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Kushinagar News: यूरिया की किल्लत बरकरार, रात में ही लगानी पड़ रही कतार
Mon, 13 Jul 2026 02:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 13 Jul 2026 02:57 AM IST
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महुअवा बुजुर्ग महासोन साधन सहकारी समिति महुअवा बुजुर्ग महासोन में सुबह से खाद के लिए लाइन में ख
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तुर्कपट्टी। यूरिया की कमी से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। साधन सहकारी समितियों पर खाद के लिए किसान बारिश में छाता लेकर रात में ही कतार में लगाना शुरू कर दे रहे हैं। छह से आठ घंटे तक इंतजार के बावजूद कई किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन उन्हें निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है।
रुक-रुक कर हो रही बारिश से धान की रोपाई ने गति पकड़ ली है। ऐसे समय किसानों को मिट्टी की खाद (डीएपी) और यूरिया दोनों की आवश्यकता है, लेकिन अधिकांश समितियों पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। क्षेत्र की साधन सहकारी समिति महुअवां बुजुर्ग नंबर-एक, महासोन, उजारनाथ, गुरवालिया बाजार और धुनवलिया आदि पर दो से तीन दिन के अंतराल पर मात्र 200 से 300 बोरी यूरिया की खेप पहुंच रही है, जबकि किसानों की मांग दोगुनी बताई जा रही है। सीमित आपूर्ति के कारण कुछ ही घंटों में पूरा स्टॉक समाप्त हो जाता है। अधिकतर किसान निराश होकर लौट जाते हैं।
किसान हरेराम सिंह, श्रीराम सिंह, तोषिक अली, राजेश सिंह, महेंद्र दुबे और जयप्रकाश मिश्र ने बताया कि धान की रोपाई के लिए खाद की बेहद आवश्यकता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो रही है।
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कई बार दो-तीन दिन तक समितियों का चक्कर लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। जहां कहीं यूरिया होने की सूचना मिलती है, वहां पहुंचने पर पता चलता है कि स्टॉक पहले ही खत्म हो चुका है।
इस संबंध में साधन सहकारी समिति महुअवां बुजुर्ग के अध्यक्ष डॉ. रमेश त्रिपाठी ने बताया कि समितियों पर लगातार यूरिया उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन आपूर्ति कम होने से समस्या बनी हुई है। जब तक आवंटन नहीं बढ़ेगा, किसानों को राहत मिलनी मुश्किल है।
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रुक-रुक कर हो रही बारिश से धान की रोपाई ने गति पकड़ ली है। ऐसे समय किसानों को मिट्टी की खाद (डीएपी) और यूरिया दोनों की आवश्यकता है, लेकिन अधिकांश समितियों पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। क्षेत्र की साधन सहकारी समिति महुअवां बुजुर्ग नंबर-एक, महासोन, उजारनाथ, गुरवालिया बाजार और धुनवलिया आदि पर दो से तीन दिन के अंतराल पर मात्र 200 से 300 बोरी यूरिया की खेप पहुंच रही है, जबकि किसानों की मांग दोगुनी बताई जा रही है। सीमित आपूर्ति के कारण कुछ ही घंटों में पूरा स्टॉक समाप्त हो जाता है। अधिकतर किसान निराश होकर लौट जाते हैं।
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किसान हरेराम सिंह, श्रीराम सिंह, तोषिक अली, राजेश सिंह, महेंद्र दुबे और जयप्रकाश मिश्र ने बताया कि धान की रोपाई के लिए खाद की बेहद आवश्यकता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो रही है।
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कई बार दो-तीन दिन तक समितियों का चक्कर लगाने के बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। जहां कहीं यूरिया होने की सूचना मिलती है, वहां पहुंचने पर पता चलता है कि स्टॉक पहले ही खत्म हो चुका है।
इस संबंध में साधन सहकारी समिति महुअवां बुजुर्ग के अध्यक्ष डॉ. रमेश त्रिपाठी ने बताया कि समितियों पर लगातार यूरिया उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन आपूर्ति कम होने से समस्या बनी हुई है। जब तक आवंटन नहीं बढ़ेगा, किसानों को राहत मिलनी मुश्किल है।