मथौली। नरायनपुर-लक्ष्मीपुर माइनर में अब तक पानी नहीं पहुंचने से क्षेत्र के किसान परेशान हैं। खेतों की सिंचाई के लिए किसानों को पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि सरकार की मंशा नहरों और माइनरों के माध्यम से हेड से टेल तक पानी पहुंचाने की है, लेकिन क्षेत्र में इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसान प्रेमचंद सिंह, ओसीम अंसारी, इम्तियाज अंसारी, मुबारक अंसारी, ताहिर अंसारी, साबिर शेख, राजकुमार सिंह, नर्मदा सिंह, नरसिंह सिंह, रामबदन राव, विमल यादव, बद्री यादव, इंद्रसेन सिंह, रामनेती गुप्ता ने बताया कि यह माइनर नरायनपुर से निकलकर लक्ष्मीपुर, मथौली नगर पंचायत, गौनरिया, सतभरिया, फर्दमुडेरा सहित कई गांवों से होकर गुजरती है। वर्तमान समय में गन्ना, सब्जी, मक्का, मूंग, धान की नर्सरी और धान की रोपाई का कार्य चल रहा है। ऐसे में पानी की आवश्यकता बढ़ गई है, लेकिन माइनर सूखी होने से किसान निजी संसाधनों से सिंचाई करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि डीजल और बिजली की बढ़ती लागत के कारण पंपसेट से सिंचाई करना महंगा साबित हो रहा है। उन्होंने सिंचाई विभाग से जल्द से जल्द माइनर में पानी छोड़े जाने की मांग की है। सिंचाई विभाग के जेई मनीष ने बताया कि वर्तमान में पानी की मांग अधिक होने के कारण दो नहरों का संचालन एक साथ संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि नारायनपुर राजबाहा का पानी बंद होने के बाद माइनर में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे किसानों को राहत मिल सकेगी।