Kanpur: तस्कर पकड़ में आते...सप्लायर पता नहीं चल पाते, कई प्रदेशों से आ रही है मादक पदार्थों की खेप, उठे सवाल
Kanpur News: प्रधानमंत्री द्वारा दो अगस्त से नशे के खिलाफ शुरू होने वाले बड़े अभियान से पहले पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और एसटीएफ सिर्फ छोटे तस्करों और खेप को पकड़कर अपनी कार्रवाई पूरी मान लेती है, लेकिन मादक पदार्थों के असली सप्लायरों और तस्करी के मुख्य ठिकानों तक पहुंचने की कोशिश नहीं की जाती है।
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प्रधानमंत्री दो अगस्त से नशे के खिलाफ जंग शुरू करने वाले हैं। वहीं, स्थानीय पुलिस है कि सिर्फ ऑपरेशन व्हाइट के नाम पर तस्करों को पकड़कर ही युद्व विराम कर लेती है। पुलिस का रिकार्ड देखे तो सिर्फ मादक पदार्थों की खेप के साथ दो या फिर चार तस्कर ही पुलिस और एसटीएफ के हाथ आते हैं।
शायद ही ऐसा कोई मामला होगा, जिसमें पुलिस ने पकड़ी गई खेप, कहां से आई उस ठिकाने पर दबिश दी हो या फिर किसी बड़े सप्लायर पर हाथ धरा हो। इसके विपरीत पुलिस ने कई मामलों में मादक पदार्थों की तस्करी को वसूली का जरिया भी बना लिया है।
गाड़ियों से पहुंचाई जाती है खेप
पुलिस सूत्रों की मानें, तो यूपी में मादक पदार्थ गुजरात, उड़ीसा और पंजाब से भारी मात्रा में आता है। शहर में अक्सर गांजा, चरस व कोकिंग की खेप हाईवे पर ही पकड़ी गई है। माना जा रहा है कि अलीगढ़, बरेली, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी आदि जिलों से होते हुए मादक पदार्थों की खेप को कार, बोलेरो और स्कार्पियो जैसी बड़ी गाड़ियों से पहुंचाया जाता है।
तस्करी कभी कम तो कभी ज्यादा होती है
कुछ तस्करों को पकड़कर उनसे माल बरामद करने के बाद फिर कोई पुलिस अधिकारी यह पता करने की आवश्यकता नहीं समझता कि आखिर माल आया कहां से और इसे शहर भेजने वाला और इसे खरीदने वाला कौन है। यही वजह है कि मादक पदार्थों की तस्करी कभी कम तो कभी ज्यादा जरूर होती है, लेकिन कभी खत्म नहीं हुई।