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Lakhimpur Kheri News: छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण के लिए बना सहयोगी नेटवर्क
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 14 Mar 2026 11:20 PM IST
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दुधवा में बिल्लियों को लेकर हुई बैठक में मौजूद विशेषज्ञ, डब्ल्यू डब्ल्यू एफ के सदस्य और वनाधिका
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पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व में छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई। इसमें भारत के साथ नेपाल और भूटान के वनाधिकारियों व वन्यजीव विशेषज्ञों ने भाग लिया और इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि छोटी जंगली बिल्लियां पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं। ये छोटे स्तनधारियों की आबादी को नियंत्रित कर प्राकृतिक चक्र को बनाए रखती हैं। विशेषज्ञों ने इनके आवास संरक्षण, आधुनिक निगरानी प्रणाली और सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से मंथन किया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि भारत, नेपाल और भूटान मिलकर एक सहयोगी नेटवर्क समूह बनाएंगे, जो इन प्रजातियों पर मंडरा रहे खतरों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा।
बैठक में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर डॉ. रिद्धिमा सोलंकी, प्रोग्राम मैनेजर सीवान मनोज कुमार, ज्वाइंट डायरेक्टर डब्ल्यूसीसीबी पवन, एआईजी एनटीसीए धवन रावत, प्रभागीय वनाधिकारी अरुणाचल प्रदेश चंदन राय, सीनियर फील्ड बायोलॉजिस्ट डॉ. अंकिता भट्टाचार्य, विश्व प्रकृति निधि के अबिर मान, भूटान के संजय ल्युनडप, उग्येन क्षेरिंग जोमोत्संग, डॉ. एसपी गोयल, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के उर्जित भट्ट व चंद्रशेखर, नेपाल के डॉ. राजेश गोपाल, ग्लोबल टाइगर फोरम के डॉ. एचएस नेगी, प्रमोद यादव, दुधवा के फील्ड निदेशक डॉ. एच. राजा मोहन, डीडी दुधवा जगदीश आर और कतर्नियाघाट के वनाधिकारी अक्षय पोपट सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बॉक्स
-- -पुस्तिका का विमोचन, बनेगी मार्गदर्शिका-- --
विश्व प्रकृति निधि द्वारा तैयार की गई छोटी जंगली बिल्लियों की पहचान से जुड़ी विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तिका फील्ड में तैनात वन कर्मियों और शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शिका का काम करेगी, जिससे इन दुर्लभ प्रजातियों की पहचान और दस्तावेजीकरण में आसानी होगी।
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बैठक में वक्ताओं ने कहा कि छोटी जंगली बिल्लियां पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं। ये छोटे स्तनधारियों की आबादी को नियंत्रित कर प्राकृतिक चक्र को बनाए रखती हैं। विशेषज्ञों ने इनके आवास संरक्षण, आधुनिक निगरानी प्रणाली और सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से मंथन किया।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि भारत, नेपाल और भूटान मिलकर एक सहयोगी नेटवर्क समूह बनाएंगे, जो इन प्रजातियों पर मंडरा रहे खतरों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा।
बैठक में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर डॉ. रिद्धिमा सोलंकी, प्रोग्राम मैनेजर सीवान मनोज कुमार, ज्वाइंट डायरेक्टर डब्ल्यूसीसीबी पवन, एआईजी एनटीसीए धवन रावत, प्रभागीय वनाधिकारी अरुणाचल प्रदेश चंदन राय, सीनियर फील्ड बायोलॉजिस्ट डॉ. अंकिता भट्टाचार्य, विश्व प्रकृति निधि के अबिर मान, भूटान के संजय ल्युनडप, उग्येन क्षेरिंग जोमोत्संग, डॉ. एसपी गोयल, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के उर्जित भट्ट व चंद्रशेखर, नेपाल के डॉ. राजेश गोपाल, ग्लोबल टाइगर फोरम के डॉ. एचएस नेगी, प्रमोद यादव, दुधवा के फील्ड निदेशक डॉ. एच. राजा मोहन, डीडी दुधवा जगदीश आर और कतर्नियाघाट के वनाधिकारी अक्षय पोपट सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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विश्व प्रकृति निधि द्वारा तैयार की गई छोटी जंगली बिल्लियों की पहचान से जुड़ी विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तिका फील्ड में तैनात वन कर्मियों और शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शिका का काम करेगी, जिससे इन दुर्लभ प्रजातियों की पहचान और दस्तावेजीकरण में आसानी होगी।