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Kushinagar News: यूरिक एसिड बढ़े तो हो जाएं सतर्क, गंभीर बीमारी का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:08 AM IST
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पडरौना। बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान का असर युवाओं की सेहत पर भी दिखने लगा है। पहले उम्रदराज लोगों में आम मानी जाने वाली यूरिक एसिड की समस्या अब युवाओं में बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में प्रति दिन 15 से बीस ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिसमें पांच से सात युवा रह रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. दिलीप जायसवाल ने बताया कि ओपीडी में सात सौ से एक हजार तक मरीज आ रहे हैं। इसमें से 35 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 15-20 लोगों में यूरिक एसिड की समस्या रहती है। खानपान में बदलाव और बदलती जीवनशैली से समस्या खासकर युवाओं में बढ़ रही है। इसके अलावा वजन ज्यादा होने पर शरीर की कोशिकाएं अधिक यूरिक एसिड बनाती हैं और किडनी इसे उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाती।
शारीरिक गतिविधि की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है। डॉक्टर बताया कि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर से यह तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इसके चलते मरीजों में जोड़ों में दर्द, सूजन, हाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होती हैं। जांच के लिए मरीजों का ब्लड टेस्ट और यूरिन सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा का सही आकलन किया जा जाता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी है।
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शारीरिक गतिविधि की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है। डॉक्टर बताया कि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर से यह तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इसके चलते मरीजों में जोड़ों में दर्द, सूजन, हाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होती हैं। जांच के लिए मरीजों का ब्लड टेस्ट और यूरिन सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा का सही आकलन किया जा जाता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी है।
