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Kushinagar News: किसानों को जोत के अनुसार मिलेगा उर्वरक, कालाबाजारी पर होगी सख्ती
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पडरौना। खरीफ सीजन-2026 में किसानों को समय से उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि किसानों को उनकी कृषि जोत और फसल की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यूरिया वितरण के दौरान नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि धांधली पर रोक लगाया जा सके।
जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके कॉम्प्लेक्स, एमओपी समेत सभी उर्वरकों की बिक्री निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर ही की जाए। निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी कृषि जोत, फसल और आधार कार्ड के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। उर्वरक विक्रेताओं द्वारा किसी अन्य उत्पाद की अनिवार्य टैगिंग या जबरन बिक्री नहीं की जानी चाहिए। यदि कोई विक्रेता किसानों को अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करता पाया गया तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया जाएगा। उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण, वितरण और बिक्री की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्टॉक एवं बिक्री पंजिकाओं का अद्यतन रखरखाव तथा पीओएस मशीन के माध्यम से पारदर्शी बिक्री व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। अधिक मात्रा में उर्वरक खरीदने वाले संदिग्ध किसानों की सूची का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार स्थलीय जांच भी कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए जिले के सभी ब्लॉकों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। नामित अधिकारी नियमित निरीक्षण कर प्रतिदिन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे और किसी भी शिकायत या अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके कॉम्प्लेक्स, एमओपी समेत सभी उर्वरकों की बिक्री निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर ही की जाए। निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बेचने वाले विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी कृषि जोत, फसल और आधार कार्ड के आधार पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। उर्वरक विक्रेताओं द्वारा किसी अन्य उत्पाद की अनिवार्य टैगिंग या जबरन बिक्री नहीं की जानी चाहिए। यदि कोई विक्रेता किसानों को अन्य उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करता पाया गया तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया जाएगा। उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण, वितरण और बिक्री की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्टॉक एवं बिक्री पंजिकाओं का अद्यतन रखरखाव तथा पीओएस मशीन के माध्यम से पारदर्शी बिक्री व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। अधिक मात्रा में उर्वरक खरीदने वाले संदिग्ध किसानों की सूची का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार स्थलीय जांच भी कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए जिले के सभी ब्लॉकों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। नामित अधिकारी नियमित निरीक्षण कर प्रतिदिन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे और किसी भी शिकायत या अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
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