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Kushinagar News: राजा परीक्षित की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 04 May 2026 02:33 AM IST
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धुनवलिया गांव में कथा सुनाते आचार्य राजेश शास्त्री।स्रोत-सोशल मीडिया
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जोकवा बाजार। क्षेत्र के धुनवलिया गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन धाम से आए कथावाचक पंडित राजेश शास्त्री ने राजा परीक्षित की कथा सुनाई। कथा सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
कथावाचक ने कहा कि एक बार राजा परीक्षित वन में गए थे। उन्हें प्यास लगी, तो वे शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे और पानी मांगा। ऋषि उस समय समाधि में थे, जिससे पानी नहीं पिला सके। राजा परीक्षित ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधवश मरा सांप ऋषि के गले में डाल दिया।
पास में खेल रहे बालकों ने यह बात शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी को बताई। क्रोध में शृंगी ने सातवें दिन तक्षक नामक सर्प के डसने से राजा परीक्षित की मृत्यु का शाप दे दिया। जब शमीक ऋषि को यह पता हुआ तो उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि परीक्षित एक धर्मात्मा राजा हैं और यह कार्य उन्होंने कलियुग के प्रभाव में आकर किया है। ऋषि ने यह जानकारी स्वयं राजा परीक्षित को दी। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने अपने पुत्र जन्मेजय को राज्य सौंपकर गंगा नदी के तट पर तपस्या के लिए प्रस्थान किया। वहां अनेक ऋषि-मुनि और देवता एकत्र हुए। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और कथा स्थल भक्ति रस में डूब गया। धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। कथा में मारकंडेश्वर शरण पांडेय, मुकुल तिवारी, डा. शरमेंद्र मिश्र, प्रदीप उपाध्याय, विनोद तिवारी, सूरज मद्धेशिया सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथावाचक ने कहा कि एक बार राजा परीक्षित वन में गए थे। उन्हें प्यास लगी, तो वे शमीक ऋषि के आश्रम पहुंचे और पानी मांगा। ऋषि उस समय समाधि में थे, जिससे पानी नहीं पिला सके। राजा परीक्षित ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधवश मरा सांप ऋषि के गले में डाल दिया।
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पास में खेल रहे बालकों ने यह बात शमीक ऋषि के पुत्र शृंगी को बताई। क्रोध में शृंगी ने सातवें दिन तक्षक नामक सर्प के डसने से राजा परीक्षित की मृत्यु का शाप दे दिया। जब शमीक ऋषि को यह पता हुआ तो उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा कि परीक्षित एक धर्मात्मा राजा हैं और यह कार्य उन्होंने कलियुग के प्रभाव में आकर किया है। ऋषि ने यह जानकारी स्वयं राजा परीक्षित को दी। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने अपने पुत्र जन्मेजय को राज्य सौंपकर गंगा नदी के तट पर तपस्या के लिए प्रस्थान किया। वहां अनेक ऋषि-मुनि और देवता एकत्र हुए। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और कथा स्थल भक्ति रस में डूब गया। धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। कथा में मारकंडेश्वर शरण पांडेय, मुकुल तिवारी, डा. शरमेंद्र मिश्र, प्रदीप उपाध्याय, विनोद तिवारी, सूरज मद्धेशिया सहित श्रद्धालु मौजूद रहे।
