने से पहले संबंधित अधिकारी को स्पष्ट स्पष्टीकरण देना होगा और सक्षम अधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदेशभर में अब तक 5,79,898 मस्टररोल शून्य किए जा चुके हैं, जो अपने आप में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका को बताता है। प्रदेश में सीतापुर जिले में सबसे ज्यादा मास्टर रोल 27,152 शून्य किए गए हैं। दूसरे नंबर पर आजमगढ़ में 19,106 शून्य किए गए।

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नोटिस जारी कर जवाब तलब भी किया गया
मजदूरों को काम देने का आधिकारिक दस्तावेज होता है, उसे शून्य करने के पीछे कई कारण होते हैं। जिसमें गड़बड़ियों को छिपाने के लिए रिकॉर्ड मिटाना, काम शुरू न होने पर बाद में फर्जी हाजिरी दिखाकर भुगतान निकालना होता है। जिले में एक ही फोटो से कई दिनों तक मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने का खेल पकड़ा गया था। इसमें पांच सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब तलब भी किया गया था।

वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर लगेगी रोक
इसको लेकर शासन ने नए नियम जारी किए हैं। अब हाजिरी प्रकि्रया को पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है। अब नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) के जरिए मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होगी। इसमें जियो टैग फोटो, फेस ऑथेंटिकेशन, आइरिश पहचान जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी। शासन का मानना है कि इससे योजना में पारदर्शिता आएगी और वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर रोक लगेगी।

बिना अनुमति मस्टररोल शून्य करना अब आसान नहीं होगा और हर कार्रवाई की जवाबदेही तय होगी। इससे वास्तविक जरूरतमंद मजदूरों तक योजना का लाभ पहुंचाने का रास्ता भी साफ होगा।  -चंद्रभान कनौजिया, उपायुक्त मनरेगा

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