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Sawan Somvar 2025: वन खंडेश्वर महादेव मंदिर, 8 लाख देने पर रिहा हुए थे भोलेनाथ; अब पूरी करते हैं हर मुराद
पंकज पाराशरी, संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 28 Jul 2025 11:47 AM IST
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सार
कासगंज के सोरोंजी के पास वन खंडेश्वर महादेव मंदिर को सिद्ध महादेव का मंदिर कहा जाता है। मान्यता है कि भक्तों की सारी मनौतियां पूर्ण होती हैं, लेकिन इस मंदिर की कहानी बेहद दिलचस्प है।
वन खंडेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
तीर्थनगरी सोरोंजी के कण-कण में आस्था और श्रद्धा विद्यमान है। जगह-जगह प्राचीन मंदिर स्थापित हैं और इन मंदिरों का अपना अलग ही महत्व है। तीर्थ नगरी में भागीरथी गुफा, जो पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित है, के पास ही स्थापित वनखंडेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है।
उल्लेखनीय है कि इस मंदिर से 52 साल पहले चोर शिवलिंग को ही चुरा ले गए थे, फिर न्यायालय से जमानत मिलने पर वे रिहा हुए। इसके बाद यहां पुनः स्थापना की गई है। यह मंदिर सदियों पुराना है। लोग कहते हैं यह शिवलिंग राजा भगीरथ के समय का है। इस शिवलिंग में एक चेहरे की आकृति बनी हुई है, जिसकी ऊंचाई करीब पांच फिट है। इसके बाद वन खंडेश्वर मंदिर में विधि विधान से शिवलिंग को स्थापित कर दिया।
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उल्लेखनीय है कि इस मंदिर से 52 साल पहले चोर शिवलिंग को ही चुरा ले गए थे, फिर न्यायालय से जमानत मिलने पर वे रिहा हुए। इसके बाद यहां पुनः स्थापना की गई है। यह मंदिर सदियों पुराना है। लोग कहते हैं यह शिवलिंग राजा भगीरथ के समय का है। इस शिवलिंग में एक चेहरे की आकृति बनी हुई है, जिसकी ऊंचाई करीब पांच फिट है। इसके बाद वन खंडेश्वर मंदिर में विधि विधान से शिवलिंग को स्थापित कर दिया।
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नौ चोरों ने चोरी की वारदात को दिया था अंजाम
मंदिर के पुजारी श्यामपुरी ने बताया कि 52 साल पहले 26 फरवरी 1973 को नौ चोर इस शिवलिंग को चुराकर अलीगढ़ के गए। इधर शिवलिंग की चोरी की सूचना गांव वालों ने सोरों कोतवाली में दी, पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर लिया। उधर चोर शिवलिंग की महिमा से बेखबर थे। भोले ने चोरों को दंड देना शुरू कर दिया, जिसके बाद एक-एक कर सारे चोर संक्रामक रोगों से घिरने लगे। कुछ की मौत हो गई। अपने साथियों की मौत होते देख एक चोर डर गया और उसने शिवलिंग को अलीगढ़ के पाली थाने की पुलिस को सुपुर्द कर दिया।
मंदिर के पुजारी श्यामपुरी ने बताया कि 52 साल पहले 26 फरवरी 1973 को नौ चोर इस शिवलिंग को चुराकर अलीगढ़ के गए। इधर शिवलिंग की चोरी की सूचना गांव वालों ने सोरों कोतवाली में दी, पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर लिया। उधर चोर शिवलिंग की महिमा से बेखबर थे। भोले ने चोरों को दंड देना शुरू कर दिया, जिसके बाद एक-एक कर सारे चोर संक्रामक रोगों से घिरने लगे। कुछ की मौत हो गई। अपने साथियों की मौत होते देख एक चोर डर गया और उसने शिवलिंग को अलीगढ़ के पाली थाने की पुलिस को सुपुर्द कर दिया।
अलीगढ़ पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा
अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले में चोरों के खिलाफ मामला दर्ज किया। 22 मई 1993 को पाली मुकीमपुर में चोरों के विरुद्ध अपराध संख्या 59/1993 दर्ज हुआ। पुलिस ने भगवान को पाली थाने में ही प्रतिष्ठित कर दिया। 22 साल बाद भगवान की फिर से पूजा अर्चना होने लगी। किसी तरह सोरों के फरीदपुर तक यह खबर पहुंची कि 22 साल पहले जो शिवलिंग चोरी हुआ था वो पाली थाने में है। गांव वाले जब शिवलिंग को लेने पहुंचे तो पुलिस ने देने से इंकार कर दिया।
अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले में चोरों के खिलाफ मामला दर्ज किया। 22 मई 1993 को पाली मुकीमपुर में चोरों के विरुद्ध अपराध संख्या 59/1993 दर्ज हुआ। पुलिस ने भगवान को पाली थाने में ही प्रतिष्ठित कर दिया। 22 साल बाद भगवान की फिर से पूजा अर्चना होने लगी। किसी तरह सोरों के फरीदपुर तक यह खबर पहुंची कि 22 साल पहले जो शिवलिंग चोरी हुआ था वो पाली थाने में है। गांव वाले जब शिवलिंग को लेने पहुंचे तो पुलिस ने देने से इंकार कर दिया।
कोर्ट ने शिवलिंग के एवज में आठ लाख रुपए की जमानत मांगी
ग्राम प्रधान विजय कुमार वर्मा ने बताया कि शिवलिंग चोरी का मामला सोरों कोतवाली में भी दर्ज था और पाली थाने में दर्ज था। गांव वालों ने शिवलिंग पर अपना अधिकार जताया और कोर्ट में दावा कर दिया। अलीगढ़ दीवानी में छह साल तक मामला चला। अंत में ग्रामीणों की पैरवी और भगवान भोलेनाथ की इच्छा से ये शिवलिंग अलीगढ़ पाली थाने से ग्रामीणों को सुपुर्द करने का आदेश कोर्ट ने दिया। इसके साथ कोर्ट ने शिवलिंग के एवज में आठ लाख रुपए की जमानत राशि मुकर्रर कर दी। ग्रामीणों ने चंदा कर रुपए एकत्रित करके कोर्ट में बतौर जमानत दिए। इसके बाद भगवान की एक बार फिर से वापसी हुई।
ग्राम प्रधान विजय कुमार वर्मा ने बताया कि शिवलिंग चोरी का मामला सोरों कोतवाली में भी दर्ज था और पाली थाने में दर्ज था। गांव वालों ने शिवलिंग पर अपना अधिकार जताया और कोर्ट में दावा कर दिया। अलीगढ़ दीवानी में छह साल तक मामला चला। अंत में ग्रामीणों की पैरवी और भगवान भोलेनाथ की इच्छा से ये शिवलिंग अलीगढ़ पाली थाने से ग्रामीणों को सुपुर्द करने का आदेश कोर्ट ने दिया। इसके साथ कोर्ट ने शिवलिंग के एवज में आठ लाख रुपए की जमानत राशि मुकर्रर कर दी। ग्रामीणों ने चंदा कर रुपए एकत्रित करके कोर्ट में बतौर जमानत दिए। इसके बाद भगवान की एक बार फिर से वापसी हुई।