{"_id":"6a345a9152896b82b0077299","slug":"teachers-staged-a-protest-from-the-bsa-office-to-the-collectorate-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-162010-2026-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: बीएसए कार्यालय से कलक्ट्रेट तक शिक्षकों ने किया प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: बीएसए कार्यालय से कलक्ट्रेट तक शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 19 Jun 2026 02:22 AM IST
विज्ञापन
टेट अनिवार्यता के विरोध में कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन करते अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पडरौना। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के देशव्यापी आह्वान पर बृहस्पतिवार को परिषदीय शिक्षकों ने टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय से कलक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया और मुख्यमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों का कहना था कि उन्हें नौकरी करते हुए 20 से 25 वर्ष बीत चुके हैं। नियुक्ति के समय उन्होंने सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद अब टेट अनिवार्य किए जाने से उनके सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। शिक्षकों का आरोप था कि सर्वोच्च न्यायालय में गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मंडल अध्यक्ष राजेश शुक्ल ने कहा कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की मांग है कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में अध्यादेश लाकर कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करे। शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। उनके अनुभव और सेवा का सम्मान किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
जिला अध्यक्ष अविनाश शुक्ला ने कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर निर्णय आया है और सरकार की ओर से प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा गया। इसलिए प्रधानमंत्री से कानून बनाकर कार्यरत शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है। कार्यवाहक महामंत्री दिलीप पांडेय ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए। इस दौरान हरेकृष्ण पांडेय, दिलीप सिंह, अनिरुद्ध त्रिपाठी, महेश कर्णधार, अमिताभ त्रिपाठी, हरेंद्र चौरसिया, नागेंद्र तिवारी, श्याम सुंदर तिवारी, अनूप गुप्ता, संजय मिश्र सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।
शिक्षकों का कहना था कि उन्हें नौकरी करते हुए 20 से 25 वर्ष बीत चुके हैं। नियुक्ति के समय उन्होंने सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद अब टेट अनिवार्य किए जाने से उनके सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। शिक्षकों का आरोप था कि सर्वोच्च न्यायालय में गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मंडल अध्यक्ष राजेश शुक्ल ने कहा कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए टेट अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की मांग है कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में अध्यादेश लाकर कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करे। शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। उनके अनुभव और सेवा का सम्मान किया जाना चाहिए।
जिला अध्यक्ष अविनाश शुक्ला ने कहा कि गलत तथ्यों के आधार पर निर्णय आया है और सरकार की ओर से प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा गया। इसलिए प्रधानमंत्री से कानून बनाकर कार्यरत शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है। कार्यवाहक महामंत्री दिलीप पांडेय ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए। इस दौरान हरेकृष्ण पांडेय, दिलीप सिंह, अनिरुद्ध त्रिपाठी, महेश कर्णधार, अमिताभ त्रिपाठी, हरेंद्र चौरसिया, नागेंद्र तिवारी, श्याम सुंदर तिवारी, अनूप गुप्ता, संजय मिश्र सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।