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Kushinagar News: गोष्ठी में एकात्मभाव और संगठन पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 16 Apr 2026 02:20 AM IST
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कुशीनगर। आरएसएस के तत्वावधान में बुधवार को कसया नगर के एक निजी रिसोर्ट में प्रमुख जन गोष्ठी हुई। भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से शुभारंभ हुआ। गोष्ठी में एकात्मभाव और संगठन पर जोर दिया गया।
मुख्यवक्ता अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति से जुड़े रहे और 1914 में अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की। 1915 में वे महाराष्ट्र में कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता बने। उन्होंने बताया कि बाल गंगाधर तिलक उनके आदर्श थे, जबकि मदन मोहन मालवीय उनके सम्माननीय महापुरुषों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार इस बात को लेकर चिंतित थे कि इतना बड़ा देश होने के बावजूद भारत पराधीन क्यों हुआ। इसके पीछे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि हिन्दू समाज आत्मविस्मृति और आत्मकेंद्रित सोच का शिकार हो गया है। इसी विचार के साथ हिंदू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। मुख्यवक्ता ने कहा कि यदि समाज असंगठित रहेगा तो भविष्य में भी खतरे बने रह सकते हैं। इसलिए संगठन ही शक्ति है। उन्होंने भारत की विविधता में एकात्मभाव को उसकी सबसे बड़ी विशेषता बताया और कहा कि संघ में परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरु के स्थान पर मानकर कार्य किया जाता है। “हिन्दवः सोदरा सर्वे” के भाव के साथ संघ ने 100 वर्षों की साधना में अपने लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता भंते रत्नाकर ने की। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का धर्म वैज्ञानिक और सनातन मूल्यों से परिपूर्ण है। संघ की शाखाएं समाज में संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
कार्यक्रम का संचालन सह जिला बौद्धिक शिक्षण प्रमुख करूणानिधान ने किया। अधिकारी परिचय जिला कार्यवाह डॉ. देवेंद्र प्रताप ने कराया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि सह विभाग संघचालक डॉ. चन्द्रशेखर एवं जिला संघचालक रामाश्रय प्रसाद मौजूद रहे। जिज्ञासा समाधान सत्र का संचालन नगर संघचालक पयोदकांत ने किया। अंत में वंदे मातरम गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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मुख्यवक्ता अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति से जुड़े रहे और 1914 में अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की। 1915 में वे महाराष्ट्र में कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता बने। उन्होंने बताया कि बाल गंगाधर तिलक उनके आदर्श थे, जबकि मदन मोहन मालवीय उनके सम्माननीय महापुरुषों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार इस बात को लेकर चिंतित थे कि इतना बड़ा देश होने के बावजूद भारत पराधीन क्यों हुआ। इसके पीछे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि हिन्दू समाज आत्मविस्मृति और आत्मकेंद्रित सोच का शिकार हो गया है। इसी विचार के साथ हिंदू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की गई। मुख्यवक्ता ने कहा कि यदि समाज असंगठित रहेगा तो भविष्य में भी खतरे बने रह सकते हैं। इसलिए संगठन ही शक्ति है। उन्होंने भारत की विविधता में एकात्मभाव को उसकी सबसे बड़ी विशेषता बताया और कहा कि संघ में परम पवित्र भगवा ध्वज को गुरु के स्थान पर मानकर कार्य किया जाता है। “हिन्दवः सोदरा सर्वे” के भाव के साथ संघ ने 100 वर्षों की साधना में अपने लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता भंते रत्नाकर ने की। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का धर्म वैज्ञानिक और सनातन मूल्यों से परिपूर्ण है। संघ की शाखाएं समाज में संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
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कार्यक्रम का संचालन सह जिला बौद्धिक शिक्षण प्रमुख करूणानिधान ने किया। अधिकारी परिचय जिला कार्यवाह डॉ. देवेंद्र प्रताप ने कराया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि सह विभाग संघचालक डॉ. चन्द्रशेखर एवं जिला संघचालक रामाश्रय प्रसाद मौजूद रहे। जिज्ञासा समाधान सत्र का संचालन नगर संघचालक पयोदकांत ने किया। अंत में वंदे मातरम गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
