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UP: प्लास्टिक दाना दोगुना महंगा, 200 करोड़ का उत्पादन घटा, एक सप्ताह में तेजी से बढ़े दाम; ऑर्डर मिलना हुए बंद

अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात Published by: Sharukh Khan Updated Tue, 10 Mar 2026 02:08 PM IST
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सार

अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है। प्लास्टिक दाना के दाम दोगुना हो गए हैं। 200 करोड़ का उत्पादन घट गया है। एक सप्ताह में प्लास्टिक दाना के दाम तेजी से बढ़े हैं। उत्पादन भी प्रभावित हो गया है।

Plastic Granule Price Spike Hits Industry Production Reduced by ₹200 Crore UP News in Hindi
दोगुना हुए प्लास्टिक दाना के दाम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से प्लास्टिक दाना महंगा होने लगा है। पिछले एक सप्ताह में प्लास्टिक दाना के दाम दो गुना बढ़ गए हैं। इससे प्लास्टिक उद्योग पर संकट के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। 
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प्लास्टिक का सामान जैसे बाल्टी, केतली, रसोई सामान आदि बनाने वाली इकाइयों ने नुकसान से बचने के लिए उत्पादन घटाना शुरू कर दिया है। इकाइयों का करीब 200 करोड़ का उत्पादन घटा है।
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पिछले कुछ दिनों में प्लास्टिक दाने की कीमत में 40 से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका प्रभाव जनपद में संचालित प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा है। जनपद में प्लास्टिक दाना यानी प्लास्टिक पॉलीमर से सामान बनाने की जैनपुर, रनियां औद्योगिक क्षेत्र में 100 फैक्टरी संचालित हैं। 

महीने में करीब 400 करोड़ रुपये का प्लास्टिक कारोबार
यहां से बड़े पैमाने पर तैयार माल विदेश तक में भेजा जाता है। जिले का प्लास्टिक उद्योग एक जिला एक उत्पाद में शामिल है। छोटी-बड़ी इकाइयों से महीने में करीब 400 करोड़ रुपये का प्लास्टिक कारोबार होता है। खाड़ी के देशों से कच्चे माल की आवाजाही बंद होने के कारण इसके दाम में डेढ़ गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई। वहीं उत्पादन घटकर आधा हो गया है।
 

एक सप्ताह में 119 रुपये पहुंच गया दाना
उद्यमी हरदीप सिंह राखरा ने बताया कि जिले में चीन, कोरिया, सऊदी, ईरान आदि जगहों से अलग-अलग ग्रेड का प्लास्टिक दाना आता है। अभी तक पीवीसी दाना 76 रुपये प्रति किलो था। अब यह बढ़कर एक सप्ताह में 119 रुपये पहुंच गया है। 

एलडी (लो-डेंसिटी) पॉलीमर्स की कीमत चार दिन पहले तक 98 रुपये प्रति किलो थी जो अब 130 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसी तरह पीपी (पॉलीप्रोपाइलीन) पॉलीमर्स की कीमत 50 रुपये प्रति किलो तक बढ़ी हैं। जिन कारोबारियों पर स्टॉक है वह 10 प्रतिशत रेट बढ़ा कर दे रहे हैं। 

रोजगार पर संकट 
ऐसे में कारोबारियों को पुराने ऑर्डर पर माल भेजना मुश्किल हो गया है। नए ऑर्डर मिलना बंद हो गए हैं। वहीं प्लास्टिक दाना कारोबारियों ने प्लास्टिक के दाने बनाने वाले उद्यमियों को माल देना बंद कर दिया। उद्यमियों का कहना है कि यही स्थिति रही तो छोटी इकाइयां पूरी तरह बंद हो जाएंगी और रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा।

प्लास्टिक से बनने वाले उत्पाद
जिले में प्लास्टिक के कई तरह के उत्पाद तैयार कर किए जाते हैं। इसमें निर्यात हाउस को जाने वाली पैकेजिंग पॉलीथिन बड़े स्तर पर तैयार होती है। साथ ही पैकेजिंग फिल्म भी निर्यात हाउस को जाती है। वहीं पाइप, कुर्सी, सबमर्सिबल पाइप, प्लास्टिक की पानी की रबर, प्लास्टिक की कुर्सी, बोरी, पन्नी आदि के उत्पाद बनाकर स्थानीय स्तर पर भी ऑर्डर पर भेजे जाते हैं।
 

10 दिन में 33 रुपये दाना महंगा
रनियां में बोरी बनाने की फैक्टरी है। बोरी बनाने के लिए जिस प्लास्टिक दाना का प्रयोग किया जाता है। इसके दाम एक सप्ताह में 33 रुपये तक बढ़े हैं। महंगा दाना लेने के लिए भी तैयार है लेकिन दाना मिलना मुश्किल हो रहा है। केंद्र सरकार ने गैस से तैयार किए जाने वाले दाने में रोक लगा दी है। इससे इकाइयां बंद हो जाएगी और बेरोजगारी बढ़ेगी।- अजय गर्ग, उद्यमी
 

डेढ़ गुना हुआ दाना महंगा
जैनपुर में पैकेजिंग मटीरियल फैक्टरी है। पैकेजिंग के लिए पन्नी तैयार कर निर्यात की जाती है। अभी तक अलग-अलग ग्रेड का दाना 70 रुपये से लेकर 100 रुपये था। अब प्लास्टिक दाना 120 रुपये से लेकर 150 रुपये तक मिल रहा है। दाना के दाम बढ़ने से उत्पादन पर असर पड़ा है। लागत बढ़ गई है। बाजार में उतनी आपूर्ति नहीं है। ऐसी स्थिति में फैक्टरी का संचालन करना मुश्किल है।- एसके सिंह उद्यमी
 

महंगाई से बर्बाद हो जाएगा छोटा उद्यमी
ईरान, इजराइल युद्ध का असर प्लास्टिक उद्योग पर सीधे तौर पर पड़ा है। जिले में करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार घटा है। अब उद्योग संचालित करने के लिए दो गुना रकम लगानी पड़ेगी। जिन उद्यमियों के पास पूंजी कम है वह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच जाएगा। दो गुने दाम तक प्लास्टिक दाना मिल रहा है। उसमें भी मुश्किल हो रही है। वर्कर्स का खर्चा निकालना मुश्किल है। - हरदीप सिंह राखरा, उद्यमी

 

दाने का ऑर्डर मिलना बंद
फैक्टरी में प्लास्टिक दाना तैयार किया जाता है। कई लाख का माल तैयार रखा है। पहले से ऑर्डर और रेट तय होने पर फैक्टरी संचालकों को पुराने रेट में देना होगा। इससे नुकसान होगा। अब बाहर से आने वाले प्लास्टिक दाने के दाम दो गुने तक पहुंच गए हैं। इससे दाने के ऑर्डर मिलना कम हो गया है। फैक्टरी संचालन में परेशानी खड़ी हो गई है। - अंबर गुप्ता, उद्यमी
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