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Kushinagar News: विद्यालय खुलने में शेष पांच दिन, होमवर्क अपूर्णता को लेकर छात्र-छात्राएं चिंतित

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:37 AM IST
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Five days left until school reopens; students worried about incomplete homework.
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साखोपार। विद्यालयों में 20 मई से संचालित ग्रीष्मावकाश अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। शासन के शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार 25 जून से निजी व शासकीय विद्यालयों में गर्मी की छुट्टी के बाद से पढ़ाई शुरू होगी। विद्यालय खुलने में अब केवल पांच दिवस शेष हैं। छुट्टी समाप्ति की तिथि निकट आते ही छात्र-छात्राओं में होमवर्क एवं प्रोजेक्ट कार्य पूर्ण न हो पाने की चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

अवकाश के बाद पहले दिन में बच्चों ने खुले मन से छुट्टियों का आनंद लिया। अनेक छात्र ननिहाल एवं रिश्तेदारों के यहां गए, तो कुछ ने खेल, मोबाइल, टीवी एवं अन्य मनोरंजक गतिविधियों में समय व्यतीत किया। शिक्षकों द्वारा अवकाश काल में रचनात्मक लेखन, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के प्रोजेक्ट, गणितीय अभ्यास, हिंदी-अंग्रेजी में निबंध लेखन और पाठ्य पुस्तक आधारित असाइनमेंट दिए गए थे। इसका उद्देश्य अवकाश में भी अधिगम की निरंतरता बनाए रखना था, लेकिन जून माह में पारा 42 डिग्री के पार पहुंच जाने, हीट वेव एवं अनियमित विद्युत आपूर्ति के कारण घर का वातावरण अध्ययन के अनुकूल नहीं रह सका। प्रचंड गर्मी के कारण बच्चे दिन में पढ़ाई से बचते रहे और रात में भी देर तक जागने में असमर्थ रहे। परिणामस्वरूप अधिकांश छात्र-छात्राएं अब अंतिम सप्ताह में होमवर्क पूर्ण करने की होड़ में जुटे हैं। देर रात्रि तक कॉपी, प्रैक्टिकल फाइल, चार्ट एवं प्रोजेक्ट तैयार करते बच्चे मानसिक एवं शारीरिक थकान का अनुभव कर रहे हैं। अभिभावकों की चिंता भी बढ़ी हुई है। उनका कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण बच्चों का स्वास्थ्य पहले से प्रभावित है और अब समयाभाव में कार्य पूर्ण कराने से उन पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने बताया कि अंतिम समय में की गई जल्दबाजी के कारण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है और बच्चे विषय को समझने के बजाय केवल निपटाने की प्रवृत्ति अपनाते हैं। शिक्षाविदों का मत है कि अवकाशकालीन कार्य का मूल उद्देश्य रटने के बजाय स्वाध्याय, सृजनात्मकता एवं व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देना है। इसके लिए आवश्यक है कि होमवर्क की मात्रा सीमित, आयु-अनुरूप एवं रुचिकर हो। उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षकों को सत्र के प्रारंभ में ही बच्चों को समय-प्रबंधन की आदत डालनी चाहिए, जिससे अंतिम समय में दबाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
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