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Kushinagar News: अधूरा तटबंध बढ़ा रहा चिंता, अमवाखास बांध पर 19 करोड़ की परियोजनाएं अटकीं
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अमावा खास तटबंध पर चल रहा कार्य अधूरा।संवाद
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दुदही/बरवापट्टी। मानसून के बीच अमवाखास तटबंध पर करीब 19 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। शासन ने 20 जून तक सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए थे लेकिन निर्माण की धीमी रफ्तार से तटबंध किनारे बसे गांवों के लोगों में बाढ़ के खतरे की आशंका गहरा गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ लक्ष्मीपुर गांव के सामने कटान शुरू हो गया है। वहीं तटबंध के विभिन्न हिस्सों, खासकर किलोमीटर 5.25, 7.00 और 7.400 पर निर्माण कार्य अभी अधूरा है। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्य पूरा नहीं हुआ तो बाढ़ के दौरान परेशानी बढ़ सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बरवापट्टी जीरो प्वाइंट से करीब नौ किलोमीटर तक कई स्थानों पर तटबंध जर्जर स्थिति में है। पुराने स्परों पर झाड़ियां उग आई हैं, जिन्हें अब तक साफ नहीं कराया गया है। उनका कहना है कि झाड़ियों के बीच बने रैट होल और वर्षा से बने कटाव समय पर नहीं दिख पाते, जिससे तटबंध कमजोर होने का खतरा रहता है।
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सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
-ग्रामीणों का आरोप है कि जिन परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, वहां सूचना बोर्ड और सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर न तो बोर्ड लगाए गए हैं और न ही कैमरे। मजदूरों के लिए प्राथमिक उपचार, लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा संसाधनों की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। किसी दुर्घटना की स्थिति में पांच किलोमीटर दूर खानगी बाजार जाना पड़ता है।
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मजदूरों के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था उपलब्ध है। सभी कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। जहां सूचना बोर्ड नहीं लगे हैं, वहां उन्हें लगवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर झाड़ियों की सफाई कराई जा चुकी है और शेष हिस्सों में भी कार्य जारी है। रैट होल और बारिश से हुई कटान की लगातार निगरानी की जा रही है तथा तटबंध पर किसी प्रकार का खतरा नहीं है। -सूर्यप्रकाश सिंह,एसडीओ बाढ़ खंड
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ग्रामीणों का कहना है कि नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ लक्ष्मीपुर गांव के सामने कटान शुरू हो गया है। वहीं तटबंध के विभिन्न हिस्सों, खासकर किलोमीटर 5.25, 7.00 और 7.400 पर निर्माण कार्य अभी अधूरा है। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्य पूरा नहीं हुआ तो बाढ़ के दौरान परेशानी बढ़ सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बरवापट्टी जीरो प्वाइंट से करीब नौ किलोमीटर तक कई स्थानों पर तटबंध जर्जर स्थिति में है। पुराने स्परों पर झाड़ियां उग आई हैं, जिन्हें अब तक साफ नहीं कराया गया है। उनका कहना है कि झाड़ियों के बीच बने रैट होल और वर्षा से बने कटाव समय पर नहीं दिख पाते, जिससे तटबंध कमजोर होने का खतरा रहता है।
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सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
-ग्रामीणों का आरोप है कि जिन परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है, वहां सूचना बोर्ड और सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर न तो बोर्ड लगाए गए हैं और न ही कैमरे। मजदूरों के लिए प्राथमिक उपचार, लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा संसाधनों की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। किसी दुर्घटना की स्थिति में पांच किलोमीटर दूर खानगी बाजार जाना पड़ता है।
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मजदूरों के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था उपलब्ध है। सभी कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। जहां सूचना बोर्ड नहीं लगे हैं, वहां उन्हें लगवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर झाड़ियों की सफाई कराई जा चुकी है और शेष हिस्सों में भी कार्य जारी है। रैट होल और बारिश से हुई कटान की लगातार निगरानी की जा रही है तथा तटबंध पर किसी प्रकार का खतरा नहीं है। -सूर्यप्रकाश सिंह,एसडीओ बाढ़ खंड