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Kushinagar News: बांसी में बढ़े घड़ियाल, मछुआरों की आजीविका पर संकट
Mon, 29 Jun 2026 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 29 Jun 2026 02:25 AM IST
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दुदही। अगर प्रशासन समय रहते नहीं जागा, तो दुदही क्षेत्र में छोटेलाल निषाद जैसी न जाने कितनी और जाने जा सकती हैं। बांसी नदी, जो कभी दुदही ब्लॉक के सैकड़ों भूमिहीन निषाद परिवारों के लिए आजीविका का सहारा थी। आज उनके लिए मौत स्थल के लिए साबित हो रही है। नदी में घड़ियालों की तादाद में वृद्धि से निषाद परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है तो वहीं नदी में उतरने पर घड़ियालों का खतरा मंडरा रहा है।
गौरतलब है कि दुदही विकास खंड के बांसगांव बिंद टोली निवासी मृतक छोटेलाल निषाद ही सिर्फ इकलौते नहीं, जो मछली पकड़कर अपने परिवार का पालन पोषण कर कर रहे थे। अगर अब भी प्रशासन नहीं जगा तो कई छोटेलाल की जानें जा सकती हैं।
क्षेत्र के जंगल नौगांव, नारहवा, बैकुंठपुर कोठी, कोकिल पट्टी, बांसगांव, जमुआन, बिंद टोली, गौरी जगदीश, गौरी शुक्ला, पांडेय पट्टी, चौबेया पटखौली सहित 20 से अधिक गांव हैं।
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जहां निषाद बिरादरी के लोगों का मुख्य रोजी-रोटी का व्यवसाय बांसी नदी में मछली पकड़कर बाजार ने बेचकर परिवार के लोगों का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में नदी में घड़ियाल व मगरमच्छों के आवक से रोजी रोटी के साथ जान को खतरा बने हुए हैं।
वन विभाग सिर्फ बोर्ड लगाकर दायित्व से मुंह मोड़ लिया है। हालांकि, तहसील प्रशासन प्रत्येक वर्ष मछली पकड़ने के लिए पट्टा भी करता है। पिछले साल तीन लाख 25 हजार रुपये में मछली पकड़ने के लिए पट्टा किया गया था।
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गौरतलब है कि दुदही विकास खंड के बांसगांव बिंद टोली निवासी मृतक छोटेलाल निषाद ही सिर्फ इकलौते नहीं, जो मछली पकड़कर अपने परिवार का पालन पोषण कर कर रहे थे। अगर अब भी प्रशासन नहीं जगा तो कई छोटेलाल की जानें जा सकती हैं।
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क्षेत्र के जंगल नौगांव, नारहवा, बैकुंठपुर कोठी, कोकिल पट्टी, बांसगांव, जमुआन, बिंद टोली, गौरी जगदीश, गौरी शुक्ला, पांडेय पट्टी, चौबेया पटखौली सहित 20 से अधिक गांव हैं।
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जहां निषाद बिरादरी के लोगों का मुख्य रोजी-रोटी का व्यवसाय बांसी नदी में मछली पकड़कर बाजार ने बेचकर परिवार के लोगों का भरण-पोषण करते हैं। ऐसे में नदी में घड़ियाल व मगरमच्छों के आवक से रोजी रोटी के साथ जान को खतरा बने हुए हैं।
वन विभाग सिर्फ बोर्ड लगाकर दायित्व से मुंह मोड़ लिया है। हालांकि, तहसील प्रशासन प्रत्येक वर्ष मछली पकड़ने के लिए पट्टा भी करता है। पिछले साल तीन लाख 25 हजार रुपये में मछली पकड़ने के लिए पट्टा किया गया था।