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Kushinagar News: कठिन राह पर हाैसला बरकरार, बोल बम के नारे के साथ बढ़ रहे कदम
Mon, 10 Aug 2026 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 10 Aug 2026 02:35 AM IST
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मंसाछापर। कुबेरस्थान स्थित प्राचीन शिव मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जटहा थाना क्षेत्र के कटाई भरपुरवा गांव के पास बड़ी गंडक नदी के तट पर सुबह से ही कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने नदी से पवित्र जल भरा और कांवड़ लेकर पैदल ही कुबेरस्थान शिव मंदिर के लिए रवाना हो गए।
बड़ी गंडक नदी का तट हर-हर महादेव, बोल बम और जय शिव शंकर के जयकारों से गूंजता रहा। दूर-दराज से पहुंचे कांवड़ियों में भगवान शिव के प्रति गजब का उत्साह देखने को मिला। सिर पर कांवड़, कंधे पर जल और जुबां पर भोलेनाथ का नाम लिए श्रद्धालु कठिन रास्ते पर लगातार आगे बढ़ते रहे। कांवड़ यात्रा में पुरुषों के साथ महिलाओं की भी बड़ी संख्या नजर आई।
महिलाओं के जत्थे रास्ते भर भक्ति गीत और शिव भजनों का गायन करते हुए आगे बढ़ते रहे।
कहीं महिलाएं गीतों पर झूमती नजर आईं, तो वहीं युवा डीजे पर बज रहे शिव भजनों की धुन पर जमकर नृत्य करते दिखे। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। लंबी दूरी और रास्ते की थकान भी श्रद्धालुओं की आस्था के सामने फीकी नजर आई।
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कई किलोमीटर पैदल चलने के बावजूद कांवड़ियों के कदम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके चेहरे पर थकान के बजाय भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक की उत्सुकता दिखाई दे रही थी। श्रद्धालुओं का कहना था कि जब मन में भोलेनाथ के प्रति आस्था हो तो दूरी कितनी भी हो, कदम अपने आप मंजिल की ओर बढ़ते चले जाते हैं।
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बड़ी गंडक नदी का तट हर-हर महादेव, बोल बम और जय शिव शंकर के जयकारों से गूंजता रहा। दूर-दराज से पहुंचे कांवड़ियों में भगवान शिव के प्रति गजब का उत्साह देखने को मिला। सिर पर कांवड़, कंधे पर जल और जुबां पर भोलेनाथ का नाम लिए श्रद्धालु कठिन रास्ते पर लगातार आगे बढ़ते रहे। कांवड़ यात्रा में पुरुषों के साथ महिलाओं की भी बड़ी संख्या नजर आई।
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महिलाओं के जत्थे रास्ते भर भक्ति गीत और शिव भजनों का गायन करते हुए आगे बढ़ते रहे।
कहीं महिलाएं गीतों पर झूमती नजर आईं, तो वहीं युवा डीजे पर बज रहे शिव भजनों की धुन पर जमकर नृत्य करते दिखे। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था। लंबी दूरी और रास्ते की थकान भी श्रद्धालुओं की आस्था के सामने फीकी नजर आई।
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कई किलोमीटर पैदल चलने के बावजूद कांवड़ियों के कदम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उनके चेहरे पर थकान के बजाय भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक की उत्सुकता दिखाई दे रही थी। श्रद्धालुओं का कहना था कि जब मन में भोलेनाथ के प्रति आस्था हो तो दूरी कितनी भी हो, कदम अपने आप मंजिल की ओर बढ़ते चले जाते हैं।