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Kushinagar News: स्वामी विवेकानंद का वेदांत दर्शन संपूर्ण विश्व के लिए प्रकाश पुंज
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गोष्ठी को संबोधित करते अतिथि। संवाद
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संतकबीरनगर। एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद के सभागार में उच्च शिक्षा विभाग, बीएड विभाग के तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परंपरा में स्वामी विवेकानंद का वेदांत दर्शन, विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसके समापन पर मुख्य अतिथि राम सहाय पीजी काॅलेज रुद्रपुर देवरिया के प्राचार्य प्रो. ब्रजेश कुमार पांडेय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का वेदांत दर्शन न केवल भारतीयों के लिए, अपितु संपूर्ण विश्व के लिए ऐसा प्रकाश पुंज है जो भटके हुए युवाओं को सदियों तक मार्ग दिखाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपने ऐतिहासिक भाषण से भारतीय संस्कृति, विशेषकर वेदांत और आध्यात्मिकता को विश्व के सामने प्रस्तुत किया। उनके सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका संबोधन ने पूरी दुनिया को भारत की उदार और सार्वभौमिक संस्कृति से परिचित कराया।
विशिष्ट अतिथि रतनसेन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बांसी के प्राचार्य डॉ. संतोष सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीयों में आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई। भारत की संस्कृति महान है, हमें उस पर गर्व होना चाहिए। उनके विचारों ने स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं को भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. उमेश प्रसाद यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने नर सेवा ही नारायण सेवा का सिद्धांत दिया। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया।
एचआरपीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ब्रजेश त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि बीएड विभाग के अध्यक्ष डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. विजय कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इसके पहले सुबह तीन तकनीकी सत्र में उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों द्वारा 42 शोधपत्रों का वाचन किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. डीएन पांडेय, प्रो. प्रताप विजय कुमार, डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. मनोज वर्मा, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. अनुपम पति त्रिपाठी, डॉ. विन्देश्वर सिंह, अर्चना मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपने ऐतिहासिक भाषण से भारतीय संस्कृति, विशेषकर वेदांत और आध्यात्मिकता को विश्व के सामने प्रस्तुत किया। उनके सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका संबोधन ने पूरी दुनिया को भारत की उदार और सार्वभौमिक संस्कृति से परिचित कराया।
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विशिष्ट अतिथि रतनसेन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बांसी के प्राचार्य डॉ. संतोष सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीयों में आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई। भारत की संस्कृति महान है, हमें उस पर गर्व होना चाहिए। उनके विचारों ने स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं को भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. उमेश प्रसाद यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने नर सेवा ही नारायण सेवा का सिद्धांत दिया। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया।
एचआरपीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ब्रजेश त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि बीएड विभाग के अध्यक्ष डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. विजय कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इसके पहले सुबह तीन तकनीकी सत्र में उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिभागियों द्वारा 42 शोधपत्रों का वाचन किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. डीएन पांडेय, प्रो. प्रताप विजय कुमार, डॉ. मनोज मिश्र, डॉ. मनोज वर्मा, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. अनुपम पति त्रिपाठी, डॉ. विन्देश्वर सिंह, अर्चना मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

गोष्ठी को संबोधित करते अतिथि। संवाद