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Kushinagar News: मिलावटी मसाले बिगाड़ देंगे सेहत का ‘जायका’
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 15 Apr 2026 02:01 AM IST
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बिक्री के लिए रखा गया मसाला। संवाद
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पडरौना। खाने-पीने की चीजों में हो रही मिलावट से मिठाइयों की तरह मसाले भी अछूते नहीं हैं। सब्जियों को स्वादिष्ट और जायकेदार बनाने के लिए ब्रांडेड से लेकर खुदरा बिकने वाले मसालों में धड़ल्ले से मिलावट हो रही है। चिकित्सक का कहना है कि मिलावटी मसालों के लंबे समय तक सेवन से लिवर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। यहां तक कि कैसर का भी खतरा रहता है। धंधेबाज मुनाफा के चक्कर में लोगों को बीमारियां परोस रहे हैं। शहर की थोक और खुदरा मंडियों में हल्दी, धनिया, जीरा से लेकर काली मिर्च तक में घालमेल किया जा रहा है। एक वर्ष में खाद्य विभाग ने संदेह के आधार पर मसालों के 16 नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। उसमें आठ नमूने फेल हो गए।
व्यापारियों ने बताया कि शहर समेत जिले के अन्य बाजारों में बिकने वाले ज्यादातर मसाले गोरखपुर मंडी के जरिए दूसरे प्रदेशों से आते हैं। शहर के थोक व्यापारी गोरखपुर से मसाला खरीदकर फुटकर विक्रेताओं को बेचते हैं। व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह गोरखपुर की मंडी से मसाले खरीदते हैं, वैसे ही वे लोग फुटकर विक्रेताओं को बेच देते हैं। स्थानीय स्तर पर मिलावट नहीं होती है।
सूत्रों का कहना है कि लोगों के घर तक पहुंचने से पहले मसालों में मिलावट का खेल हो जाता है। बाजार से साबुत और पिसे मसालों की आपूर्ति छोटे दुकानों पर की जाती है। यहीं पर कुछ दुकानदार मिलावटखोरी करते हैं। मसालों में तरह-तरह के पाउडर मिलाकर उनका वजन बढ़ाया जाता है। उसके बाद छोटे-छोटे पैकिंग में फुटकर दुकानदारों को आपूर्ति की जाती है। मुनाफे के इस खेल में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां ब्रांडेड कंपनियों के मसाले भी बड़ी मात्रा में आते हैं। स्थानीय दुकानदार इनमें मिलावट तो नहीं कर पाते, लेकिन एक्सपायरी डेट के नजदीक पहुंचे मसाले को खपाने के चक्कर में सस्ती दर पर फुटकर विक्रेताओं को बेच रहे हैं। इस तरह के मसाले अधिकतर मोहल्लों और गांव की छोटी दुकानों पर खपाए जाते हैं।
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ऐसे होता है मिलावट का खेल
जानकार बताते हैं कि मसलों में मिलावट का खेल बड़ी सावधानी से होता है। साबुत धनिया का वजन बढ़ाने के लिए धनिया के बाेरे को रात भर एक भट्टी में रखा जाता है। इसमें खास तरह की गैस प्रवाहित की जाती है। इससे रात भर में एक बोरे का वजन 15 किलो तक बढ़ जाता है। बाद में यही धनिया बाजार में बेची जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित होती है। यह खेल बड़े पैमाने पर किया जाता है। पिसी धनिया में चावल के कण मिलाकर मुनाफा कमाया जाता है। साबुत हल्दी को चमकदार बनाने के लिए रंग का प्रयोग किया जाता है, जबकि पिसी हल्दी में बेसन या चावल का आटा मिलाया जाता है। मिर्च का पाउडर बनाने में खराब मिर्च का इस्तेमाल अधिक किया जाता है।
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हल्दी में रंग और काली मिर्च में मिला पपीता का बीज
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक संदेह के आधार पर जीरा, दालचीनी, काली मिर्च, हल्दी और पैकेट बंद मसालों के कुल 16 नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। प्रयोगशाला से मिली जांच रिपोर्ट में जीरा के दो में से एक, दालचीनी के चार में से एक, काली मिर्च के दो में से एक, पैकेट बंद हल्दी के छह में से तीन और पैकेट बंद मसाले के दो समेत कुल आठ नमूने मानक पर खरे नहीं उतरे। पीसी हुई हल्दी की जांच में रंग मिले होने की पुष्टि हुई है। इसी तरह काली मिर्च में पपीते का बीज पाया गया। इसलिए सहालग पर पकवान बनाने के लिए मसालों की खरीदारी पूरी तरह जांच परखकर कर करनी होगी।
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केस एक:
दुदही क्षेत्र के लुअठहां निवासी वेद गोंड़ पेट में अचानक दर्द बढ़ने की शिकायत लेकर पहले दुदही सीएचसी पहुंचे। वहां उन्हें आराम नहीं हुआ तो परिजन उन्हें शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में लाए। वहां जांच में पता चला कि उनके पेट में घाव हो गया है। करीब एक माह इलाज के बाद उन्हें आराम मिला।
केस दो:
क्षेत्र के मोतीछपरा निवासी समीर अंसारी के पेट में काफी दिनों से नाभि के पास दर्द हो रहा था। करीब 15 दिन पहले उन्हें दर्द बढ़ा तो एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचे। वहां जांच हुई तो पता चला कि उनके आमाशय में इन्फेक्शन हो गया है, जिसकी वजह से दर्द हो रहा है। डॉक्टर ने दवा दी और भोजन में तेल और मसालों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। 15 दिन इलाज के बाद उनकी हालत अब ठीक है।
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केस तीन
कसया क्षेत्र के जोकवा बाजार निवासी अहिल्या राय को मार्च के पहले सप्ताह से पेट में दर्द था। उन्होंने पहले से मेडिकल स्टोर से दवा मांग कर खाया तो आराम मिला गया। जैसे ही दवा का असर समाप्त होता, दर्द बढ़ जा रहा था। पडरौना के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया तो पता चला कि अधिक तेल-मसाले का सेवन करने से पेट में इन्फेक्शन हो गया है, जिससे दर्द होने के साथ उन्हें गैस की समस्या हो रही है। डॉक्टर ने उन्हें दवा के साथ मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करने की सलाह दी।
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केस चार
पडरौना क्षेत्र के मठिया निवासी चंदा देवी को करीब एक सप्ताह से उल्टी और दस्त हो रही थी। शुरुआत में परिजनों को लगा कि मौसम में बदलाव की वजह से उन्हें यह समस्या हो रही है। जब उन्हें आराम नहीं मिला तो परिजन उन्हें अस्पताल ले गए। वहां जांच में पेट में इन्फेक्शन होने की जानकारी मिली। डॉक्टर उन्हें दवा देने के साथ मसालेदार भोज्य पदार्थों के सेवन से परहेज करने की सलाह दी है।
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लोगों को शुद्ध खाद्य एवं पेय पदार्थ मिले, इसके लिए विभाग गंभीर है। सहालग के समय मिलावटी खाद्य एवं पेय पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए टीम गठित कर दी गई है। यदि जिले में कहीं मिलावटी खाद्य पदार्थ बिक्री होने की आशंका हो तो विभाग को सूचित करे। उसकी जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त- खाद्य, द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग।
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मिलावटी मसाले या अन्य भोजन के सेवन से दस्त, मतली, एलर्जी, मधुमेह, कैंसर आदि जैसी बीमारियां अक्सर देखी जाती हैं। कुछ मिलावटी भोजन हमारे आंतरिक अंगों को सीधे प्रभावित कर सकते हैं, जिससे हृदय, गुर्दे, यकृत और कई अन्य अंगों में विकार और विफलता हो सकती है। -प्रवीण कुमार राव, डीएम गैस्ट्रो।
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व्यापारियों ने बताया कि शहर समेत जिले के अन्य बाजारों में बिकने वाले ज्यादातर मसाले गोरखपुर मंडी के जरिए दूसरे प्रदेशों से आते हैं। शहर के थोक व्यापारी गोरखपुर से मसाला खरीदकर फुटकर विक्रेताओं को बेचते हैं। व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह गोरखपुर की मंडी से मसाले खरीदते हैं, वैसे ही वे लोग फुटकर विक्रेताओं को बेच देते हैं। स्थानीय स्तर पर मिलावट नहीं होती है।
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सूत्रों का कहना है कि लोगों के घर तक पहुंचने से पहले मसालों में मिलावट का खेल हो जाता है। बाजार से साबुत और पिसे मसालों की आपूर्ति छोटे दुकानों पर की जाती है। यहीं पर कुछ दुकानदार मिलावटखोरी करते हैं। मसालों में तरह-तरह के पाउडर मिलाकर उनका वजन बढ़ाया जाता है। उसके बाद छोटे-छोटे पैकिंग में फुटकर दुकानदारों को आपूर्ति की जाती है। मुनाफे के इस खेल में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां ब्रांडेड कंपनियों के मसाले भी बड़ी मात्रा में आते हैं। स्थानीय दुकानदार इनमें मिलावट तो नहीं कर पाते, लेकिन एक्सपायरी डेट के नजदीक पहुंचे मसाले को खपाने के चक्कर में सस्ती दर पर फुटकर विक्रेताओं को बेच रहे हैं। इस तरह के मसाले अधिकतर मोहल्लों और गांव की छोटी दुकानों पर खपाए जाते हैं।
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ऐसे होता है मिलावट का खेल
जानकार बताते हैं कि मसलों में मिलावट का खेल बड़ी सावधानी से होता है। साबुत धनिया का वजन बढ़ाने के लिए धनिया के बाेरे को रात भर एक भट्टी में रखा जाता है। इसमें खास तरह की गैस प्रवाहित की जाती है। इससे रात भर में एक बोरे का वजन 15 किलो तक बढ़ जाता है। बाद में यही धनिया बाजार में बेची जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित होती है। यह खेल बड़े पैमाने पर किया जाता है। पिसी धनिया में चावल के कण मिलाकर मुनाफा कमाया जाता है। साबुत हल्दी को चमकदार बनाने के लिए रंग का प्रयोग किया जाता है, जबकि पिसी हल्दी में बेसन या चावल का आटा मिलाया जाता है। मिर्च का पाउडर बनाने में खराब मिर्च का इस्तेमाल अधिक किया जाता है।
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हल्दी में रंग और काली मिर्च में मिला पपीता का बीज
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की तरफ से एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक संदेह के आधार पर जीरा, दालचीनी, काली मिर्च, हल्दी और पैकेट बंद मसालों के कुल 16 नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। प्रयोगशाला से मिली जांच रिपोर्ट में जीरा के दो में से एक, दालचीनी के चार में से एक, काली मिर्च के दो में से एक, पैकेट बंद हल्दी के छह में से तीन और पैकेट बंद मसाले के दो समेत कुल आठ नमूने मानक पर खरे नहीं उतरे। पीसी हुई हल्दी की जांच में रंग मिले होने की पुष्टि हुई है। इसी तरह काली मिर्च में पपीते का बीज पाया गया। इसलिए सहालग पर पकवान बनाने के लिए मसालों की खरीदारी पूरी तरह जांच परखकर कर करनी होगी।
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केस एक:
दुदही क्षेत्र के लुअठहां निवासी वेद गोंड़ पेट में अचानक दर्द बढ़ने की शिकायत लेकर पहले दुदही सीएचसी पहुंचे। वहां उन्हें आराम नहीं हुआ तो परिजन उन्हें शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में लाए। वहां जांच में पता चला कि उनके पेट में घाव हो गया है। करीब एक माह इलाज के बाद उन्हें आराम मिला।
केस दो:
क्षेत्र के मोतीछपरा निवासी समीर अंसारी के पेट में काफी दिनों से नाभि के पास दर्द हो रहा था। करीब 15 दिन पहले उन्हें दर्द बढ़ा तो एक प्राइवेट अस्पताल में पहुंचे। वहां जांच हुई तो पता चला कि उनके आमाशय में इन्फेक्शन हो गया है, जिसकी वजह से दर्द हो रहा है। डॉक्टर ने दवा दी और भोजन में तेल और मसालों का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। 15 दिन इलाज के बाद उनकी हालत अब ठीक है।
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केस तीन
कसया क्षेत्र के जोकवा बाजार निवासी अहिल्या राय को मार्च के पहले सप्ताह से पेट में दर्द था। उन्होंने पहले से मेडिकल स्टोर से दवा मांग कर खाया तो आराम मिला गया। जैसे ही दवा का असर समाप्त होता, दर्द बढ़ जा रहा था। पडरौना के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया तो पता चला कि अधिक तेल-मसाले का सेवन करने से पेट में इन्फेक्शन हो गया है, जिससे दर्द होने के साथ उन्हें गैस की समस्या हो रही है। डॉक्टर ने उन्हें दवा के साथ मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करने की सलाह दी।
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केस चार
पडरौना क्षेत्र के मठिया निवासी चंदा देवी को करीब एक सप्ताह से उल्टी और दस्त हो रही थी। शुरुआत में परिजनों को लगा कि मौसम में बदलाव की वजह से उन्हें यह समस्या हो रही है। जब उन्हें आराम नहीं मिला तो परिजन उन्हें अस्पताल ले गए। वहां जांच में पेट में इन्फेक्शन होने की जानकारी मिली। डॉक्टर उन्हें दवा देने के साथ मसालेदार भोज्य पदार्थों के सेवन से परहेज करने की सलाह दी है।
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लोगों को शुद्ध खाद्य एवं पेय पदार्थ मिले, इसके लिए विभाग गंभीर है। सहालग के समय मिलावटी खाद्य एवं पेय पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए टीम गठित कर दी गई है। यदि जिले में कहीं मिलावटी खाद्य पदार्थ बिक्री होने की आशंका हो तो विभाग को सूचित करे। उसकी जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त- खाद्य, द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग।
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मिलावटी मसाले या अन्य भोजन के सेवन से दस्त, मतली, एलर्जी, मधुमेह, कैंसर आदि जैसी बीमारियां अक्सर देखी जाती हैं। कुछ मिलावटी भोजन हमारे आंतरिक अंगों को सीधे प्रभावित कर सकते हैं, जिससे हृदय, गुर्दे, यकृत और कई अन्य अंगों में विकार और विफलता हो सकती है। -प्रवीण कुमार राव, डीएम गैस्ट्रो।
