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Kushinagar News: दरिंदगी के बाद मासूम की हत्या के दोषी को फांसी की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 26 Mar 2026 02:59 AM IST
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- पाॅक्सो कोर्ट में चली सुनवाई, न्यायालय ने करीब एक महीने में सुनाया फैसला
पडरौना। जटहा बाजार थाना क्षेत्र के एक गांव में मासूम से दरिंदगी और हत्या के मामले में न्यायालय ने बुधवार को वारदात के 30 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला कानून व्यवस्था और त्वरित न्याय प्रणाली के लिए बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
22 फरवरी को गांव में तिलक कार्यक्रम में गए बालक के लापता होने के बाद 23 फरवरी को खैरा माई स्थान के पास उसका शव बखार में मिला था। पुलिस ने आरोपी पिंटू उर्फ कोयल (22) निवासी हिरनही बीन टोली को 25 फरवरी को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर डिजिटल साक्ष्यों को ई-साक्ष्य एप के माध्यम से सुरक्षित किया। डीएनए रिपोर्ट सहित अन्य फोरेंसिक साक्ष्य प्राथमिकता पर प्राप्त किए।
पुलिस ने मात्र नौ कार्यदिवस में जांच पूरी कर सात मार्च को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। न्यायालय ने आठ मार्च को मामले की सुनवाई शुरू की। प्रतिदिन सुनवाई करते हुए गवाहों की पेशी कराई गई। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट दिनेश कुमार ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर बुधवार को पिंटू उर्फ कोयल को दोषी ठहराते हुए मृत्यु दंड (फांसी) और 3,25,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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फफक पड़ी मां बोली... बेटे को इंसाफ मिल गया
मंसाछापर। पीड़ित बालक के माता-पिता के लिए एक महीने का समय किसी भयावह सपने से कम नहीं रहा। न्यायालय के त्वरित फैसले ने उनके टूटे दिल को कुछ हद तक सहारा दिया है।
मृतक के पिता ने भावुक होकर कहा, ...हमने अपना बेटा खो दिया, उसका दर्द कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन सुकून है कि उसके कातिल को इतनी जल्दी सजा मिल गई...। मां इंदु देवी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने कहा, ...हम तो उम्मीद भी छोड़ चुके थे कि इतनी जल्दी न्याय मिलेगा, लेकिन पुलिस और कोर्ट ने हमारा भरोसा बनाए रखा..। पीड़ित परिवार का कहना है कि वारदात के बाद से ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और हर स्तर पर सहयोग किया। यही वजह रही कि महज 30 दिनों में ही न्याय मिल गया। गांव के लोग भी इस फैसले को ऐतिहासिक मान रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त सजा समाज में मजबूत संदेश देती है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पुलिस के इस त्वरित कार्रवाई और न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले से समाज में एक अच्छा संदेश गया है।
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पडरौना। जटहा बाजार थाना क्षेत्र के एक गांव में मासूम से दरिंदगी और हत्या के मामले में न्यायालय ने बुधवार को वारदात के 30 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। यह फैसला कानून व्यवस्था और त्वरित न्याय प्रणाली के लिए बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
22 फरवरी को गांव में तिलक कार्यक्रम में गए बालक के लापता होने के बाद 23 फरवरी को खैरा माई स्थान के पास उसका शव बखार में मिला था। पुलिस ने आरोपी पिंटू उर्फ कोयल (22) निवासी हिरनही बीन टोली को 25 फरवरी को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर डिजिटल साक्ष्यों को ई-साक्ष्य एप के माध्यम से सुरक्षित किया। डीएनए रिपोर्ट सहित अन्य फोरेंसिक साक्ष्य प्राथमिकता पर प्राप्त किए।
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पुलिस ने मात्र नौ कार्यदिवस में जांच पूरी कर सात मार्च को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। न्यायालय ने आठ मार्च को मामले की सुनवाई शुरू की। प्रतिदिन सुनवाई करते हुए गवाहों की पेशी कराई गई। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट दिनेश कुमार ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर बुधवार को पिंटू उर्फ कोयल को दोषी ठहराते हुए मृत्यु दंड (फांसी) और 3,25,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
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मंसाछापर। पीड़ित बालक के माता-पिता के लिए एक महीने का समय किसी भयावह सपने से कम नहीं रहा। न्यायालय के त्वरित फैसले ने उनके टूटे दिल को कुछ हद तक सहारा दिया है।
मृतक के पिता ने भावुक होकर कहा, ...हमने अपना बेटा खो दिया, उसका दर्द कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन सुकून है कि उसके कातिल को इतनी जल्दी सजा मिल गई...। मां इंदु देवी की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उन्होंने कहा, ...हम तो उम्मीद भी छोड़ चुके थे कि इतनी जल्दी न्याय मिलेगा, लेकिन पुलिस और कोर्ट ने हमारा भरोसा बनाए रखा..। पीड़ित परिवार का कहना है कि वारदात के बाद से ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और हर स्तर पर सहयोग किया। यही वजह रही कि महज 30 दिनों में ही न्याय मिल गया। गांव के लोग भी इस फैसले को ऐतिहासिक मान रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त सजा समाज में मजबूत संदेश देती है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पुलिस के इस त्वरित कार्रवाई और न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले से समाज में एक अच्छा संदेश गया है।