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Kanpur: नशे का नेटवर्क टूटेगा? रोज पकड़ा जा रहा 118 किलो नशीला पदार्थ, दो अगस्त से शुरू होगी 100 सप्ताह की जंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Himanshu Awasthi
Updated Fri, 31 Jul 2026 10:50 AM IST
सार
Kanpur News: कानपुर में नशे के अवैध कारोबार और इसकी बढ़ती खपत के खिलाफ दो अगस्त से 100 सप्ताह का बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। शहर में ओडिसा, बिहार, नेपाल और पश्चिम बंगाल से तस्करी कर लाए जा रहे गांजे और अन्य मादक पदार्थों की खपत लगातार बढ़ रही है।
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घाटमपुर के सजेती में कुछ दिन पहले पकड़ा गया गांजा
- फोटो : amar ujala
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कानपुर में नशे के खिलाफ दो अगस्त से 100 सप्ताह की बड़ी जंग शुरू होने जा रही है। वहीं, शहर में मादक पदार्थों का काला कारोबार इस कदर फैला है कि आसानी से इन्हें खरीदा जा सकता है। हालात यह हैं कि हर दिन दर्जनों किलो गांजे समेत अन्य नशीले पदार्थ शहर की गलियों में खप रहा है। कोचिंग मंडी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र और युवा तक इसके लती हो चुके हैं। खपत बढ़ी तो पुलिस की कार्रवाई भी बढ़ी है। पिछले साल 158 क्विंटल मादक पदार्थ पकड़ा गया।
वहीं, इस वर्ष मात्र सात माह में 250 क्विंटल जब्त हो चुका है। यानी बीते साल जहां औसतन एक दिन में 43 किलो मादक पदार्थ पकड़ा गया वहीं, इस बार अब तक ये आंकड़ा तीन गुना होकर करीब 118 किलो पहुंच गया। फिर भी नशीले कारोबार का नेटवर्क न टूटने से अभी भी शहर में कई हजार किलो नशीले पदार्थों की खपत हो रही है। नशे के लती लोगों की मानें तो सेनपश्चिम पारा, काकादेव, अनवरगंज, किदवईनगर कंजड़नपुरवा, बाबूपुरवा, जूही, चकेरी, रेलबाजार, कर्नलगंज, चमनगंज, बेकनगंज, बजरिया जैसे क्षेत्रों में गांजा आसानी से मिलता है।
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गांजे की खेप
- फोटो : amar ujala
ओड़िसा, बिहार, नेपाल, पश्चिम बंगाल से आ रही खेप
पुलिस सूत्रों ने बताया कि गांजे की बड़ी खेप ओड़िसा, बिहार, पश्चिम बंगाल, नेपाल से लाई जा रही है। इसके बाद उसे डीलरों के माध्यम से शहर की सीमाओं को पार कर उन हिस्सों में पहुंचाया जाता है, जहां इनकी ज्यादा खपत है। यह खेप कईयों थानाक्षेत्रों और बार्डरों से होकर ट्रक, कंटेनर, कार, बसों से पहुंचाया जाता है। कई बार करोड़ों का माल होने पर कई बार वाहनों के पीछे चौपहिया गाड़ी से असलहों से लैस माफिया भी रहते हैं। जो वाहन के चालक के लगातार फोन से संपर्क में रहते हैं। जरा सी पुलिस की भनक लगने पर तुरंत अलर्ट होकर दूसरा रास्ता चुन लेते हैं।
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100 किलो गांजा बरामद
- फोटो : amar ujala
सुशील बच्चा और अंकित तुत्तल शहर के ड्रग माफिया
किसी जमाने में लाटूश रोड का ब्रजेंद्र सोनकर शहर का सबसे बड़ा ड्रग माफिया था, लेकिन जेल जाने के बाद काकादेव का कुख्यात सुशील शर्मा उर्फ बच्चा और चकेरी का अंकित तुत्तल का ड्रग माफिया बन गए। काकादेव पुुलिस के अनुसार सुशील पर जहां 42, वहीं अंकित पर अब तक 17 मुकदमे दर्ज हैं। वह दोनों अपने गुर्गों के जरिए गांजे समेत अन्य नशे की बिक्री ऑनलाइन ऑर्डर लेकर कराते है। गुर्गों ने कोचिंग मंडी और ढाबों के आसपास की दुकानों और गुमटी दुकानदारों में व्हाट्सएप नंबर दे रखे हैं। शातिर ड्रग माफियाओं के चलते सबसे ज्यादा छात्र और युवा आ रहे हैं।
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गांजे के साथ दो तस्कर गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
कई तरह के गांजा, डालता अलग-अलग असर
गांजे को आम तौर पर कई नामों से जाना जाता है। जैसे वीड, मैरुआना, स्टफ, पॉट और कैनेविस। गांजा हर शख्स पर अलग-अलग तरह से असर डालता है। गांजा फूंकने वालों के मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है। कुछ डॉक्टरो की मानें तो किशोर उम्र में इसके इस्तेमाल से दिमाग की कॉग्निटिव एबिलिटी पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है। ये गांजा शहर के हाईप्रोफाइल रेव पार्टियों में रईसजादे इस्तेमाल करते हैं। इनमें पुलिस कई बार छापा मारकर बरामदगी कर चुकी है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : amar ujala
पुलिस की बरामदगी से खपत का चलता पता
बीते वर्ष पुलिस करीब 158 क्विंटल गांजा बरामद कर चुकी है। इसके खरीददार भी हर तबके के लोग हैं। रईसजादों से लेकर गलियों और नुक्कड़ में भी यह आसानी से मिल जाता है। किसी दूसरे सूखे नशे की तुलना में गांजा सबसे सस्ता होता है। गुमटी दुकानदारों और जीटी रोड किनारे रहने वाले बंजारे भी 100 रुपये की पुड़िया चोरी छिपे बेंच रहे हैं। वहीं इस वर्ष 2026 में जुलाई तक 250 क्विंटल बरामद कर चुकी है।
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