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Farrukhabad: लखनपुर हत्याकांड; 35 साल पुराना वो खूनी खेल, जब एक प्रेम प्रसंग में बिछा दी गई थीं छह लाशें

Thu, 30 Jul 2026 01:03 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,फर्रुखाबाद Published by: प्रसून शुक्ला Updated Thu, 30 Jul 2026 01:03 PM IST
सार

Farrukhabad News: कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के लखनपुर गांव में करीब 35 वर्ष पहले हुए चर्चित छह हत्याकांड के पीछे प्रेम प्रसंग वजह बना था। इस वारदात में एक ही परिवार के पांच लोगों समेत छह लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।

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Love Affair Triggered Lakhanpur Six-Murder Case 35 Years Ago
प्रेम प्रसंग बना था छह लोगों की हत्या की वजह - फोटो : amar ujala

विस्तार

कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के गांव लखनपुर में करीब साढ़े तीन दशक पहले हुए बहुचर्चित सामूहिक हत्याकांड के काले पन्ने एक बार फिर खुल गए हैं। एक ही परिवार के पांच लोगों समेत छह लोगों की निर्मम हत्या की इस दिल दहला देने वाली वारदात की मुख्य वजह एक प्रेम प्रसंग बना था।

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प्रेमिका के परिजनों ने बोला था धावा

घटना वर्ष 1991 की है, जब लखनपुर निवासी अमर सिंह जाटव गांव की ही एक युवती को अपने साथ ले गया था। इस बात से युवती के परिजन बेहद आक्रोशित थे। इसी रंजिश और गुस्से में आकर युवती के पिता श्रीकृष्ण, किशोरी लाल और रामसेवक ने 10 अगस्त 1991 की रात को अमर सिंह के घर पर धावा बोल दिया था।

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Love Affair Triggered Lakhanpur Six-Murder Case 35 Years Ago
गांव लखनपुर में खड़े रमेश और मनीष - फोटो : amar ujala

बिछा दी थीं छह लाशें

हथियारों से लैस हमलावरों ने अमर सिंह के पिता गुलजारी लाल, मां रामवती और उनके तीन भाइयों को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले की जद में आकर एक पड़ोसी की भी जान चली गई थी। देखते ही देखते हमलावरों ने छह लोगों की निर्मम हत्या कर दी। एक ही रात में पूरे परिवार का सफाया होने और छह लाशें बिछने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था।

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पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में किया था सरेंडर

इस भीषण नरसंहार के बाद हमलावर फरार हो गए। पुलिस लगातार उनकी तलाश में दबिश देती रही, लेकिन तीनों भाई पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। आखिरकार हमलावरों ने पुलिस को चकमा देते हुए सीधे अदालत में जाकर आत्मसमर्पण कर दिया था। वारदात के बाद गांव में इस कदर खौफ और तनाव का माहौल बन गया था कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय तक गांव में पीएसी और पुलिस बल तैनात रखना पड़ा था।

जवानी के उस आक्रोश ने तबाह कर दीं कई जिंदगियां

ग्रामीणों के अनुसार, उस वक्त तीनों आरोपी भाई जवान थे, शारीरिक रूप से मजबूत थे और खेती-किसानी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनमें से एक आरोपी किशोरी लाल की उम्र अब करीब 55 वर्ष हो चुकी है। जवानी के जोश और आक्रोश में उठाए गए उस एक कदम ने न सिर्फ छह मासूमों की जिंदगी छीन ली, बल्कि कई परिवारों को हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया।

11 अगस्त 1991 की खौफनाक रात

घटना 11 अगस्त 1991 की रात की है, जब लखनपुर गांव में गुलजारी लाल, उनकी पत्नी रामवती, उनके तीन पुत्रों राकेश, उमेश, धर्मेंद्र और पड़ोसी बाबूराम की धारदार हथियारों से निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस भीषण नरसंहार के बाद पुलिस ने गांव के ही श्रीकिशन और उसके दो भाइयों रामसेवक व किशोरी लाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। तीनों भाइयों ने कोर्ट में सरेंडर किया था, लेकिन वर्ष 1998 में जमानत मिलने के बाद किशोरी लाल और रामसेवक फरार हो गए।

सुप्रीम कोर्ट से हुई थी उम्रकैद की सजा

निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक यह कानूनी लड़ाई चली। वर्ष 2011 में उच्चतम न्यायालय ने तीनों भाइयों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद श्रीकिशन को जेल भेज दिया गया था, जबकि दोनों भाई पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहे थे। रामसेवक भंते का रूप धरकर रह रहा था, जिसे कायमगंज पुलिस ने 27 सितंबर 2022 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

नाम बदलकर नोएडा में रह रहा था कातिल

किशोरी लाल की तलाश में जुटी पुलिस को बुधवार को बड़ी सफलता मिली। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि फरारी के दौरान उसने अपनी पहचान बदलकर 'दीपक पुत्र नंदराम' निवासी एटा बना ली थी। इसी फर्जी नाम-पते पर उसने नोएडा में दर्जी का काम शुरू किया और अपने फर्जी दस्तावेज भी बनवा लिए थे। मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस ने उसे बेरी तिराहे से धर दबोचा और न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।

चारपाई के नीचे छिपकर बची थी रमेश की जान

इस नरसंहार के दर्दनाक पन्ने याद करते हुए मृतक गुलजारी लाल के बेटे रमेश ने बताया कि घटना के समय वह महज 6 साल का था। हमलावरों के तांडव के दौरान वह चारपाई के नीचे छिप गया था, जिससे उसकी जान बच पाई। रमेश ने बताया कि न्याय की उम्मीद में उनके परिवार ने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसमें उनकी नौ बीघा जमीन तक बिक गई। 28 साल बाद आखिरी दोषी के पकड़े जाने पर पीड़ित परिवार को सुकून और सुरक्षा का अहसास हुआ है।

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