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Lakhimpur Kheri News: फिटनेस टेस्ट में 5 वाहन फेल, स्कूली गाड़ियों में भी कमी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 29 Apr 2026 11:24 PM IST
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स्कूल वाहन में एक्सपायरी सिलिंडर सहित अन्य खामी मिलने पर फिटनेस में फेल वाहन। संवाद
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लखीमपुर खीरी। वाहनों की फिटनेस जांच के दौरान कई खामियां सामने आईं। बुधवार को फिटनेस के लिए पहुंचे 22 वाहनों में से पांच मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें वापस कर दिया गया। इनमें स्कूली वाहन भी शामिल रहे।
आरटीओ कार्यालय के पास पीलीभीत-बहराइच हाईवे किनारे दोपहर दो बजे से जांच शुरू हुई। संभागीय निरीक्षक प्राविधिक संजय कुमार ने दस्तावेजों की जांच के बाद वाहनों की फिटनेस परखी। एक स्कूल के वाहन में सीसी कैमरा नहीं था, दूसरे का पावदान कमजोर पाया गया। एक वाहन का शीशा चटका था और एक में फायर सिलिंडर एक्सपायर मिला। एक अन्य वाहन में इमरजेंसी गेट के पास सीटें लगी होने पर भी फिटनेस देने से मना कर दिया गया।
जिले में अब भी फिटनेस जांच मैन्युअल तरीके से आंखों के सहारे की जा रही है, जिससे वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन मुश्किल हो जाता है। यात्री और स्कूली वाहनों की जांच 10 से 15 मिनट, जबकि अन्य वाहनों की सात से आठ मिनट में पूरी कर दी जाती है।
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आरआई की कमी से बढ़ रही परेशानी
जिले में आरआई की स्थायी नियुक्ति नहीं है। सीतापुर के आरआई संजय कुमार अतिरिक्त प्रभार में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ही जांच करते हैं। इससे वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन का इंतजार
जिले में ऑटोमेटिक फिटनेस जांच के लिए टेस्टिंग स्टेशन खोलने की प्रक्रिया चल रही है। इसके शुरू होने पर वाहनों की तकनीकी जांच और प्रदूषण की स्थिति का सटीक आकलन संभव होगा।
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बारीकी से जांच का दावा
संभागीय निरीक्षक प्राविधिक संजय कुमार ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार बारीकी से जांच की जाती है। चेसिस, लाइट, इंडिकेटर, टायर सहित सभी पहलुओं की जांच के बाद ही फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है। कमी पाए जाने पर वाहन को वापस कर दिया जाता है।
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आरटीओ कार्यालय के पास पीलीभीत-बहराइच हाईवे किनारे दोपहर दो बजे से जांच शुरू हुई। संभागीय निरीक्षक प्राविधिक संजय कुमार ने दस्तावेजों की जांच के बाद वाहनों की फिटनेस परखी। एक स्कूल के वाहन में सीसी कैमरा नहीं था, दूसरे का पावदान कमजोर पाया गया। एक वाहन का शीशा चटका था और एक में फायर सिलिंडर एक्सपायर मिला। एक अन्य वाहन में इमरजेंसी गेट के पास सीटें लगी होने पर भी फिटनेस देने से मना कर दिया गया।
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जिले में अब भी फिटनेस जांच मैन्युअल तरीके से आंखों के सहारे की जा रही है, जिससे वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन मुश्किल हो जाता है। यात्री और स्कूली वाहनों की जांच 10 से 15 मिनट, जबकि अन्य वाहनों की सात से आठ मिनट में पूरी कर दी जाती है।
आरआई की कमी से बढ़ रही परेशानी
जिले में आरआई की स्थायी नियुक्ति नहीं है। सीतापुर के आरआई संजय कुमार अतिरिक्त प्रभार में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ही जांच करते हैं। इससे वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन का इंतजार
जिले में ऑटोमेटिक फिटनेस जांच के लिए टेस्टिंग स्टेशन खोलने की प्रक्रिया चल रही है। इसके शुरू होने पर वाहनों की तकनीकी जांच और प्रदूषण की स्थिति का सटीक आकलन संभव होगा।
बारीकी से जांच का दावा
संभागीय निरीक्षक प्राविधिक संजय कुमार ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार बारीकी से जांच की जाती है। चेसिस, लाइट, इंडिकेटर, टायर सहित सभी पहलुओं की जांच के बाद ही फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किया जाता है। कमी पाए जाने पर वाहन को वापस कर दिया जाता है।
