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मदनी मस्जिद : शीर्ष कोर्ट के निर्णय के बाद हाटा कस्बे पर खुफिया एजेंसियों की नजर
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-पुलिस ने बढ़ाई सतर्कता, करमहा चौराह पर आने-जाने वाले लोगों पर पुलिस की निगाह,मस्जिद का अवैध हिस्सा ध्वस्त होने के बाद तूल पकड़ा था मामला
-सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रशासन को राहत, हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने की तैयारी
हाटा। नगर के करमहा चौराहा स्थित मदनी मस्जिद प्रकरण में मस्जिद कमेटी की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अब प्रशासन हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने की तैयारी में है। इसके लिए अभिलेखीय प्रक्रिया पूरा की जा रही है। याचिका खारिज होने के बाद हाटा कस्बे में खुफिया एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है। पुलिस सतर्क हो गई है और करमहा चौराहा तथा मोहल्ले में आने-जाने वालों पर पुलिस की नजर है। करीब डेढ़ वर्ष से कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में रहे इस मामले में 16 जुलाई को सुप्रिम कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रशासन आगे की रणनीति तय करने में जुट गया है। मस्जिद पक्ष प्रशासन की कार्रवाई को आज भी गलत बता रहा है और हाईकोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेगा।
हाटा कस्बे के मदनी मस्जिद विवाद उस समय सुर्खियों में आया था, जब नौ फरवरी 2025 को जिला प्रशासन ने जांच के बाद मस्जिद के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन का कहना था कि मस्जिद निर्माण का कुछ भाग सरकारी भूमि पर किया गया था और कार्रवाई से पहले मस्जिद पक्ष को नियमानुसार नोटिस भी दिया गया था। वहीं, मस्जिद कमेटी ने एकतरफा कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया था कि पर्याप्त अवसर दिए बिना और न्यायालय के स्थगन आदेश की अनदेखी कर मस्जिद पर बुलडोजर चलाया गया।
मस्जिद कमेटी के पक्षकार अजमतुन्निशा सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन से जवाब तलब करते हुए मस्जिद पर आगे किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। बाद में राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा। मस्जिद कमेटी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर भी दिया गया। 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी। साथ ही पहले दी गई अंतरिम राहत भी समाप्त हो गई। न्यायालय के इस आदेश को प्रशासनिक अमले के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब जिला प्रशासन आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर विचार कर रहा है। एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की कॉपी मिलने के बाद कानूनी सलाह ली जाएगी और हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कराया जाएगा, ताकि हाईकोर्ट में प्रशासन का भी पक्ष सुना जाए।
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अफसरों को मुकदमे में बनाया था पक्षकार
मदनी मस्जिद मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी यह भी रही कि मस्जिद कमेटी ने अपनी याचिका में तत्कालीन डीएम विशाल भारद्वाज, तत्कालीन एसपी संतोष कुमार मिश्रा, एसडीएम योगेश्वर सिंह, तत्कालीन सीओ कुंदन सिंह, कोतवाल सुशील शुक्ला, चौकी प्रभारी विवेक पांडेय, नगर पालिका की ईओ मीनू सिंह, जेई मनोज यादव समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कमेटी का आरोप था कि इन अधिकारियों ने विधिक प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई की। जबकि, प्रशासन लगातार अपने कदम को कानून सम्मत बताता रहा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि न्यायालय के आदेश का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है और विधि विशेषज्ञों से भी राय ली जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा। दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी के अगले कानूनी कदम पर भी लोगों की नजर है।
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दर्ज प्राथमिकी की कार्रवाई में आएगी तेजी
मस्जिद निर्माण में प्रयोग किए जा रहे धन व अन्य पहलुओं को लेकर 25 जनवरी 2025 को मस्जिद पक्ष के जाकिर, शाकिर, जाफर सहित निर्माण समिति के अन्य सदस्यों के विरुद्ध राष्ट्र विरोधी गतिविधि, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। सुप्रीम कोर्ट से रोक लगने के बाद प्राथमिकी का विवेचना आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब विवेचना की प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी।
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मदनी मस्जिद में कब क्या हुआ
2002 से बन रही चार मंजिला मदनी मस्जिद के सरकारी भूमि पर कब्जा कर निर्माण की शिकायत 17 दिसंबर 2024 को हाटा के ही भाजपा नेता रामबचन सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की।
-18 दिसंबर 2024 को प्रशासन ने निर्माण पर रोक लगा दी। पैमाइश कर आठ दिन बाद सरकारी भूमि पर कब्जा कर निर्माण कराने की रिपोर्ट शासन को भेजी।
-19 दिसंबर 2024 को नगरपालिका हाटा ने भी निर्माण संबंधी नक्शा तलब किया।
-15 दिन बाद मस्जिद पक्षकारों ने नगर पालिका प्रशासन के सामने नक्शा प्रस्तुत किया।
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-सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रशासन को राहत, हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने की तैयारी
हाटा। नगर के करमहा चौराहा स्थित मदनी मस्जिद प्रकरण में मस्जिद कमेटी की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली है। अब प्रशासन हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल करने की तैयारी में है। इसके लिए अभिलेखीय प्रक्रिया पूरा की जा रही है। याचिका खारिज होने के बाद हाटा कस्बे में खुफिया एजेंसियों की निगरानी बढ़ गई है। पुलिस सतर्क हो गई है और करमहा चौराहा तथा मोहल्ले में आने-जाने वालों पर पुलिस की नजर है। करीब डेढ़ वर्ष से कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में रहे इस मामले में 16 जुलाई को सुप्रिम कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रशासन आगे की रणनीति तय करने में जुट गया है। मस्जिद पक्ष प्रशासन की कार्रवाई को आज भी गलत बता रहा है और हाईकोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेगा।
हाटा कस्बे के मदनी मस्जिद विवाद उस समय सुर्खियों में आया था, जब नौ फरवरी 2025 को जिला प्रशासन ने जांच के बाद मस्जिद के एक हिस्से पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया था। प्रशासन का कहना था कि मस्जिद निर्माण का कुछ भाग सरकारी भूमि पर किया गया था और कार्रवाई से पहले मस्जिद पक्ष को नियमानुसार नोटिस भी दिया गया था। वहीं, मस्जिद कमेटी ने एकतरफा कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया था कि पर्याप्त अवसर दिए बिना और न्यायालय के स्थगन आदेश की अनदेखी कर मस्जिद पर बुलडोजर चलाया गया।
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मस्जिद कमेटी के पक्षकार अजमतुन्निशा सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन से जवाब तलब करते हुए मस्जिद पर आगे किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। बाद में राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा। मस्जिद कमेटी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर भी दिया गया। 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी। साथ ही पहले दी गई अंतरिम राहत भी समाप्त हो गई। न्यायालय के इस आदेश को प्रशासनिक अमले के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब जिला प्रशासन आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर विचार कर रहा है। एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की कॉपी मिलने के बाद कानूनी सलाह ली जाएगी और हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कराया जाएगा, ताकि हाईकोर्ट में प्रशासन का भी पक्ष सुना जाए।
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अफसरों को मुकदमे में बनाया था पक्षकार
मदनी मस्जिद मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी यह भी रही कि मस्जिद कमेटी ने अपनी याचिका में तत्कालीन डीएम विशाल भारद्वाज, तत्कालीन एसपी संतोष कुमार मिश्रा, एसडीएम योगेश्वर सिंह, तत्कालीन सीओ कुंदन सिंह, कोतवाल सुशील शुक्ला, चौकी प्रभारी विवेक पांडेय, नगर पालिका की ईओ मीनू सिंह, जेई मनोज यादव समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कमेटी का आरोप था कि इन अधिकारियों ने विधिक प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई की। जबकि, प्रशासन लगातार अपने कदम को कानून सम्मत बताता रहा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि न्यायालय के आदेश का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है और विधि विशेषज्ञों से भी राय ली जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा। दूसरी ओर, मस्जिद कमेटी के अगले कानूनी कदम पर भी लोगों की नजर है।
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दर्ज प्राथमिकी की कार्रवाई में आएगी तेजी
मस्जिद निर्माण में प्रयोग किए जा रहे धन व अन्य पहलुओं को लेकर 25 जनवरी 2025 को मस्जिद पक्ष के जाकिर, शाकिर, जाफर सहित निर्माण समिति के अन्य सदस्यों के विरुद्ध राष्ट्र विरोधी गतिविधि, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। सुप्रीम कोर्ट से रोक लगने के बाद प्राथमिकी का विवेचना आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब विवेचना की प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी।
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मदनी मस्जिद में कब क्या हुआ
2002 से बन रही चार मंजिला मदनी मस्जिद के सरकारी भूमि पर कब्जा कर निर्माण की शिकायत 17 दिसंबर 2024 को हाटा के ही भाजपा नेता रामबचन सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की।
-18 दिसंबर 2024 को प्रशासन ने निर्माण पर रोक लगा दी। पैमाइश कर आठ दिन बाद सरकारी भूमि पर कब्जा कर निर्माण कराने की रिपोर्ट शासन को भेजी।
-19 दिसंबर 2024 को नगरपालिका हाटा ने भी निर्माण संबंधी नक्शा तलब किया।
-15 दिन बाद मस्जिद पक्षकारों ने नगर पालिका प्रशासन के सामने नक्शा प्रस्तुत किया।