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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kasganj News ›   A protective shield spanning three districts will safeguard against flood devastation.

Kasganj News: बाढ़ की तबाही से बचाएगा तीन जिलों का सुरक्षा कवच

Thu, 20 Aug 2026 11:47 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:47 PM IST
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कासगंज। हर साल बाढ़ से होने वाली तबाही को रोकने के लिए अब कासगंज, बदायूं और फर्रुखाबाद मिलकर एक समग्र बाढ़रोधी सुरक्षा योजना तैयार करेंगे। इस संयुक्त पहल का उद्देश्य बाढ़ के कहर को कम करना और प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी सुरक्षा प्रदान करना है। तीनों जिले मिलकर सर्वेक्षण करेंगे और उसके आधार पर सुरक्षा कवच का प्रस्ताव तैयार करेंगे। इसके तहत कई स्थानों पर तटबंधों का निर्माण किया जाएगा, जो बाढ़ के पानी को रोकने में कारगर साबित होंगे।
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कासगंज जिले से करीब 77 किलोमीटर लंबी गंगा नदी गुजरती है। सोरोंजी, पटियाली और सहावर क्षेत्रों की ग्रामीण आबादी गंगा की तलहटी में बसे गांवों में निवास करती है। गंगा के उफान लेने पर 150 से अधिक गांव बाढ़ की जद में आ जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को हर साल काफी नुकसान उठाना पड़ता है। कटान की समस्या भी इन इलाकों में लगातार बनी रहती है। पिछले चार सालों तक बरौना गांव में कटान ने भीषण तबाही मचाई थी, हालांकि इस वर्ष पत्थरों का बांध बनने से कुछ राहत मिली है। फिलहाल पटियाली क्षेत्र के करीब 20 गांवों में बाढ़ की चपेट में हैं।
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पटियाली इलाके की बाढ़ समस्या के स्थायी समाधान के लिए मूंझखेड़ा, नगला हंसी, नगला नरपत समेत अन्य स्थानों पर बांध बनाने की योजना है। सोरोंजी क्षेत्र के अल्लीपुर, बराबरा, महमूदपुर और पुख्ता में भी बांध निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा सहावर इलाके के शहवाजपुर और मुजफ्फरनगर में भी बाढ़रोधी बांधों पर काम किया जाएगा।
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सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता पहले ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मौका-मुआयना कर चुके हैं। निरीक्षण के बाद उन्होंने कासगंज, बदायूं और फर्रुखाबाद की ओर से एक संयुक्त बाढ़रोधी प्रस्ताव तैयार करने का निर्णय लिया है। इस संयुक्त कार्ययोजना से बाढ़ की विभीषिका को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। प्रभावित इलाकों के ग्रामीण लंबे समय से अलग-अलग क्षेत्रों में बाढ़ रोधी और कटान रोधी योजनाओं की मांग करते आ रहे थे।

80 साल पहले बना था पहला तटबंध
कासगंज को बाढ़ से बचाने के लिए पहला तटबंध सोरोंजी क्षेत्र के उढ़ेर में 4.55 किलोमीटर लंबा बनाया गया था। इसे नगरिया क्षेत्र में बाढ़ के प्रकोप को रोकने के लिए निर्मित किया गया था। इसके ठीक पांच साल बाद 1951 में दूसरा तटबंध दतलाना में 3 किलोमीटर लंबा बनाया गया, जिससे सोरोंजी क्षेत्र को सुरक्षा मिली। 1975 में पटियाली क्षेत्र के लिए समसपुर-नरदौली तटबंध बनाया गया, जो जिले का सबसे लंबा (10.75 किलोमीटर) तटबंध है। इसके बाद 2011 में असदगढ़ किला-नरदौली तटबंध (6.30 किलोमीटर) और 2014 में न्यौली तटबंध (करीब 6 किलोमीटर) का निर्माण हुआ, जिससे पटियाली और न्यौली क्षेत्रों को बाढ़ से काफी हद तक सुरक्षा मिली है।


तहसील वार बाढ़ प्रभावित गांव
सदर 60
पटियाली 65
सहावर 30
कुल प्रभावित गांव 155
वर्जन
कासगंज, बदायूं और फर्रुखाबाद बाढ़ रोधी योजना पर कार्य करेंगे, तभी यह योजना सार्थक और कारगर साबित होगी। बाढ़ से बचाव के लिए हमने प्रयास शुरू कर दिए हैं। तीनों ही जिलों में बाढ़ की विभीषिका का सामना जनता को करना पड़ता है, इसलिए यह संयुक्त प्रयास अत्यंत आवश्यक है।
-जितेंद्र कुमार अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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