{"_id":"6a86011165f03354140bfa01","slug":"demonstration-to-register-the-population-of-the-hamlets-of-the-gram-panchayat-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1008-182815-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: ग्राम पंचायत के मजरों की आबादी दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: ग्राम पंचायत के मजरों की आबादी दर्ज कराने के लिए प्रदर्शन
Thu, 20 Aug 2026 12:46 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 20 Aug 2026 12:46 AM IST
विज्ञापन
पलिया तहसील में प्रदर्शन करते पटिहन के ग्रामीण। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पलियाकलां। ग्राम पंचायत पटिहन के मजरों, खासकर मुसाफिरनगर, की आबादी दर्ज कराने की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीण बुधवार को तख्तियां लेकर तहसील पहुंचे और प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि वे 40-50 वर्षों से बस्तियों में रह रहे हैं, लेकिन अब उन्हें उजाड़ने की साजिश की जा रही है।
ग्राम पंचायत पटिहन के प्रधान मंजीत कुमार मौर्य और पूर्व प्रधान श्रीकृष्ण भास्कर ने बताया कि वर्ष 1984-1985 में तत्कालीन सरकारों ने बाढ़ प्रभावित और भूमिहीन गरीब परिवारों को सीलिंग की जमीन पर बसाया था। वर्षों से यहां रह रहे ग्रामीणों ने मेहनत-मजदूरी कर पक्के मकान बनाए। सरकार की ओर से बिजली कनेक्शन, इंटरलॉकिंग सड़कें, पानी की टंकी और कक्षा पांच तक मान्यता प्राप्त आंबेडकर बाल विद्या मंदिर जैसी सुविधाएं भी स्थापित की गईं।
आरोप है कि वर्ष 1978 से 2023 तक चली चकबंदी प्रक्रिया के दौरान धारा 52 की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ लोगों ने पुरानी बसी आबादी के गाटों पर चुपचाप अपने चक खड़े करवा लिए। अब उन्हीं चकों के आधार पर धारा 24 के तहत मुकदमे दर्ज कराकर गरीब और निर्बल परिवारों को उजाड़ने और धमकाने का सिलसिला शुरू किया गया है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर मांग की कि स्थलीय निरीक्षण के बिना धारा 24 के तहत एकतरफा कार्रवाई न की जाए। मौके की जांच कराकर मजरों की आबादी को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाए।
प्रदर्शन के बाद एसडीएम पुष्पक ने मामले का संज्ञान लेते हुए मौके का मुआयना कराने और उचित व निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनके आशियाने उजाड़ने का प्रयास किया गया तो आंदोलन को व्यापक किया जाएगा। संवाद
विज्ञापन
ग्राम पंचायत पटिहन के प्रधान मंजीत कुमार मौर्य और पूर्व प्रधान श्रीकृष्ण भास्कर ने बताया कि वर्ष 1984-1985 में तत्कालीन सरकारों ने बाढ़ प्रभावित और भूमिहीन गरीब परिवारों को सीलिंग की जमीन पर बसाया था। वर्षों से यहां रह रहे ग्रामीणों ने मेहनत-मजदूरी कर पक्के मकान बनाए। सरकार की ओर से बिजली कनेक्शन, इंटरलॉकिंग सड़कें, पानी की टंकी और कक्षा पांच तक मान्यता प्राप्त आंबेडकर बाल विद्या मंदिर जैसी सुविधाएं भी स्थापित की गईं।
विज्ञापन
आरोप है कि वर्ष 1978 से 2023 तक चली चकबंदी प्रक्रिया के दौरान धारा 52 की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ लोगों ने पुरानी बसी आबादी के गाटों पर चुपचाप अपने चक खड़े करवा लिए। अब उन्हीं चकों के आधार पर धारा 24 के तहत मुकदमे दर्ज कराकर गरीब और निर्बल परिवारों को उजाड़ने और धमकाने का सिलसिला शुरू किया गया है।
विज्ञापन
ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन देकर मांग की कि स्थलीय निरीक्षण के बिना धारा 24 के तहत एकतरफा कार्रवाई न की जाए। मौके की जांच कराकर मजरों की आबादी को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जाए।
प्रदर्शन के बाद एसडीएम पुष्पक ने मामले का संज्ञान लेते हुए मौके का मुआयना कराने और उचित व निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनके आशियाने उजाड़ने का प्रयास किया गया तो आंदोलन को व्यापक किया जाएगा। संवाद