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Kaushambi News: भीषण गर्मी में 30 मेगावाट बढ़ी बिजली की खपत, आपूर्ति लड़खड़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:09 AM IST
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भीषण गर्मी के बीच बिजली जिले में बिजली की खपत करीब 30 मेगावाट तक बढ़ गई है। बढ़ी खपत की वजह से ग्रामीण अंचल के उपकेंद्रों के फीडर ओवरलोड होकर ट्रिप हो रहे हैं। मांग और पूर्ति में अंतर की वजह से अघोषित बिजली कटौती की जा रही है जिससे लोग परेशान हैं।
जिले के प्रमुख 132 केवी उपकेंद्रों में मंझनपुर, सिराथू और चायल शामिल हैं। मंझनपुर उपकेंद्र की क्षमता करीब 120 एमवीए है जहां से शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति की जाती है। यहां औसतन 75 मेगावाट तक खपत दर्ज की जा रही है। इस वजह से यह सबसे अधिक लोड वाला केंद्र बना हुआ है।
सिराथू उपकेंद्र की क्षमता 100 एमवीए के बीच है। यहां 65 मेगावाट तक बिजली की खपत हो रही है। वहीं चायल पावर हाउस करीब 100 एमवीए क्षमता के साथ 60 मेगावाट तक लोड संभाल रहा है। इसके अलावा जिले में 20 से 25 छोटे 33/11 केवी उपकेंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में करारी, भरवारी, मूरतगंज, सरायअकिल, कड़ा और नेवादा प्रमुख हैं।
इन उपकेंद्रों की क्षमता 10 एमवीए के बीच है, जबकि इन पर आठ मेगावाट तक का लोड पड़ रहा है। यही उपकेंद्र गांवों और कस्बों तक बिजली पहुंचाते हैं और ओवरलोड की समस्या सबसे ज्यादा यहीं देखने को मिल रही है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले की कुल बिजली खपत सामान्य दिनों में से 150 मेगावाट रहती है। अब भीषण गर्मी में बिजली खपत बढ़कर 180 मेगावाट तक पहुंच रही है। इसके मुकाबले वर्तमान में जिले के पावर स्टेशनों को औसतन 130 मेगावाट बिजली की आपूर्ति मिल पा रही है। अफसरों का कहना है कि ऐसे में मांग और पूर्ति के अंतर को संतुलित करने के लिए बिजली विभाग को कटौती का सहारा लेना पड़ रहा है।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार एसी, कूलर और पंखों के बढ़ते उपयोग से अचानक लोड बढ़ गया है। ग्रामीण फीडरों पर ओवरलोड, ट्रांसफाॅर्मरों की सीमित क्षमता और ऊपर से कम आपूर्ति मिलने के कारण स्थिति और बिगड़ रही है।
गर्मी के साथ बिजली की मांग काफी बढ़ गई है। एसएलडीसी (पावर) के निर्देशानुसार लोड मैनेजमेंट के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर आपूर्ति रोकी जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ट्रांसफाॅर्मरों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, क्योंकि अधिक लोड के कारण उनके फुंकने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को यथासंभव निर्धारित रोस्टर के अनुसार ही बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।- इंजी. राम कुमार कुशवाहा,अधिशाषी अभियंता मंझनपुर
नई-नई शादी हुई है, बिजली दीजिए साहब, नहीं तो... : कटौती पर व्हाट्सएप ग्रुप में फूटा गुस्सा
सहालक की खुशियों में बिजली का खलल, विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप पर लोगों ने लगाई आपूर्ति बहाल करने की गुहार
मंझनपुर। भीषण गर्मी में बिजली ने लोगों की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि सुबह होते-होते पानी का संकट भी गहरा गया। गुस्साए उपभोक्ताओं ने विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में जमकर भड़ास निकाली। सबसे ज्यादा चर्चा एक नवविवाहित युवक के मैसेज की रही जिसने लिखा “साहब, नई-नई शादी हुई है, बिजली दीजिए… नहीं तो दुल्हन नाराज हो जाएगी।”
इस चुटकीले तंज ने व्यवस्था की हकीकत बयां कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सूचना दिए घंटों बिहजी कटौती की रही है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी राहत नहीं मिली। बिजली न होने से मोटर बंद, पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ा। शिकायतों पर ठोस जवाब न मिलने से नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि जल्द सुधार न हुआ तो आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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जिले के प्रमुख 132 केवी उपकेंद्रों में मंझनपुर, सिराथू और चायल शामिल हैं। मंझनपुर उपकेंद्र की क्षमता करीब 120 एमवीए है जहां से शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति की जाती है। यहां औसतन 75 मेगावाट तक खपत दर्ज की जा रही है। इस वजह से यह सबसे अधिक लोड वाला केंद्र बना हुआ है।
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सिराथू उपकेंद्र की क्षमता 100 एमवीए के बीच है। यहां 65 मेगावाट तक बिजली की खपत हो रही है। वहीं चायल पावर हाउस करीब 100 एमवीए क्षमता के साथ 60 मेगावाट तक लोड संभाल रहा है। इसके अलावा जिले में 20 से 25 छोटे 33/11 केवी उपकेंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में करारी, भरवारी, मूरतगंज, सरायअकिल, कड़ा और नेवादा प्रमुख हैं।
इन उपकेंद्रों की क्षमता 10 एमवीए के बीच है, जबकि इन पर आठ मेगावाट तक का लोड पड़ रहा है। यही उपकेंद्र गांवों और कस्बों तक बिजली पहुंचाते हैं और ओवरलोड की समस्या सबसे ज्यादा यहीं देखने को मिल रही है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले की कुल बिजली खपत सामान्य दिनों में से 150 मेगावाट रहती है। अब भीषण गर्मी में बिजली खपत बढ़कर 180 मेगावाट तक पहुंच रही है। इसके मुकाबले वर्तमान में जिले के पावर स्टेशनों को औसतन 130 मेगावाट बिजली की आपूर्ति मिल पा रही है। अफसरों का कहना है कि ऐसे में मांग और पूर्ति के अंतर को संतुलित करने के लिए बिजली विभाग को कटौती का सहारा लेना पड़ रहा है।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार एसी, कूलर और पंखों के बढ़ते उपयोग से अचानक लोड बढ़ गया है। ग्रामीण फीडरों पर ओवरलोड, ट्रांसफाॅर्मरों की सीमित क्षमता और ऊपर से कम आपूर्ति मिलने के कारण स्थिति और बिगड़ रही है।
गर्मी के साथ बिजली की मांग काफी बढ़ गई है। एसएलडीसी (पावर) के निर्देशानुसार लोड मैनेजमेंट के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर आपूर्ति रोकी जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि ट्रांसफाॅर्मरों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, क्योंकि अधिक लोड के कारण उनके फुंकने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को यथासंभव निर्धारित रोस्टर के अनुसार ही बिजली उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।- इंजी. राम कुमार कुशवाहा,अधिशाषी अभियंता मंझनपुर
नई-नई शादी हुई है, बिजली दीजिए साहब, नहीं तो... : कटौती पर व्हाट्सएप ग्रुप में फूटा गुस्सा
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मंझनपुर। भीषण गर्मी में बिजली ने लोगों की नींद उड़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि सुबह होते-होते पानी का संकट भी गहरा गया। गुस्साए उपभोक्ताओं ने विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में जमकर भड़ास निकाली। सबसे ज्यादा चर्चा एक नवविवाहित युवक के मैसेज की रही जिसने लिखा “साहब, नई-नई शादी हुई है, बिजली दीजिए… नहीं तो दुल्हन नाराज हो जाएगी।”
इस चुटकीले तंज ने व्यवस्था की हकीकत बयां कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सूचना दिए घंटों बिहजी कटौती की रही है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी राहत नहीं मिली। बिजली न होने से मोटर बंद, पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ा। शिकायतों पर ठोस जवाब न मिलने से नाराजगी बढ़ रही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि जल्द सुधार न हुआ तो आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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