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Kushinagar News: गंडक का जलस्तर बढ़ने की आशंका, खेती की देखभाल में जुटे किसान
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तमकुहीरोड। जून का तीसरा सप्ताह बीतने के साथ ही गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए नदी के उस पार खेती करने वाले किसानों ने अपने खेतों की देखभाल तेज कर दी है। किसानों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के बाद खेतों तक पहुंचना और खेती संबंधी कार्य करना काफी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में सैकड़ों किसान और मजदूर प्रतिदिन नाव के सहारे नदी पार कर अपनी फसलों की देखभाल करने को विवश हैं।
गंडक नदी के किनारे बसे पिपराघाट, जंगली पट्टी, घघवा जगदीश, जवहीदयाल, बिरवट कोन्हवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनिया पट्टी, अहिरौलीदान समेत कई गांवों के किसानों की कृषि भूमि नदी के उस पार स्थित है। वर्तमान में किसानों ने वहां धान और गन्ने की खेती कर रखी है। जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते किसान समय रहते खेती संबंधी कार्यों को पूरा करने में जुटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद खेतों तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाएगा। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान और मजदूर रोजाना जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर खेतों तक पहुंचते हैं और कार्य समाप्त होने के बाद वापस लौटते हैं।
क्षेत्र के किसान दीनानाथ सिंह, पप्पू यादव, शैलेंद्र चौहान, बृजकिशोर साहनी, प्रदीप सिंह, गोरख यादव, कृष्णा निषाद और रामप्रसाद सिंह ने बताया कि सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक लगभग 17.5 किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। नदी के उस पार सैकड़ों किसान खेती करते हैं, लेकिन आज तक इस नदी पर न तो कोई पक्का पुल बना और न ही पीपे का पुल।
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किसानों के अनुसार पुल के अभाव में रोजाना सैकड़ों किसानों और मजदूरों को खेती-बाड़ी के लिए नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती है, जिससे हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उनका कहना है कि जब तक गंडक नदी पर पुल का निर्माण नहीं होगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी और किसानों को इसी तरह जोखिम उठाकर खेती करनी पड़ेगी।
गंडक नदी के किनारे बसे पिपराघाट, जंगली पट्टी, घघवा जगदीश, जवहीदयाल, बिरवट कोन्हवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनिया पट्टी, अहिरौलीदान समेत कई गांवों के किसानों की कृषि भूमि नदी के उस पार स्थित है। वर्तमान में किसानों ने वहां धान और गन्ने की खेती कर रखी है। जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते किसान समय रहते खेती संबंधी कार्यों को पूरा करने में जुटे हुए हैं। किसानों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद खेतों तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाएगा। यही वजह है कि बड़ी संख्या में किसान और मजदूर रोजाना जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार कर खेतों तक पहुंचते हैं और कार्य समाप्त होने के बाद वापस लौटते हैं।
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क्षेत्र के किसान दीनानाथ सिंह, पप्पू यादव, शैलेंद्र चौहान, बृजकिशोर साहनी, प्रदीप सिंह, गोरख यादव, कृष्णा निषाद और रामप्रसाद सिंह ने बताया कि सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक लगभग 17.5 किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। नदी के उस पार सैकड़ों किसान खेती करते हैं, लेकिन आज तक इस नदी पर न तो कोई पक्का पुल बना और न ही पीपे का पुल।
किसानों के अनुसार पुल के अभाव में रोजाना सैकड़ों किसानों और मजदूरों को खेती-बाड़ी के लिए नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती है, जिससे हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उनका कहना है कि जब तक गंडक नदी पर पुल का निर्माण नहीं होगा, तब तक यह समस्या बनी रहेगी और किसानों को इसी तरह जोखिम उठाकर खेती करनी पड़ेगी।