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Kushinagar News: अब मुस्कुराएंगे बुद्ध, 17 करोड़ से नए कलेवर में दिखेगा संग्रहालय
Sun, 09 Aug 2026 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:24 AM IST
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पडरौना। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर स्थित राजकीय बौद्ध संग्रहालय जल्द ही भव्य और विश्वस्तरीय स्वरूप में नजर आएगा। प्रदेश सरकार ने संग्रहालय के समग्र जीर्णोद्धार, आधुनिकीकरण और सुंदरीकरण के लिए करीब 17 करोड़ रुपये की परियोजना को हरी झंडी दे दी है। अब यहां महात्मा बुद्ध के संदेश और उनका स्वरूप नए कलेवर में मुस्कराएंगे। तीन करोड़ रुपये की प्रथम किस्त जारी होने के साथ ही कार्यदाई संस्था जल निगम की विशेष निर्माण इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन (सी एंड डीएस) ने काम शुरू करा दिया है। जीर्णोद्धार के बाद पूरा संग्रहालय परिसर वातानुकूलित और अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा।
पुनर्विकास योजना के तहत संग्रहालय के मुख्य प्रवेश द्वार को आकर्षक और भव्य ऐतिहासिक लुक दिया जाएगा। पर्यटकों और शोधार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वर्तमान टिकट काउंटर को संग्रहालय भवन से बाहर स्थानांतरित किया जा रहा है। पूरे संग्रहालय को वातानुकूलित बनाया जाएगा, जिससे ग्रीष्मकाल में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को सहूलियत मिलेगी।
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दिखेंगे बुद्ध के विविध रूप
संग्रहालय की चारों प्रमुख वीथिकाओं (गैलरी) का पूरी तरह आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसमें कला के विविध आयाम, विभिन्न मुद्राओं में बुद्ध और मुख्य कला वीथिका'' शामिल हैं। यहां बुद्ध की ध्यान, भूमि स्पर्श, अभय और धर्मचक्र प्रवर्तन जैसी विभिन्न मुद्राओं की दुर्लभ प्रतिमाओं, प्राचीन अवशेषोंऔर मृण्मूर्तियों को नई लाइट और आधुनिक डिस्प्ले शो-केस मेें प्रदर्शित किया जाएगा।
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अज्ञेय सभागार में लगेगा प्रोजेक्टर
संग्रहालय के अज्ञेय सभागार का विस्तार कर उसमें अत्याधुनिक प्रोजेक्टर और ऑडियो-विजुअल सिस्टम लगाए जाएंगे, जिसके जरिए दर्शक भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन और बौद्ध कला के इतिहास को डिजिटल रूप में देख सकेंगे। इसके अलावा, अध्ययन और शोध में रुचि रखने वालों के लिए संग्रहालय की लाइब्रेरी को नए और शांत परिसर में शिफ्ट कर समृद्ध बनाया जाएगा।
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पर्यटकों को मिलेगा विश्वस्तरीय अनुभव
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कुशीनगर के इस संग्रहालय को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यहां आने वाले बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों को एक ही छत के नीचे बौद्ध कला, संस्कृति और इतिहास का अद्वितीय अनुभव प्राप्त होगा।
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1350 कलाकृतियों व पुरा संपदाओं का है समृद्ध संग्रह:-
वर्तमान में राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर में कुल 1350 कलाकृतियों व पुरा संपदाओं का समृद्ध संग्रह मौजूद है। जिसमें 125 मूर्तियां, 477 टेराकोटा निर्मित वस्तुएं, विभिन्न ऐतिहासिक काल खंड के 501 सिक्के, 59 कांस्य निर्मित वस्तुएं, 07 थंका, 135 स्टैंप, 41 कांच निर्मित वस्तुएं, 02 हड्डी व एक लकड़ी की कलाकृति शामिल हैं।
कोट:-
राजकीय बौद्ध संग्रहालय के कायाकल्प के लिए 17 करोड़ रुपये की योजना मंजूर हुई है। तीन करोड़ रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है। सी एंड डीएस ने निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। प्रयास है कि संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार कर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। -डॉ. लोक रतन शुक्ला, संग्रहालय अध्यापक, कुशीनगर
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पुनर्विकास योजना के तहत संग्रहालय के मुख्य प्रवेश द्वार को आकर्षक और भव्य ऐतिहासिक लुक दिया जाएगा। पर्यटकों और शोधार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वर्तमान टिकट काउंटर को संग्रहालय भवन से बाहर स्थानांतरित किया जा रहा है। पूरे संग्रहालय को वातानुकूलित बनाया जाएगा, जिससे ग्रीष्मकाल में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को सहूलियत मिलेगी।
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दिखेंगे बुद्ध के विविध रूप
संग्रहालय की चारों प्रमुख वीथिकाओं (गैलरी) का पूरी तरह आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसमें कला के विविध आयाम, विभिन्न मुद्राओं में बुद्ध और मुख्य कला वीथिका'' शामिल हैं। यहां बुद्ध की ध्यान, भूमि स्पर्श, अभय और धर्मचक्र प्रवर्तन जैसी विभिन्न मुद्राओं की दुर्लभ प्रतिमाओं, प्राचीन अवशेषोंऔर मृण्मूर्तियों को नई लाइट और आधुनिक डिस्प्ले शो-केस मेें प्रदर्शित किया जाएगा।
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अज्ञेय सभागार में लगेगा प्रोजेक्टर
संग्रहालय के अज्ञेय सभागार का विस्तार कर उसमें अत्याधुनिक प्रोजेक्टर और ऑडियो-विजुअल सिस्टम लगाए जाएंगे, जिसके जरिए दर्शक भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन और बौद्ध कला के इतिहास को डिजिटल रूप में देख सकेंगे। इसके अलावा, अध्ययन और शोध में रुचि रखने वालों के लिए संग्रहालय की लाइब्रेरी को नए और शांत परिसर में शिफ्ट कर समृद्ध बनाया जाएगा।
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पर्यटकों को मिलेगा विश्वस्तरीय अनुभव
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कुशीनगर के इस संग्रहालय को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यहां आने वाले बौद्ध अनुयायियों और पर्यटकों को एक ही छत के नीचे बौद्ध कला, संस्कृति और इतिहास का अद्वितीय अनुभव प्राप्त होगा।
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1350 कलाकृतियों व पुरा संपदाओं का है समृद्ध संग्रह:-
वर्तमान में राजकीय बौद्ध संग्रहालय कुशीनगर में कुल 1350 कलाकृतियों व पुरा संपदाओं का समृद्ध संग्रह मौजूद है। जिसमें 125 मूर्तियां, 477 टेराकोटा निर्मित वस्तुएं, विभिन्न ऐतिहासिक काल खंड के 501 सिक्के, 59 कांस्य निर्मित वस्तुएं, 07 थंका, 135 स्टैंप, 41 कांच निर्मित वस्तुएं, 02 हड्डी व एक लकड़ी की कलाकृति शामिल हैं।
कोट:-
राजकीय बौद्ध संग्रहालय के कायाकल्प के लिए 17 करोड़ रुपये की योजना मंजूर हुई है। तीन करोड़ रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है। सी एंड डीएस ने निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। प्रयास है कि संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार कर पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। -डॉ. लोक रतन शुक्ला, संग्रहालय अध्यापक, कुशीनगर