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मां का कटा हाथ लेकर घूम रहा जवान: बिलखते हुए पुलिस आयुक्त से मांगा इंसाफ, कहा-जिससे बचपन में खाना खाया, आज...
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 20 May 2026 11:18 AM IST
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सार
कानपुर में आईटीबीपी जवान मां का कटा हाथ आइस बॉक्स में लेकर पुलिस ऑफिस पहुंच गया। जवान ने पुलिस आयुक्त से इंसाफ की गुहार लगाई। सीपी ने जांच के लिए सीएमओ को पत्र लिखा है। आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी
आइस बॉक्स में मां का कटा हाथ, ITBP के जवान को चाहिए इंसाफ
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कानपुर में आईटीबीपी जवान विकास सिंह मंगलवार दोपहर आइस बॉक्स में अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। इससे पुलिस ऑफिस में सनसनी फैल गई। पुलिसकर्मी और फरियादियों की भीड़ जुट गई।
जवान ने रोते हुए टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में मां के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इसके चलते उनके हाथ में संक्रमण फैल गया। उनकी जान बचाने के लिए एक अन्य अस्पताल में डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पूरा मामला जानने के बाद सीएमओ से जांच के लिए पत्र भेजा है।
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जवान ने रोते हुए टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में मां के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। इसके चलते उनके हाथ में संक्रमण फैल गया। उनकी जान बचाने के लिए एक अन्य अस्पताल में डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पूरा मामला जानने के बाद सीएमओ से जांच के लिए पत्र भेजा है।
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फतेहपुर के खागा तहसील के हथगांव के विकास सिंह महाराजपुर स्थित आईटीबीपी 32वीं वाहनी में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि 13 मई को मां निर्मला देवी (56) को सांस लेने में तकलीफ हुई। उनको आईटीबीपी अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर ने दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
जवान के मुताबिक वह मां को एंबुलेंस से सिंहपुर स्थित पारस हॉस्पिटल ले जा रहे थे। टाटमिल चौराहे पर जाम की वजह से मां को कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया। उन्हें आईसीयू में रखा गया।
आरोप है कि वह 14 मई को मां से मिलने पहुंचे तो उनके दाहिने हाथ में सूजन थी। डॉक्टर और अन्य स्टाफ को बताया तो हाथ में लगा विगो हटा दिया गया। उनसे कहा गया कि सूजन धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी। शाम को मां का हाथ काला पड़ने लगा और सूजन पहले से अधिक हो गई।
उनकी हालत बिगड़ने पर कोठारी चौराहे के पास स्थित पारस हॉस्पिटल में शिफ्ट करा दिया। वहां के डॉक्टरों ने हाथ में संक्रमण होने की जानकारी दी। मां की हालत में तो सुधार हुआ जबकि संक्रमण की वजह से 17 मई को डॉक्टरों ने हाथ काटना पड़ा।
विजय सिंह का आरोप है कि वह रेलबाजार थाने गए कृष्णा अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 18 मई को एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह से शिकायत की। उन्होंने सीएमओ को पत्र भेजने की बात कही। वह एसीपी कार्यालय गए लेकिन वहां से निराशा हाथ लगी।
उन्होंने आईटीबीपी के अधिकारियों को सूचना दी। उनकी इजाजत पर मंगलवार दोपहर मां का कटा हाथ आइस बॉक्स में लेकर आए। उन्होंने पुलिस कमिश्नर कार्यालय के ठीक सामने बॉक्स को खोला जिसमें उनकी मां का हाथ था। स्टाफ ऑफिसर अमरनाथ यादव, कलक्टरगंज एसओ विजय तिवारी, पीआरओ, रीडर समेत अन्य स्टाफ बाहर आ गए। स्टाफ ऑफिसर ने सीपी को मामले की जानकारी दी। सीपी ने सीएमओ हरिदत्त नेमी से बात कर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा।
छह महीने पहले पैनल से बाहर किया हॉस्पिटल
आईटीबीपी के जवान संग आए संपर्क अधिकारी अर्पित सिंह ने बताया कि पूर्व में आईटीबीपी के दो जवानों के इलाज में लापरवाही के मामले सामने आए थे। कई अन्य स्टाफ के परिजन की हालत भी बिगड़ गई थी जिसकी वजह से कृष्णा हॉस्पिटल को मेडिकल पैनल से हटा दिया गया था। विकास सिंह अपनी मां की हालत बिगड़ने पर उन्हें वहां ले गए थे। अस्पताल के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं।
आईटीबीपी के जवान संग आए संपर्क अधिकारी अर्पित सिंह ने बताया कि पूर्व में आईटीबीपी के दो जवानों के इलाज में लापरवाही के मामले सामने आए थे। कई अन्य स्टाफ के परिजन की हालत भी बिगड़ गई थी जिसकी वजह से कृष्णा हॉस्पिटल को मेडिकल पैनल से हटा दिया गया था। विकास सिंह अपनी मां की हालत बिगड़ने पर उन्हें वहां ले गए थे। अस्पताल के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग हाथ नष्ट करने का बना रहा दबाव
आईटीबीपी जवान विकास सिंह ने कृष्णा हॉस्पिटल के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होने तक मां का हाथ सुरक्षित रखने की बात कही। उनके मुताबिक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उन पर कटा हुआ हाथ नष्ट करने को लेकर दबाव बना रहे हैं लेकिन वह ऐसा होने नहीं देंगे। किसी भी कीमत पर साक्ष्य नष्ट नहीं होगा। मां निर्मला देवी के हाथ को सुरक्षित रखने के लिए पारस हॉस्पिटल प्रबंधन से बात की है। अभी डीप फ्रीजर में सुरक्षित किया है।
आईटीबीपी जवान विकास सिंह ने कृष्णा हॉस्पिटल के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होने तक मां का हाथ सुरक्षित रखने की बात कही। उनके मुताबिक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उन पर कटा हुआ हाथ नष्ट करने को लेकर दबाव बना रहे हैं लेकिन वह ऐसा होने नहीं देंगे। किसी भी कीमत पर साक्ष्य नष्ट नहीं होगा। मां निर्मला देवी के हाथ को सुरक्षित रखने के लिए पारस हॉस्पिटल प्रबंधन से बात की है। अभी डीप फ्रीजर में सुरक्षित किया है।
विकास सिंह के मुताबिक पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। मां ही उनकी देखभाल कर रही थीं। अब उनका हाथ भी अस्पताल के जिम्मेदारों की वजह से नष्ट हो गया है। बहन की पहले मौत हो चुकी है। घर में छोटा भाई है। बताया पुलिस कमिश्नर से मुलाकात हुई है।
उन्होंने रेलबाजार थाने को एफआईआर के लिए निर्देशित किया है। सीएमओ को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा है। तब तक मां के हाथ को सुरक्षित तरीके से रखा जाएगा। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को जांच करानी चाहिए कि आखिर किस तरह की लापरवाही हुई, जिससे हाथ काटने की नौबत आई।
जिस हाथ से बचपन में खाना खाया, आज उसे लेकर घूम रहा...
पुलिस कमिश्नर कार्यालय में सैन्य कर्मी अपनी बात बताते हुए भावुक हो गए। आंसू छलक आए। कहने लगे मां ने जिस हाथ से बचपन में खाना खिलाया, आज उसी को इंसाफ के लिए लेकर घूम रहा हूं। मां को सांस की दिक्कत थी लेकिन उनका हाथ क्यों काटना पड़ा...। उन्होंने इसे डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही का नतीजा बताया
पुलिस कमिश्नर कार्यालय में सैन्य कर्मी अपनी बात बताते हुए भावुक हो गए। आंसू छलक आए। कहने लगे मां ने जिस हाथ से बचपन में खाना खिलाया, आज उसी को इंसाफ के लिए लेकर घूम रहा हूं। मां को सांस की दिक्कत थी लेकिन उनका हाथ क्यों काटना पड़ा...। उन्होंने इसे डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही का नतीजा बताया
स्टाफ ऑफिसर बोले... ज्यादा नेतागिरी न करो
विकास सिंह आइस बॉक्स में मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कार्यालय पहुंचे। वह बिलखते हुए मीडिया व पुलिस कर्मियों को अपनी पीड़ा बता रहे थे। तभी स्टाफ ऑफिसर अमरनाथ यादव कार्यालय से बाहर आए। सैन्य कर्मी से कहा... ए नेता इधर आओ। ज्यादा नेतागिरी न करो...।
विकास सिंह आइस बॉक्स में मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कार्यालय पहुंचे। वह बिलखते हुए मीडिया व पुलिस कर्मियों को अपनी पीड़ा बता रहे थे। तभी स्टाफ ऑफिसर अमरनाथ यादव कार्यालय से बाहर आए। सैन्य कर्मी से कहा... ए नेता इधर आओ। ज्यादा नेतागिरी न करो...।
अपने कमरे में ले जाकर सख्त लहजे में कहा अपने कमांडेंट से बात कराओ। यहां आने की उन्हें जानकारी दी है कि नहीं। इस पर जवान ने अधिकारियों को सूचना देने के बाद ही आने की बात कही।
तीन साल पहले आए हैं शहर
आईटीबीपी जवान तीन साल पहले ही शहर में आए हैं। वह परिवार के साथ महाराजपुर की बटालियन के आवास में रह रहे हैं। इससे पूर्व तीन साल तक छत्तीसगढ़ में तैनात थे। उनका चयन 2011 में आईटीबीपी में हुआ। सैन्य कर्मी विकास सिंह का कहना है कि न्याय के लिए वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक भी जाएंगे।
आईटीबीपी जवान तीन साल पहले ही शहर में आए हैं। वह परिवार के साथ महाराजपुर की बटालियन के आवास में रह रहे हैं। इससे पूर्व तीन साल तक छत्तीसगढ़ में तैनात थे। उनका चयन 2011 में आईटीबीपी में हुआ। सैन्य कर्मी विकास सिंह का कहना है कि न्याय के लिए वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक भी जाएंगे।
कृष्णा अस्पताल से टीम ने जुटाए दस्तावेज
मामले को लेकर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कृष्णा हॉस्पिटल पहुंचकर रोगी के इलाज संबंधी दस्तावेज जुटाए। इसके बाद टीम पारस अस्पताल भी गई, जहां अभी रोगी का इलाज चल रहा है। वहां से भी टीम ने दस्तावेज इकट्ठा किए हैं।
मामले को लेकर मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कृष्णा हॉस्पिटल पहुंचकर रोगी के इलाज संबंधी दस्तावेज जुटाए। इसके बाद टीम पारस अस्पताल भी गई, जहां अभी रोगी का इलाज चल रहा है। वहां से भी टीम ने दस्तावेज इकट्ठा किए हैं।
डॉ. रमित ने बताया कि अभी तक की जांच में रोगी के हाथ काटने का कारण गैंगरीन सामने आया है। बुधवार को सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी और परिजनों के अलावा इसके इलाज से संबंधित जानकारी के लिए कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल के डॉक्टरों से भी पूछताछ की जाएगी।
13 मई को रोगी को भर्ती कराया गया था। रात में ड्रिप चढ़ाई गई। अगले दिन ड्रिप वाली जगह पर तेज दर्द बताया तो हाथ का डॉप्लर कराया जो सामान्य निकला। परिजन दूसरे अस्पताल ले जाने की जिद करने लगे। वे 14 मई को रोगी को लेकर चले गए। दूसरे अस्पताल में क्या हुआ मुझे पता नहीं है। -योगेंद्र यादव, प्रबंधक, कृष्णा हॉस्पिटल
रोगी हमारे अस्पताल में किसी दूसरे अस्पताल से रेफर होकर आया था। रोगी निर्मला का सांस संबंधी इलाज चल रहा था लेकिन हाथ में भी ब्लड फ्लो नहीं था। उसे गैंगरीन हुआ था। इसके चलते हाथ को काटना पड़ा।- डॉ. रिद्धि पुरवार, सीएमएस पारस अस्पताल
एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है। कमेटी में तीन और सदस्य डॉ प्रणव, डॉ. नीलेश और डॉ. मिनी शामिल हैं। तीन दिन में जांच रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमओ
सीएमओ को डीओ लेटर भेजा गया है। उन्हें तुरंत जांच कर आख्या देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट में नर्सिंगहोम की लापरवाही मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।- रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर
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